Tuesday, January 3, 2023

बंद नोट और राजनीतिक नीयत का खोट

सुप्रीम कोर्ट ने 2016 की नोटबंदी को वैध क़रार दिया है. निस्संदेह उसके सामने इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था. कल्पना करें कि अगर उसने इसे अवैध भी घोषित कर दिया होता तो क्या होता? 2016 में लोगों ने जो नोट बदले और जिन्हें बदला गया, क्या वे वापस आ जाते?क्‍या 500 और 2000 के नए नोट अवैध हो जाते? जाहिर है, यह कुछ नहीं होना था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का कम से कम प्रभाव के स्तर पर कोई मतलब नहीं था. 

इस मामले की एक सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही भी थी और मामला बंद देने का सुझाव दिया था. लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील पी चिदबंरम की इस दलील ने उसे अपना विचार बदलने को मजबूर किया कि इससे नोटबंदी जैसे फ़ैसलों की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट होगी. ये फ़ैसला बीते दिनों को भले पलट न सके, लेकिन आने वाले दिनों के लिए नज़ीर बन सकता है.  

लेकिन अब जो फ़ैसला आया है, उसके लिए निश्चय ही पी चिदंबरम ने तब ये दलील नहीं दी होगी. वे शायद मान कर चल रहे हों कि नोटबंदी के फ़ैसले में जो हड़बड़ी और गोपनीयता बरती गई, उसकी वजह से सारी प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ध्यान देगा. इस दौरान यह सवाल बार-बार पूछा गया कि भारत में मुद्रा-व्यवस्था देखने वाले रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की इस फैसले में क्या भूमिका रही और क्या नोटबंदी से पहले उसकी राय ली गई? इस मामले में आरटीआई से मिली सूचनाएं आंख खोलने वाली हैं. 11 मार्च 2019 को इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी के एलान से सिर्फ ढाई घंटे पहले आरबीआई के गवर्नर रहे ऊर्जित पटेल के नेतृत्व में आरबीआई बोर्ड की बैठक हुई. इस बैठक के मिनट पर 15 दिसंबर, 2016 को दस्तख़त हुए. यानी आरबीआई ने आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार को नोटबंदी की मंज़ूरी नहीं दी थी. इसके अलावा आरबीआई ने इस बात में शक जताया था कि इन नोटों को बंद करने से काले धन की समस्या पर काबू पाया जा सकेगा. आरबीआई ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि काला धन नगदी में नहीं रखा जाता, वह सोने या ज़मीन-जायदाद में निवेश के काम आता है. बाद में आरबीआई के आंकड़ों ने ही बताया कि नोटबंदी के बाद नोट बदलने की प्रक्रिया में लगभग सारे नोट वापस बैंकिंग सिस्टम में लौट आए. सरकार का अनुमान था कि करीब 3 लाख करोड़ नोट सिस्टम से बाहर रह जाएंगे, लेकिन बस दस हज़ार करोड़ के आसपास नोट ही नहीं लौटे.  

तो पुराने नोट बंद करने की जो सबसे बड़ी वजह बताई गई, वह अपने प्रारंभिक दिनों में ही नाकाम साबित हुई. आतंकवाद पर क़ाबू पाने का जो दावा किया गया, उसकी हक़ीक़त हम अब भी देख रहे हैं. कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने और उसका राज्य का दर्जा छीन लिए जाने के बावजूद वहां से आतंकी घटनाओं में कमी आती नज़र नहीं आ रही. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में नोटबंदी के मक़सद को भी रेखांकित किया. 

बहरहाल, न सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर सवाल खड़े करने का औचित्य है और न उसकी नीयत पर. लेकिन यह समझने की ज़रूरत है कि अदालतें अपनी स्वायत्तता के बावजूद अंततः कार्यपालिका पर ही निर्भर करती हैं. उनके सामने जो सबूत पेश किए जाते हैं, जो मामले रखे जाते हैं, उन्हीं को आधार बना कर वे फ़ैसले करती हैं. नोटबंदी के मामले में भी उन्होंने उसके तकनीकी पहलू की चर्चा की है. यानी औपचारिक तौर पर मान लिया है कि सरकार ने यह फ़ैसला करते हुए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से ठीक से मशविरा किया था और उसी की सलाह पर नोटबंदी लागू की है.  

शुक्र है कि पांच जजों के संविधान पीठ में एक जज ने अलग फ़ैसला लिखा है जिससे यह पता चलता है कि एक ही उपलब्ध सामग्री के आधार पर सर्वोच्च जजों की राय भी अलग हो सकती है. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने साफ़ तौर पर लिखा कि ये नोटबंदी अवैध थी, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया को दिमाग न लगाने को कहा गया और इतने अहम मसले पर संसद में जाना ज़रूरी नहीं माना गया. जस्टिस नागरत्ना आने वाले वर्षों में सुप्रीम कोर्ट की चीफ़ जस्टिस भी बन सकती हैं.  

