Friday, March 7, 2025

ब्रिटेन में जयशंकर की सुरक्षा में सेंध को लेकर भारत ने की निंदा, ब्रिटिश उच्चायोग से भी जताया विरोध

भारत ने बृहस्पतिवार को नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश उच्चायोग प्रभारी को आपत्ति पत्र भेजकर लंदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया. ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बुधवार शाम खालिस्तान समर्थक एक प्रदर्शनकारी ने अवरोधक तोड़ने और जयशंकर के काफिले को रोकने का प्रयास किया, जबकि कुछ अन्य लोग भारत विरोधी नारे लगा रहे थे.

भारत ने घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अपेक्षा करता है कि मेजबान सरकार ऐसे मामलों में अपने कूटनीतिक दायित्वों का पूरी तरह पालन करेगी. भारत ने ‘अलगाववादियों के छोटे से समूह' के ‘लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग' किए जाने की निंदा भी की. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि ब्रिटिश उच्चायोग के प्रभारी को विदेश मंत्रालय में तलब कर आपत्ति पत्र सौंपा गया.

यह घटना उस समय हुई थी, जब जयशंकर बुधवार शाम ‘चैथम हाउस' में एक संवाद सत्र के समापन के बाद वहां से निकल रहे थे. ‘चैथम हाउस' ‘रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' का मुख्यालय है.

विदेश मंत्री ब्रिटेन और आयरलैंड की अपनी छह दिवसीय यात्रा के पहले चरण के तहत लंदन में थे. इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ावा देने के तरीके तलाशना है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हमने विदेश मंत्री की ब्रिटेन यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा संबंधी चूक की घटना के फुटेज देखे हैं.' उन्होंने कहा, ‘‘हम अलगाववादियों और चरमपंथियों के इस छोटे समूह की उकसावे वाली गतिविधियों की निंदा करते हैं.'

जायसवाल ने कहा, ‘हम ऐसे तत्वों के लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग किए जाने की निंदा करते हैं. हम अपेक्षा करते हैं कि ऐसे मामलों में मेजबान सरकार अपने कूटनीतिक दायित्वों का पूरी तरह से पालन करेगी.' ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने भी घटना की निंदा की और कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों को बाधित करने के प्रयास अस्वीकार्य हैं.

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में नजर आ रहा है कि खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों का एक छोटा समूह पीले झंडे पकड़े हुए ‘चैथम हाउस' के सामने सड़क के एक ओर खड़े होकर भारत और जयशंकर के खिलाफ नारे लगा रहा है.

जयशंकर जैसे ही संस्थान से निकले, एक व्यक्ति पुलिस की घेराबंदी तोड़कर जयशंकर के काफिले की ओर भागने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहा है. लंबे कद का दाढ़ी वाला यह व्यक्ति मंत्री के काफिले के सामने खड़े होकर उन्हें रोकने की कोशिश करता और तिरंगे का अपमान करता नजर आ रहा है. मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकारी उस व्यक्ति को तुरंत अपने साथ ले जाते दिख रहे हैं. खालिस्तान समर्थक तत्वों के सुरक्षा का उल्लंघन किए जाने की यह पहली घटना नहीं है.

कुछ खालिस्तान समर्थक तत्वों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग पर लगे भारतीय ध्वज को मार्च 2023 में उतार दिया था और इस घटना पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. भारत ने दिल्ली में सबसे वरिष्ठ ब्रिटिश राजनयिक को तलब किया था और मिशन में ‘‘सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तरह से गैर-मौजूदगी'' पर स्पष्टीकरण मांगा था. भारत की मांग है कि ब्रिटेन अपनी धरती से सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करे.



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Thursday, March 6, 2025

Seven edu institutes to train workforce for semiconductor industry: Govt



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औरंगजेब विवाद : अबू आजमी पर उद्धव ठाकरे का हमला, बोले- विधानसभा से हमेशा के लिए हों निलंबित

महाराष्ट्र में औरंगजेब को लेकर छिड़े विवाद में शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव आमने-सामने आ गए हैं. उद्धव ठाकरे ने सपा विधायक (निलंबित) अबू आज़मी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अबू आजमी को सिर्फ बजट सत्र से नहीं, बल्कि हमेशा के लिए निलंबित कर देना चाहिए.

जब अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र में औरंगजेब के मुद्दे पर आपत्ति जताई, तो उद्धव ठाकरे ने जवाब देते हुए कहा कि अखिलेश को आपत्ति जतानी है, तो जताने दीजिए, लेकिन यहां पूरे महाराष्ट्र ने आपत्ति जताई है. अगर उन्हें (अखिलेश) ऐसा लगता है, तो वो अबू आज़मी को उत्तर प्रदेश से चुनकर लाएं. क्या उन्हें सच पता है?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब अबू आज़मी ने औरंगजेब को लेकर बयान दिया था, जिस पर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने कड़ा विरोध जताया है. अब उद्धव ठाकरे भी इस विवाद में खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा है.

