Saturday, April 5, 2025

"हम चिमनी के पास बैठकर कॉफी पीते हैं, सैनिक बर्फीली हवाओं से ...": दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दो सैन्यकर्मियों को विकलांगता पेंशन के भुगतान से जुड़े आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया और इस बात को रेखांकित किया कि सैनिक अक्सर कठोर एवं दुर्गम परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं तथा बीमारी एवं विकलांगता की आशंका देश सेवा की इच्छा के साथ “पैकेज डील” के रूप में आती है.

न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 27 मार्च को पारित आदेश में देशभक्ति पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की “प्रेरक टिप्पणियों” को याद किया और कहा, ‘‘जब हम चिमनी के पास बैठकर गर्म कैपुचीनो (एक तरह की कॉफी) की चुस्कियां ले रहे होते हैं, तब सैनिक सरहद पर बर्फीली हवाओं से जूझ रहे होते हैं और एक पल में अपनी जान की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहते हैं.”

पीठ ने कहा, “इसलिए, बीमारी और विकलांगता की आशंका, देश सेवा की इच्छा और दृढ़ संकल्प के साथ एक ‘पैकेज डील' के रूप में आती है. जिन परिस्थितियों में सैनिक राष्ट्र की सेवा करते हैं, उनमें सबसे बहादुर सैनिक के भी बीमारियों की चपेट में आने का खतरा रहता है, जो कभी-कभी उसे अपाहिज बनाने वाली प्रकृति की हो सकती हैं, जिससे वह सैन्य सेवा जारी रखने में असमर्थ हो जाता है.” पीठ में न्यायमूर्ति अजय दिगपॉल भी शामिल थे. पीठ ने आगे कहा, “ऐसी परिस्थितियों में राष्ट्र, सैनिक की ओर से की गई निस्वार्थ सेवा के बदले कम से कम उसे बचे हुए वर्षों में सांत्वना और सुकून तो प्रदान ही कर सकता है.” पीठ ने कहा, “राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की ओर से अपने शपथ ग्रहण समारोह में की गई प्रेरक टिप्पणी कि ‘यह मत पूछो कि तुम्हारा देश तुम्हारे लिए क्या कर सकता है; यह पूछो कि तुम अपने देश के लिए क्या कर सकते हो', आज भी देशभक्ति और देशप्रेम के सभी मायनों का भव्य सारांश प्रस्तुत करती है.”

अदालत ने कहा, “ऐसे लोग भी हैं, जो इन शब्दों को अपने जीवन में आत्मसात कर लेते हैं और देश के लिए अपना सबकुछ कुर्बान करने को तैयार रहते हैं... जो उस समय सरहद पर बर्फीली हवाओं से जूझ रहे होते हैं और एक पल में अपनी जान की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहते हैं, जब हम चिमनी के पास बैठकर अपनी गर्म कैपुचीनो की चुस्की ले रहे होते हैं. क्या राष्ट्र और उसके नागरिक के रूप में हम, मातृभूमि के इन सच्चे सपूतों को ऐसा कुछ भी दे सकते हैं, जो कभी भी बहुत अधिक हो सकता है?” पीठ ने कहा कि मानव शरीर, जो त्वचा और हड्डियों से बना है, हमेशा “आत्मा के साथ तालमेल रखने” में सक्षम नहीं होता और इसलिए कानून में उन सैनिकों को विकलांगता पेंशन जैसे वित्तीय लाभ प्रदान करने का प्रावधान किया गया है, जो किसी बीमारी या विकलांगता के शिकार हो जाते हैं, जिसकी उत्पत्ति या बढ़ने के लिए सैन्य सेवा जिम्मेदार होती है.

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिनमें दो पूर्व सैन्य अधिकारियों को विकलांगता पेंशन देने के सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती गई थी. इनमें से एक अधिकारी 1985 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे, लेकिन 2015 में टाइप-2 मधुमेह के चलते उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था और विकलांगता पेंशन देने से इनकार कर दिया गया था.वहीं, दूसरे अधिकारी रक्षा सुरक्षा कोर से जुड़े हुए थे और उन्हें “उनके दाहिने पैर के निचले हिस्से की परिधीय धमनी के अवरुद्ध होने” के बावजूद विकलांगता पेंशन देने से मना कर दिया गया था.