मगर इस पूरे मामले में कुछ सबक हमारे लिए छुपे हैं. लोकतांत्रिक लड़ाइयां हमेशा अदालतों के भरोसे नहीं लड़ी जा सकतीं. कई बार इसमें मुंह की खानी पड़ सकती है. क्योंकि अदालती कार्यवाही से काफ़ी पहले पुलिस-प्रशासन की जांच-पड़ताल से लेकर उनके दावे और साक्ष्य तक मुक़दमों का रुख़ बदलते रहते हैं. ध्यान से देखें तो हाल के वर्षों में ऐसे कम मौक़े आए हैं जब अदालतों से राजनीतिक या नागरिक संगठनों की अपेक्षाएं पूरी हुई हों. भीमा कोरेगांव मामले में कई लोग सिर्फ़ आरोपों के चलते बरसों से जेलों में बंद हैं जिनमें जाने-माने बुद्धिजीवी और लेखक रहे हैं. यूएपीए के इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग क़ानून के मामले में हमने सरकारी तंत्र को मिली बेपनाह शक्तियों को अदालत का समर्थन देखा है. जबकि इसके समानांतर बड़े और ताक़तवर लोगों को बहुत आसानी से क़ानून के शिकंजे से निकलता पाया है. ताज़ा मामला हरियाणा के खेल मंत्री रहे संदीप सिंह का है जिन पर यौन उत्पीड़न का आरोप है लेकिन जो बस अपना एक ओहदा छोड़ कर निश्चिंत हैं. क़ानून कहता है कि ऐसे आरोपों में पहला काम आरोपी की गिरफ़्तारी है. लेकिन संदीप सिंह या ऐसे दूसरे ताक़तवर लोगों के मामले में यह क़ानून जैसे अपने कदम खींच लेता है. यही नहीं, सरकारें कई बार अदालतों से अपना मक़सद पूरा कराती हैं और अदालतें जब ये मक़सद पूरा करती नज़र नहीं आतीं, वे अदालतों को उनकी सीमाएं बताने लगती हैं. इसका एक उदाहरण अयोध्या और शबरीमला के मामलों में अदालती हस्तक्षेप है. जो लोग अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला सर झुका कर स्वीकार करने की बात करते हैं, वही लोग शबरीमला के मामले में अपना रुख़ बदलने में हिचकते नहीं.  

बहरहाल, नोटबंदी पर लौटें. लोगों को नवंबर-दिसंबर 2016 के वे महीने याद हैं जब पूरा हिंदुस्तान अपना कामकाज छोड़ कर बैंकों और एटीएम शाखाओं के आगे लाइन लगाए खड़ा था ताकि उसे कुछ कैश मिल सके. इस फ़ैसले की सबसे ज़्यादा मार उन गरीबों ने झेली जिनके पास डेबिट और क्रेडिट कार्ड नहीं होते थे और जो सिर्फ़ रोज़ाना मिलने वाले रुपयों से अपना घर चलाते थे. महीनों तक उनका काम छिना रहा, उनके सामने अनिश्चितता के बादल मंडराते रहे. उच्च मध्यवर्गीय लोगों को भी दिक्कत हुई, लेकिन कम हुई, क्योंकि उनके पास वे सारे कार्ड थे जो रुपयों की जगह काम आते थे. इसके बाद ही रातों-रात सरकार ने नोटबंदी का एजेंडा बदल दिया और ऑनलाइन कारोबार को नोटबंदी का एक लक्ष्य बताने लगी.  

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को वैसे भी इस राजनीतिक-आर्थिक अराजकता की गली में नहीं जाना था. उसका काम बस यह देखना था कि जिस प्रक्रिया के तहत यह फैसला हुआ, वह संवैधानिक है या नहीं. अदालत ने अपने-आप को बस इस एक काम तक सीमित रखा. इसे संवैधानिक मान कर 4 जजों ने सरकार को बड़ी राहत दी है. संभव है, आने वाले दिनों में फिर लोकतांत्रिक और समानांतर संस्थाओं की अनदेखी कर कोई सरकार ऐसे मनमाने फ़ैसले करने का दुस्साहस करे जिसकी मार गरीबों पर पड़े. संकट इतना भर नहीं है, इससे भी बड़ा है. संसद और अदालत- दोनों को ग़ैऱज़रूरी और अप्रासंगिक साबित करने में लगी सरकारें दरअसल देर-सबेर लोकतंत्र को भी अपने विकास की राह का रोड़ा साबित करने लगती हैं. हमारे यहां यह ख़तरा बढ़ रहा है.