विवाद बढ़ने के बाद बुधवार को सपा विधायक अबू आजमी को महाराष्ट्र विधानसभा से मौजूदा सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है. महाराष्ट्र के संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सदन के पटल पर अबू आजमी के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया. इस सत्र के दौरान अबू आजमी के विधानसभा परिसर में घुसने पर रोक रहेगी.

इससे पहले मंगलवार को अबू आजमी के औरंगजेब की तारीफ वाले बयान का मुद्दा महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में गूंजा. उनके इस बयान को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और आजमी को विधानसभा से निलंबित करने की मांग की थी. उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने की भी मांग की गई. हालांकि, समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी ने औरंगजेब वाले बयान पर सफाई भी दी. उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया.

बता दें कि सोमवार को सपा नेता अबू आजमी ने मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ की थी. अबू आजमी ने कहा था, 'औरंगजेब इंसाफ पसंद बादशाह था. उसके कार्यकाल में ही भारत सोने की चिड़िया बना. मैं औरंगजेब को क्रूर शासक नहीं मानता हूं. औरंगजेब के समय में राजकाज की लड़ाई थी, धर्म की नहीं थी, हिंदू-मुसलमान की लड़ाई नहीं थी. औरंगजेब ने अपने कार्यकाल में कई हिंदू मंदिरों का निर्माण करवाया. औरंगजेब को लेकर गलत इतिहास दिखाया जा रहा है.'



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Tuesday, March 4, 2025

महाकुंभ : प्रयागराज की अर्थव्यवस्था में 200 से 300 फीसदी का बूस्ट, ऑटोमोबाइल-इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में बढ़ोत्तरी

महाकुंभ 2025 के दिव्य और भव्य आयोजन ने जहां एक ओर तीर्थराज प्रयाग का मान बढ़ाया है, तो साथ ही यह आयोजन आने वाले दिनों में प्रयागराज शहर की अर्थव्यवस्था में भी भारी बढ़ोतरी लाएगा. 45 दिनों तक चले महाकुंभ के आयोजन से प्रयागराज शहर में सबसे ज्यादा लाभ होटल, रेस्टोरेंट इंडस्ट्री, टूर एंड ट्रैवेल तथा खुदरा व्यापारियों को हुआ. लेकिन, महाकुंभ के बाद शहरवासियों की बढ़ी आय रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और लग्जरी आइटम्स के व्यापार को बढ़ावा देगी. 

ऐसा अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि महाकुंभ के आयोजन से बढ़ी आय फ्लो प्रयागराज की इकॉनमी में लगभग 200 से 300 फीसदी का बूस्ट ला सकता है. साथ ही सीएम योगी के विजन के मुताबिक प्रयागराज का आध्यात्मिक टूरिज्म महाकुंभ के बाद सामान्य दिनों में भी बढ़ने की उम्मीद है.

महाकुंभ का आयोजन आस्था और आध्यात्मिक उत्थान के साथ प्रयागराजवासियों के लिए आर्थिक तौर पर भी वरदान साबित हो रहा है. 45 दिनों तक शहर में चले भव्य आयोजन में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज आए. जिससे तात्कालिक रूप से शहर के होटल, रेस्टोरेंट, टूर एंड ट्रैवेल इंडस्ट्री समेत अनाज, सब्जी, गद्दे, बेड, फर्नीचर, टेंट के व्यवसायियों को 30 से 40 गुना मुनाफा हुआ. 

इसके साथ ही संगम क्षेत्र में नाव चालकों, ऑटो रिक्शा चालकों, ठेला-खोमचा लगाने वाले और जनरल मर्चेंट के दुकानदारों की भी अच्छी आमदनी हुई है. प्रयागराज व्यापार मंडल के जनरल सेक्रेटरी शिव शंकर सिंह का कहना है कि शहरवासियों की आय में हुई वृद्धि आने वाले दिनों में शहर की इकॉनमी को 200 से 300 फीसदी तक की बढ़ोतरी प्रदान कर सकती है.

व्यापार मंडल के जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि शहरवासियों की महाकुंभ से बढ़ी आय का फ्लो जब स्थानीय बाजार में होगा तो इकॉनमी बूस्ट होगा. इसके चलते आने वाले दिनों में प्रयागराज में रियल स्टेट बाजार, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और लग्जरी गुड्स के बाजार में वृद्धि देखने को मिलेगी. 

उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी प्रदेश में आध्यात्मिक और डॉमेस्टिक टूरिज्म को बढ़ावा दे रहे हैं, प्रयागराज उनकी योजना के मुख्य शहर में है, जिसका लाभ आने वाले दिनों में भी शहर को जरूर मिलेगा. 

महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में बने 12 कॉरिडोर, संगम क्षेत्र में पक्के घाट के साथ आसपास के तीर्थ और पर्यटन स्थलों से शहर की कनेक्टिविटी में बढ़ोतरी आगामी दिनों में भी टूरिज्म को बढ़ावा देगी. इसका सीधा लाभ प्रयागराज और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में दिखाई देगा.



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Friday, February 28, 2025

लोकसभा सीटों के परिसीमन पर बयानबाजी तेज, अमित शाह बोले- दक्षिण भारत के राज्यों में एक भी सीट कम नहीं होने देंगे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर एक बड़ी राजनीतिक बहस छिड़ गई है. बुधवार को कोयम्बटूर में बीजेपी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा की सीटों के परिसीमन पर एक बयान दिया था. जिस पर राजनीति तेज हो गई है. अमित शाह ने कहा, "तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे लोगों का ध्यान भड़काने के लिए कुछ मुद्दे खड़ा कर रहे हैं. आज भी एक मीटिंग करने जा रहे हैं कि हम साउथ के साथ परिसीमन में अन्याय नहीं होने देंगे. स्टालिन जी,  मोदी सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि डीलिमिटेशन के बाद किसी भी दक्षिण भारत के राज्य की एक भी सीट कम होने नहीं होगा".

तमिलनाडु के सीएम ने 5 मार्च को बुलाई बैठक

अमित शाह का बयान ऐसे वक्त पर आया है जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 5 मार्च को परिसीमन के मसले पर राजनीतिक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. लोकसभा की सीटों का परिसीमन राष्ट्रीय जनगणना के बाद जनसंख्या में हुए बदलाव के आधार पर किया जाता है. 

जनगणना पूरी होने के बाद एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है. परिसीमन आयोग टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस के आधार पर लोकसभा की सीटों का परिसीमन करती है.

परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों का क्या है डर?

दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि 2011 की जनगणना के बाद उनकी जनसंख्या उत्तर भारत के राज्यों के अनुपात में कम बढ़ी है. ऐसे में अगर परिसीमन आयोग जनसंख्या के आधार पर लोकसभा की सीटों का परिसीमन करता है तो लोकसभा में उनकी सीट घट जाएंगे, उनका प्रतिनिधित्व भी घट जाएगा.

सीपीआई नेता ने परिसीमन के आधार पर संसद में चर्चा की मांग की

सीपीआई के महासचिव दी राजा ने गुरुवार को एनडीटीवी से कहा, "हम मांग करते हैं कि देश में नए परिसीमन का आधार क्या हो इस पर संसद में चर्चा कराई जाए. दक्षिण भारत के राज्यों- विशेषकर तमिलनाडु और केरल का पॉपुलेशन कंट्रोल का रिकॉर्ड बेहतर रहा है. उन्हें आशंका है कि अगर जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन किया जाता है तो संसद में उनका प्रतिनिधित्व घटेगा. उत्तर प्रदेश और दूसरे उत्तर भारत के राज्यों में जनसंख्या में बढ़ोतरी की वजह से उनकी सीटें बढ़ सकती हैं."

सपा सांसद बोले- जनगणना के बाद गठित होगा परिसीमन आयोग

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद और समाजवादी पार्टी के नेता जावेद अली खान ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "जनगणना की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है. जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परिसीमन आयोग गठित किया जाएगा. उस समय ही उसके टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस तय होंगे. इसलिए अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा कि कहां की सीटें बढ़ेंगी और कहां की सीटें घटेंगी".

हालांकि वह इस बात से सहमत हैं कि अगर सिर्फ जनसंख्या के आधार पर सीटों का निर्धारण होगा तो जनसंख्या नियंत्रित करने वाले राज्यों को घाटा होगा.

एक्सपर्ट बोले- परिसीमन का मामला पेंचीदा, अभी कुछ कहना जल्दबाजी

उधर चुनावों पर नजर रखने वाली संस्था नेशनल इलेक्शन वॉच/ADR के संस्थापक रहे प्रोफेसर जगदीप छोकर कहते हैं- परिसीमन पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा. प्रोफेसर जगदीप छोकर ने एनडीटीवी से कहा, "परिसीमन का मामला बेहद पेंचीदा है. परिसीमन कब होगा यह किसी को नहीं पता है. पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा. उसके बाद फिर महिला आरक्षण का भी प्रावधान करना होगा. अभी तक परिसीमन की जो क्राइटेरिया है वह जनसंख्या है. परिसीमन आयोग जब गठित होगा तब यह तय करना होगा कि सीटों के परिसीमन का क्या क्राइटेरिया होगा...सरकार को दक्षिण भारत के राज्यों की जो आशंकाएं हैं उनका एड्रेस करना पड़ेगा..."