केंद्र ने अपनी याचिकाओं में दलील दी थी कि दोनों अधिकारी “पीस पोस्टिंग” पर थे और उनकी बीमारी उनकी सैन्य सेवा के कारण नहीं थी या उससे बढ़ी नहीं थी.“पीस पोस्टिंग” का मतलब कम अस्थिर क्षेत्रों में गैर-परिचालन भूमिकाओं में तैनाती से है, जिसमें युद्ध या उच्च जोखिम वाली तैनाती के विपरीत अक्सर प्रशासनिक, प्रशिक्षण या सहायक भूमिकाएं शामिल होती हैं.

हाईकोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि दोनों मामलों में बीमारी की शुरुआत अधिकारियों की सैन्य सेवा के दौरान हुई थी और कहा कि केवल यह दलील देना कि वे “पीस पोस्टिंग” पर थे, रिलीज मेडिकल बोर्ड (आरएमबी) पर यह दिखाने का दायित्व डालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि बीमारी के लिए सेवा जिम्मेदार नहीं थी.पीठ ने कहा कि यह सर्वविदित है कि मधुमेह की बीमारी तनावपूर्ण परिस्थितियों में रहने के कारण उत्पन्न हो सकती है या बढ़ सकती है. उसने कहा कि “पीस पोस्टिंग” के मामले में आरएमबी पर यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह बीमारी के कारण की पहचान करे और इसकी उत्पत्ति के कारक को दावेदार अधिकारी की सैन्य सेवा से अलग करे.

पीठ ने कहा, “हम यह दोहराना चाहेंगे कि सैन्य कर्मियों को अपनी सेवा के दौरान विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, और केवल यह तथ्य कि किसी बीमारी की शुरुआत उस समय हुई होगी, जब अधिकारी “पीस पोस्टिंग” पर था, निर्विवाद रूप से यह संकेत नहीं देता कि बीमारी सैन्य सेवा के कारण नहीं थी.” उसने कहा, “हम दोहराते हैं कि कुछ रोग और विकार ऐसे होते हैं, जो उत्पन्न तो हो चुके होते हैं, लेकिन उनके लक्षण उभरने में समय लग जाता है, जिससे ये देर में पकड़ में आते हैं.” पीठ ने कहा, “उपरोक्त सभी कारणों से, दोनों रिट याचिकाओं को खारिज किया जाता है और एएफटी की ओर से पारित आदेशों को पूरी तरह से बरकरार रखा जाता है.”



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Friday, April 4, 2025

यूरिक एसिड का देसी इलाज है किचन में मौजूद ये ड्रिंक्स, आज से ही करें डाइट में शामिल

Drinks For High Uric Acid: यूरिक एसिड आज के समय की एक एक बड़ी समस्या में से एक है. आपको बता दें कि शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ता लेवल कई परेशानियों की वजह बन सकता है. इसकी वजह से शरीर में क्रिस्टल बन सकते हैं और यह गाउट का कारण बन सकता है. यूरिक एसिड के हाई लेवल को कंट्रोल करने के लिए खानपान में बदलाव सबसे कारगर उपाय माना जाता है. हाई यूरिक एसिड, जिसे हाइपरयूरिसीमिया भी कहा जाता है, आमतौर पर शुरूआत में इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते ज्यादातर लोगों को इसके बारे में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि यूरिक एसिड का स्तर ज्यादा न हो जाए. इसकी वजह से पेशाब में दिक्कत, यूरिन में बदबू, यूरिन में खून आना, दर्द, मतली, उल्टी, सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. तो चलिए जानते हैं यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए इन ड्रिंक्स का करें सेवन. 

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए ड्रिंक्स- (Best Drinks For Uric Acid)

1. अजवाइन का पानी- 

किचन में मौजूद अजवाइन एक ऐसा मसाला है जिसे स्वाद के साथ सेहत के लिए भी कमाल माना जाता है. शरीर में मौजूद यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मददगार है अजवाइन का पानी. 

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Photo Credit: iStock

2. जीरा पानी- 

जीरा पानी डिटॉक्सिफिकेशन, पाचन में मददगार माना जाता है. इसके सेवन से शरीर में बड़े हुए यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है. 

3. नींबू पानी-

नींबू पानी यूरिक एसिड को घोलने और शरीर से बाहर निकालने में मदद कर सकता है. बढ़े हुए यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए आप नींबू पानी का सेवन सुबह खाली पेट कर सकते हैं.