प्रियदर्शन NDTV इंडिया में एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.



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दिल्ली दंगे के 2 आरोपियों को अदालत ने आरोप से किया बरी

उत्तर पूर्वी दिल्ली में 2020 में हुए दंगे के दो आरोपियों को बरी करते हुए अदालत ने कहा कि एकमात्र गवाह के ‘संदिग्ध व्यक्ति' होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज की गई और आरोपी को गिरफ्तार कर और कुछ गवाहों की व्यवस्था कर ‘जांच का दिखावा' किया गया. ऐसे में सबूत कैसे अदालत की कसौटी पर खरे उतरेंगे.

 अदालत ने कहा कि यह ‘‘पीड़ितों की पीड़ा के प्रति पूरी तरह से उदासीनता है.'' अदालत अजय और गौरव पांचाल के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई कर रही थी, जिनपर दंगाइयों के गैर कानूनी जन समूह का सदस्य होने, अवैध हथियारों से लैस होने और संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन की आड़ लेकर तोड़-फोड़, हिंसा, आपराधिक घुसपैठ और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप थे.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, दोनों आरोपी उस भीड़ का हिस्सा थे, जिसने 25 फरवरी 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली के मीत नगर में कपड़ों की दुकान में तोड़-फोड़ और लूटपाट की थी. मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अभिनव पांडेय ने 16 दिसंबर को सुनाए गए आदेश में कहा, ‘‘मेरी राय है कि अभियोजन संदेह से परे अपने मामले को स्थापित करने में विफल रहा. इसलिए आरोपियों को बरी किया जाता है.''

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Monday, January 2, 2023

Ukraine faces grim start to 2023 after fresh Russian attacks

Ukrainians have had a grim start to 2023 following a blistering New Year’s Eve assault that authorities say killed at least three civilians across the country

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राजस्थान: खाई में गिरी कार, हादसे में 2 की मौत तीन घायल

कोटा में रविवार को एक कार के सड़क किनारे पेड़ से टकराकर खाई में गिर जाने से दो लोगों की मौत हो गयी और तीन अन्य घायल हो गये. पुलिस ने यह जानकारी दी. मृतकों की पहचान मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के रहने वाले रामचरणन मीणा (49) और उनकी पत्नी सिया मीणा (48) के रूप में हुई है. पुलिस ने कहा कि दुर्घटना खतौली थाना क्षेत्र के सहनाली गांव के पास दोपहर करीब दो बजे हुई, जब कार मध्य प्रदेश की ओर जा रही थी. बताया जाता है कि कार तेज गति से चल रही थी और रास्ते में आवारा मवेशी आ गए. खतौली के थाना प्रभारी रामस्वरूप मीणा ने बताया कि मवेशियों को बचाने के प्रयास में चालक संतुलन खो बैठा और वाहन सड़क किनारे एक पेड़ से टकराकर गहरी खाई में गिर गया.

उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इटावा के एक अस्पताल ले गई जहां डॉक्टरों ने दंपति को मृत घोषित कर दिया. तीन घायलों को इलाज के लिए कोटा रेफर किया गया. एसएचओ ने कहा, उनकी हालत ‘‘गंभीर'' है. उन्होंने कहा कि घायलों की पहचान हरि सिंह मीणा (38), उनकी पत्नी राममूर्ति (35) और मंजू जाट (40) के रूप में हुई है. उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं.

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दिल्ली के GK-2 में वृद्धाश्रम में लगी आग, दो महिलाओं की मौत

दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-2 में एक वृद्धाश्रम में रविवार सुबह आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि उन्हें ‘अंतरा केयर फॉर सीनियर्स' नामक वृद्धाश्रम में आग लगने की सूचना सुबह पांच बजकर 10 मिनट पर मिली. अग्निशमन विभाग ने कहा कि दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर भेजी गईं और आग पर सुबह छह बजकर 50 मिनट तक काबू पा लिया गया. आग बुझाने के अभियान में सहयोग देने वाली पुलिस ने बताया कि आग इमारत की तीसरी मंजिल पर लगी थी.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, आग पर काबू पाने के बाद तीसरी मंजिल पर पूरी तरह से जली हुई दो लाशें मिलीं. अग्निशमन विभाग के मुताबिक, मृतकों की पहचान 86 वर्षीय कंचन अरोड़ा और 92 साल की कमल के रूप में की गई है. पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) चंदन चौधरी ने कहा कि अपराध शाखा और फॉरेंसिक प्रयोगशाला की टीम को मौके पर बुलाया गया है. उन्होंने बताया कि घटना में झुलसे एक वरिष्ठ नागरिक को मैक्स अस्पताल साकेत में भर्ती कराया गया है, जबकि 12 अन्य बुजुर्गों को अंतरा केयर की ओखला शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया है.