जाहिर है सरकार को सीटों के परिसीमन का आधार सही तरीके से तय करना होगा. प्रोफेसर जगदीप छोकर कहते हैं, सीटों के डीलिमिटेशन का आधार सरकार को सही तरीके से तय करना बेहद ज़रूरी होगा. आधार अगर गलत तरीके से तय होगा तो उसका नतीजा भी गलत होगा".

यह भी पढ़ें - हिंदी को तमिल पर हावी नहीं...", तमिलनाडु में भाषा विवाद के बीच सीएम स्टालिन की केंद्र को दो टूक



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Thursday, February 27, 2025

चैंपियंस ट्रॉफी या विवादों का पिटारा, क्या खतरे में क्रिकेटर्स? जानिए पाकिस्तान में अब क्या नया बवाल

Champions Trophy Big News: आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का मेजबान इस बार पाकिस्तान है. भारत, बांग्लादेश, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, अफगानिस्तान समेत कुल 8 क्रिकेट टीमें इसमें हिस्सा ले रही हैं. ग्रुप ए में भारत, बांग्लादेश, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान हैं तो ग्रुप बी में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और अफगानिस्तान हैं. पाकिस्तान की हालत को जानते हुए भारत ने पाकिस्तान की जमीन पर एक भी मैच खेलने से इनकार दिया और टीम इंडिया अपने सभी मैच दुबई में खेल रही है. पाकिस्तान लगातार टूर्नामेंट में हारने और भारत जीतने लगा तो पाकिस्तान के मुख्य कोच आकिब जावेद ने कह दिया कि दुबई में खेलना भारत के लिए फायदेमंद है. मगर, विवाद खेल को लेकर ही सिर्फ नहीं है, बल्कि खेल के आयोजन को लेकर भी है.

पुलिसवाले नहीं दे रहे सुरक्षा

खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन पुलिसकर्मियों ने चैंपियंस ट्रॉफी में ड्यूटी करने से ही इनकार कर दिया. इसके बाद इन पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है. पंजाब पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, इन बर्खास्त पुलिसकर्मियों को बार-बार ड्यूटी से गायब पाया गया. इन पुलिसकर्मियों को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम और होटल के बीच खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए लगाया गया था, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का पालन नहीं किया. पाकिस्तानी पत्रकार हमजा आमीर ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की तस्दीक की है.

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मैच में आया शख्स आतंकवादी?

सवाल ये है कि 29 साल बाद पाकिस्तान में कोई आईसीसी इवेंट हो रहा है, लेकिन सुरक्षा को लेकर सवाल उठते जा रहे हैं. सोमवार को बांग्लादेश और न्यूज़ीलैंड के मैच के दौरान एक शख्स स्टेडियम में घुस आया था और उसने किवी खिलाड़ी रचिन रविंद्र (Rachin Ravindra)  के गले लगने की कोशिश की थी. वीडियो में देखा जा सकता है कि वह अनजान शख्स जब मैदान पर आया तो उसे देखकर रविंद्र एक पल के लिए सहम से गए थे. हालांकि, मैदान पर शख्स को देख सिक्योरिटी गार्ड एक्शन में आए और उस शख्स को पकड़कर मैदान से बाहर ले गए. उसके हाथ में आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-लबैक पाकिस्तान (टीएलपी) के प्रमुख हाफिज साद हुसैन रिजवी की तस्वीर थी. ये बात भी पाकिस्तानी पत्रकार हमजा आमीर ने अपनी रिपोर्ट में बताई है. अब सवाल ये है कि क्या वो शख्स आतंकवादी था? अगर वो आतंकवादी नहीं भी था तो वो एक आतंकवादी की तस्वीर क्यों लहरा रहा था? पाकिस्तान इस पर चुप है. 

VIDEO देखें कैसे घुसा शख्स

मामला बढ़ा तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उस अनजान शख्स को पाकिस्तान के सभी क्रिकेट वेन्यू में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने बयान में कहा, इसमें शामिल शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे पाकिस्तान के सभी क्रिकेट वेन्यू में प्रवेश करने से स्थायी रूप से बैन करने का फैसला लिया गया है. 

साजिश का हो चुका है खुलासा

पाकिस्तान के खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान विदेशी मेहमानों का अपहरण करने की कथित साजिश का पर्दाफाश किया है. इसके बाद पाकिस्तान में सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कई आतंकी समूहों, जैसे तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), आईएसआईएस और बलूचिस्तान-आधारित समूहों के खिलाफ चेतावनी जारी की गई है. इसके बाद, पाकिस्तान की सुरक्षा बलों ने रेंजर्स और स्थानीय पुलिस सहित उच्च स्तरीय सुरक्षा बल तैनात किए हैं. इस बीच पुलिस वालों का ड्यूटी से इनकार और फिर उन्हें बर्खास्त किया जाना खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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Wednesday, February 26, 2025