Tuesday, January 24, 2023

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की धर्मांतरण कर चुके दलितों के सर्वे को चुनौती देने वाली याचिका

धर्म अपनाने वाले दलितों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा (Dalits Leaving Sanatan Dharma)
और आरक्षण का फायदा देने की संभावना और उनकी स्थिति की जांच करने के लिए केंद्र द्वारा गठित आयोग के खिलाफ दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने खारिज कर दी है. याचिका में केंद्र सरकार द्वारा गठित आयोग को रद्द करने की मांग की गई थी. 

याचिकाकर्ता के अनुसार, दलितों को ईसाई और इस्लाम धर्म अपनाने के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा देने और संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट मे सुनवाई के लिए पेंडिंग हैं, याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस याचिका के साथ ही संबंधित याचिकाओं की जल्द से जल्द सुनवाई पूरी की जाए. 
 

याचिका में कहा गया था कि मुख्य याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. जस्टिस के जी बालाकृष्णन आयोग को जांच की इजाजत दी गई, तो याचिका पर सुनवाई में और देरी हो सकती है. याचिका में कहा गया है कि इस तरह की देरी से अनुसूचित जाति मूल के ईसाइयों और मुस्लिमों के अधिकारों का हनन होगा, जिन्हें पिछले 72 वर्षों से अनुसूचित जाति के इस विशेषाधिकार से वंचित रखा गया है.

याचिका में दलील दी गई कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग की 2007 की रिपोर्ट ने इस्लाम और ईसाई धर्म में परिवर्तित दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने का समर्थन किया था. 

सोमवार को जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओक की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा आप कौन हैं और कहां से आए हैं?  इस मामले पर तो सुनवाई चल रही है. इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जब सुप्रीम.कोर्ट में सुनवाई चल रही है तो आखिर समानांतर आयोग क्यों बनाया गया? इसे तो बनाना ही नहीं चाहिए था.  

जस्टिस कौल ने कहा कि सरकार को संविधान के तहत ये अधिकार है. सरकार ने अपने विवेक से आयोग बनाया है. आप तो आयोग के विधान को ही चुनौती दे रहे हैं. याचिकाकर्ता ने फिर कहा कि जब आप सुन रहे हैं तो आपकी सुनवाई की राह में आयोग बाधा न बने. 

पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत कोई भी नागरिक सीधा सुप्रीम कोर्ट के पास आ सकता है. लेकिन आपकी याचिका को हम उसके तहत तो सुन नहीं सकते. हमें आपकी अर्जी में कोई तथ्य मिला जिसके आधार पर हम सुनवाई करें. आपकी याचिका रद्द की जाती है. 
 

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आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना से 14.6 लाख छोटे कारोबारियों को मदद मिली: रिपोर्ट

कोविड महामारी के दौरान छोटे कारोबारियों की मदद के लिए शुरू की गयी आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) से 14.6 लाख एमएसएमई इकाइयों को बचाने में मदद मिली. इन छोटे उद्यमों को 2.2 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज का लाभ मिला.

एसबीआई रिसर्च के एक विश्लेषण के अनुसार इस अतिरिक्त ऋण प्रवाह से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों) इकाइयों के ऊपर करीब 12 प्रतिशत बकाया कर्ज एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) बनने से बचा. लोगों के संदर्भ में इससे कम-से-कम 6.6 करोड़ लोगों की आजीविका बची.

ईसीएलजीएस से एमएसएमई को कर्ज मिलने में मदद मिली और इससे कम-से-कम 14.6 लाख इकाइयों को इससे अपना कारोबार बनाए रखने में मदद मिली. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा कि इस योजना के जरिए एमएसएमई को 2.2 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिए गए. इसका मतलब है कि इस योजना से एमएसएमई पर बकाया करीब 12 प्रतिशत को फंसा कर्ज बनने से रोकने में मदद मिली. साथ ही 6.6 करोड़ लोगों की अजीविका बची.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एमएसएमई इकाइयां का आकार भी बड़ा हुआ और कई इकाइयों का कारोबार 250 करोड़ रुपये की सीमा को पार कर गया और वे नई परिभाषा के तहत मझोले उद्यम की श्रेणी में आ गये. एमएसएमई की परिभाषा में वर्ष 2020 में बदलाव किया गया था. इस बदलाव के साथ सभी एमएसएमई को उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया. रिपोर्ट के अनुसार इससे कुल 1.33 करोड़ एमएसएमई के पास उद्यम प्रमाणपत्र हैं, जबकि दूसरी तरफ जीएसटी पंजीकरण केवल 1.40 करोड़ है.