चौधरी ने कहा कि आग लगने की वजह फिलहाल पता नहीं लग सकी है और घटना की जांच जारी है. दक्षिणी दिल्ली में पिछले एक हफ्ते में आग लगने की यह दूसरी घटना है. इससे पहले, बृहस्पतिवार को आधी रात के बाद संगम विहार इलाके में तीन मंजिला एक इमारत में मौजूद दुकानों में आग लग गई थी. पुलिस ने कहा था कि आग के कारण पूरी इमारत में धुआं भर गया था और पहली व दूसरी मंजिल पर रहने वाले परिवारों को सीढ़ियों की मदद से बचाया गया था.

इस घटना में 14 लोगों को इमारत से सुरक्षित निकाला गया था और इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था. इस मामले में दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने रविवार को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया. आयोग ने इसे ‘‘बेहद गंभीर और दर्दनाक मामला'' बताते हुए मामले में दर्ज प्राथमिकी की प्रति, कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों का विवरण और कोई गिरफ्तारी की गई है या नहीं, इस बारे में भी जानकारी मांगी.

आयोग ने यह भी जानकारी मांगी है कि क्या वृद्धाश्रम के पास समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग से आवश्यक लाइसेंस लिये गए थे. इस मामले में छह जनवरी तक कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है.



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दो-ढाई साल पहले ही OBC आरक्षण के लिए आयोग गठित होना चाहिए था : शिवपाल सिंह यादव

समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने के लिए जो आयोग अब गठित हुआ है, उसे दो-ढाई साल पहले ही गठित करना चाहिए था.

पूर्व मंत्री एवं सपा नेता यादव ने रविवार को यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘समाजवादियों ने पहले आरक्षण पाने के लिए लड़ाई लड़ी और अब आरक्षण बचाने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ेगी. अब संघर्ष सड़कों पर चलेगा.'' उन्‍होंने कहा कि सरकार को आयोग बनाकर समय पर आरक्षण लागू करके समय से चुनाव कराना चाहिए था लेकिन सरकार पिछड़े वर्ग का आरक्षण खत्म करना चाह रही थी. उन्होंने आरेाप लगाया कि इस सरकार ने पहले पिछड़ों का आरक्षण और फिर दलितों का आरक्षण खत्म करने की साजिश की है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्गों को आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए पांच सदस्यीय पिछड़ा वर्ग आयोग का बुधवार को गठन किया. इस आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राम अवतार सिंह करेंगे. नगर विकास विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, आयोग का कार्यकाल अध्यक्ष और सदस्यों के पदभार ग्रहण करने के दिन से छह महीने के लिए होगा.

इस आयोग का गठन ऐसे समय में किया गया है जब एक दिन पूर्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की अधिसूचना के मसौदे को खारिज कर दिया और ओबीसी को बगैर आरक्षण दिए स्थानीय निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया.

राम अवतार सिंह ने गत दिनों ‘पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा था कि निर्धारित प्रक्रिया पर उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश के अनुसार पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और इस प्रक्रिया में लगभग छह महीने लगेंगे.

पत्रकारों से बातचीत में शिवपाल सिंह यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार का मंसूबा पिछड़ों, दलितों का आरक्षण समाप्त करने का है. उन्होंने कहा, ‘‘निकाय चुनावों को आगे टालने के लिए सरकार आरक्षण को ऐसे ही टाले रही है और जो आयोग अब बन रहा है उसे तो दो-ढाई साल पहले ही बन जाना चाहिए था.''



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कुपवाड़ा में सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और मादक पदार्थ बरामद किए, एक गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार करके उसके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और मादक पदार्थ बरामद किए गए. पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि हथियार और मादक पदार्थ घाटी में एक आतंकवादी संगठन के लिए थे.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उस विशेष सूचना के आधार पर कि कुपवाड़ा के करनाह के चटकड़ी इलाके में दो व्यक्तियों द्वारा हथियारों, गोला-बारूद और मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप की तस्करी की गई है, वहां सुरक्षा बलों द्वारा तलाशी अभियान चलाया गया. उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान चटकड़ी निवासी उमर अजीज नामक व्यक्ति को पकड़ा गया.