4. हल्दी वाला पानी- 

किचन में मौजूद हल्दी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने और यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं. 

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Wednesday, April 2, 2025

Tuesday, April 1, 2025

हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधम सिंह नगर के विभिन्न स्थानों के बदले नाम

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए जनपद हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधम सिंह नगर में स्थित विभिन्न स्थानों के नाम में परिवर्तन की घोषणा की. मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न स्थानों  के नाम में परिवर्तन जन भावना और भारतीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप किया जा रहा है.  इससे लोग भारतीय संस्कृति और इसके संरक्षण में योगदान देने वाले महापुरुषों से प्रेरणा ले सकेंगे.

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, हरिद्वार जनपद में औरंगजेबपुर का शिवाजी नगर, गाजीवाली का आर्य नगर, चांदपुर का ज्योतिबा फुले नगर, मोहम्मदपुर जट का मोहनपुर जट, खानपुर कुर्सली का अंबेडकर नगर, इंदरीशपुर का नंदपुर, खानपुर का श्री कृष्णपुर, अकबरपुर फाजलपुर का नाम विजयनगर किया गया है.

देहरादून जनपद में मियांवाला का रामजी वाला, पीरवाला का केसरी नगर, चांदपुर खुर्द का पृथ्वीराज नगर, अब्दुल्ला नगर का नाम दक्ष नगर किया गया.

जनपद नैनीताल में नवाबी रोड़ का अटल मार्ग, पनचक्की से आईटीआई मार्ग का नाम गुरु गोवलकर मार्ग किया गया. 

उधमसिंह नगर में नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी का नाम बदलकर कौशल्या पुरी किए जाने की घोषणा की गई है.



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Monday, March 31, 2025

विदेशी निवेशकों की पसंद बना भारतीय शेयर बाजार, छह सत्रों में की 31,000 करोड़ रुपये की खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार में तेजी के बीच विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं. ताजा डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, बीते छह कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 31,000 करोड़ रुपये का निवेश शेयर बाजार में किया है. 

एफपीआई के बड़ी मात्रा में निवेश करने की वजह शेयर बाजार का आकर्षक वैल्यूएशन, डॉलर के मुकाबले रुपये का मजबूत होना और अर्थव्यवस्था में तेजी आना है. एफपीआई की वापसी से भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी रिकवरी देखने को मिली है.

समीक्षा अवधि के दौरान, निफ्टी में करीब 6 प्रतिशत की रिकवरी देखने को मिली है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. एफपीआई का रुख बिकवाली से बदलकर खरीदारी होने के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जिसमें शेयर बाजार का अपने सितंबर 2024 के पीक से 16 प्रतिशत नीचे आना, रुपये का मजबूत होना और महंगाई में कमी आना, आईआईपी और जीडीपी ग्रोथ का मजबूत होना शामिल हैं.

डिपॉजिटरी के डेटा के मुताबिक, मार्च में एफपीआई की खरीदारी बढ़ने के कारण कुल आउटफ्लो कम होकर 3,973 करोड़ रुपये हो गया है. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आने वाले समय में एफपीआई निवेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल को घोषित किए जाने वाले पारस्परिक टैरिफ के परिणाम पर निर्भर करेगा.

विशेषज्ञों ने आगे कहा कि अगर टैरिफ अधिक नहीं होते हैं तो यह रैली जारी रह सकती है. बीडीओ इंडिया के मनोज पुरोहित ने कहा, "इस सप्ताह स्थिति बदल गई है, एफपीआई इनफ्लो हरे निशान में शुरू हुआ है, जिससे भारतीय बाजार में रौनक लौट आई है, हालांकि यह वित्तीय वर्ष का अंतिम सप्ताह है, जिसमें आमतौर पर भारी मुनाफावसूली होती है."

बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन शानदार रहा. निफ्टी और सेंसेक्स करीब 0.70 प्रतिशत बढ़कर 23,519.35 और 77,414.92 पर बंद हुआ. इस तेजी का नेतृत्व बैंकिंग शेयरों ने किया. बैंक निफ्टी करीब 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 51,564.81 पर बंद हुआ. सेक्टोरल आधार पर निफ्टी पीएसई और एफएमसीजी इंडेक्स टॉप गेनर्स थे, जबकि मीडिया और फार्मा इंडेक्स टॉप लूजर्स थे.



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