अधिकारी ने बताया कि लगातार पूछताछ करने पर उसने स्वीकार किया कि उसे अपने सहयोगी के साथ हथियारों, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की खेप मिली थी. उन्होंने बताया कि इसके बाद विस्तृत तलाशी ली गई और गरंगनार्ड चटकड़ी के निकट नशीले पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद की एक बड़ी खेप बरामद की गई.

अधिकारी ने बताया कि बरामद किए गए सामान में पांच पिस्तौल, पिस्तौल की 10 मैगजीन, पिस्तौल की 77 गोलियां, चार हथगोले और हेरोइन जैसे पदार्थ के 9.450 किलोग्राम वजन के 10 पैकेट शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और इस संबंध में जांच की जा रही है. अधिकारी ने बताया कि सूचना के मुताबिक, यह खेप प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट के लिए थी.



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Sunday, January 1, 2023

कोविड की समीक्षा को लेकर PM के प्रधान सचिव ने अधिकारियों के साथ की बैठक, दिए अहम निर्देश

कोविड की स्थिति, तैयारी और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की गई. पीएम के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान देश में कोविड की स्थिति और प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा के लिए भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. उन्हें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ब्राजील आदि सहित कुछ देशों में कोविड में स्पाइक्स के साथ महामारी के विकसित वैश्विक परिदृश्य से अवगत कराया गया.

समीक्षा बैठक के दौरान, यह बताया गया कि पूरे जीनोम अनुक्रमण (डब्ल्यूजीएस) को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि देश भर से आईएनएसएसीओजी नेटवर्क में बड़ी संख्या में नमूने भेजे जाते हैं, पीएम के निर्देशानुसार किया जा रहा है. दिसंबर 2022 के दौरान प्राप्त लगभग 500 नमूनों का वर्तमान में देश भर में INSACOG लैब्स द्वारा जीनोम अनुक्रम किया जा रहा है.

यह बताया गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 29 दिसंबर 2022 को फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दवाओं की समीक्षा, उपलब्धता, उनके स्टॉक और कीमतों की निगरानी के लिए बैठक की. फार्मा कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला परिदृश्य पर कड़ी नजर रखने के लिए कहा गया और COVID दवाओं सहित सभी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक और उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया. निर्देशों के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय को चीन को औषधीय उत्पादों और उपकरणों के चल रहे निर्यात की निगरानी करने के लिए कहा गया है.

अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ कोविड टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा की गई. यह बताया गया कि कोविड वैक्सीन की 220 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं, जिनमें से पात्र लाभार्थियों को अब तक 102.56 करोड़ पहली खुराक (97%) और 95.13 करोड़ दूसरी खुराक (90%) दी जा चुकी है. बैठक में मौजूद विशेषज्ञों ने टीकों के अनुसंधान और भारत में उनके निर्माण के मुद्दों पर चर्चा की.

इसके अलावा, आयुष मंत्रालय द्वारा लोगों को अपनी प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिए आयुष प्रथाओं का उपयोग करने, प्रोत्साहित करने और एक निवारक उपाय के रूप में सलाह जारी की गई है, जैसा कि पहले लहरों के दौरान किया गया था. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत उपलब्ध आयुष किट, दिशा-निर्देशों और आयुष किटों की खरीद और वितरण के व्यापक प्रसार के लिए अनुरोध किया.



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Abdulla Yameen | An anti-India hardliner 

The former Maldives President, who was spearheading an ‘India Out’ campaign, faces political uncertainty after he was sentenced to 11 years in jail for corruption 

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Pushpa Kumar Dahal | The rebel who embraced the status quo

The new Nepal PM has come a long way from being a revolutionary militant leader set on changing the political and ideological structures of the country to becoming one of the Kathmandu power elite that is wedded to the status quo 

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वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर गंगा की आरती में नए साल का स्वागत

वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर गंगा की आरती में घंटे-घड़ियाल और शंखनाद से नए साल का स्वागत किया गया. दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की ओर से होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा की दैनिक आरती में आज वर्ष के अंतिम 2022 को विदा किया गया और नए साल 2023 का स्वागत किया गया. 

देश-विदेश के श्रद्धालुओं के साथ गंगा सेवा निधि व काशी वासियों ने गंगा की आरती में घंटे-घड़ियाल बजाए व शंखनाद किया. वर्ष 2023 का स्वागत 1001 दीपों से स्वागत लिखकर किया गया. इस दौरान गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र,कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी,सचिव हनुमान यादव आदि उपस्थित थे.



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15 dead, 47 injured in western Mexico bus crash

The dead included at least four children.

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India abstains from voting on U.N. resolution on Israel

The draft resolution was adopted with 87 votes in favour, 26 against and 53 abstentions, including by India

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