रिपोर्ट के अनुसार उद्यम पोर्टल एमएसएमई क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने और उन्हें संगठित कर्ज व्यवस्था के दायरे में लाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है. देश में करीब 6.4 करोड़ एमएसएमई हैं जबकि चीन में यह संख्या 14 करोड़ है.

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MP में 2024 तक बनने वाली सड़कें अमेरिका की तरह होंगी : नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को 6,800 करोड़ रुपये की परियोजना की सौगात दी है. केंद्रीय मंत्री ने सोमवार को इन तमाम योजनाओं का उद्घाटन किया. इन परियोजनाओं में खास तौर पर 28 राष्ट्रीय राज्यमार्ग का निर्माण होना है, जिसकी कुल लंबाई 550 किलोमीटर है. नितिन गडकरी ने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा कि पवई, ओरछा, हरपालपुर, कैथी पडरिया कला, पटना तमौली, जस्सो, नागौद और सागर लिंक रोड बाइपास के निर्माण से शहर में यातायात का दबाव कम होगा. उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2024 तक राज्य में जिस तरह की सड़कों का जाल विकसित किया जा रहा है वो अमेरिका की सड़कों से भी बेहतर होंगी.

नितिन गडकरी ने कहा कि भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे के निर्माण से सीमेंट और खनिजों का परिवहन आसान हो जाएगा और लॉजिस्टिक्स की लागत कम हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इस गलियारे के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी का संपर्क बेहतर होगा. टीकमगढ़ से ओरछा तक पक्की शोल्डर वाली 2 लेन सड़क के निर्माण से यातायात सुरक्षित होगा. 



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Monday, January 23, 2023

पंजाब में फ़िल्म सिटी बनाने के लिए बड़े प्रोडक्शन हाऊस के साथ करेंगे मुलाकात CM मान

पंजाब के औद्योगिक विकास को और बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध उद्यमियों को राज्य में निवेश करने के लिए प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान रविवार को मुंबई पहुंचे.

इस दो दिवसीय दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सोमवार को निवेश के लिए व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और प्रमुख कंपनियों के प्रबंधकों के साथ मुलाकात करेंगे. वो प्रमुख सैक्टरों में रणनीतिक तालमेल के लिए प्रमुख कारोबारियों के साथ मुलाकात करेंगे. 

अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान अगले महीने एस. ए. एस. नगर, मोहाली में होने वाले इनवैस्ट पंजाब सम्मेलन में शामिल होने के लिए उद्योगपतियों को पंजाब का दौरा करने का न्योता भी देंगे. 

इस दौरान मुंबई पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने पंजाब को देश के औद्योगिक केंद्र के तौर पर उभारने के लिए अपनी सरकार की दृढ़ वचनबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस बड़े कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी. भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य को औद्योगिक विकास के सर्वोच्च स्तर पर ले जाने के लिए पहले ही सार्थक प्रयास कर रही है. 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंजाब में फ़िल्म सिटी स्थापित करने के बारे भी विचार कर रही है. भगवंत मान ने कहा कि फ़िल्म उद्योग से जुड़े उनके अधिकतर दोस्त मुंबई में बसते हैं, इसलिए वह उनको पंजाब में अपने उद्यम खोलने के लिए अपील करेंगे. 

उन्होंने कहा कि पंजाबी फ़िल्म उद्योग पहले ही बहुत बड़ा है और यह प्रस्तावित फ़िल्म सिटी इसको व्यापक प्रसार का मौका देगी.

मुख्यमंत्री ने उम्मीद ज़ाहिर की कि इस दौरे से एक तरफ़ राज्य के औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और दूसरी तरफ़ नौजवानों के लिए रोज़गार के नए मौके खुलेंगे. भगवंत मान ने कहा कि वह मुंबई में उद्योगपतियों के सामने पंजाब को मौकों और विकास की धरती के तौर पर दिखाऐंगे. 

उन्होंने कहा कि देश में निवेश के लिए पंजाब सबसे पसन्दीदा स्थान है और राज्य में नए निवेश के लिए हर संभव यत्न किए जाएंगे. मुंबई दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत मान का शानदार स्वागत किया गया. 

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Erdogan announces Turkish elections to be held on May 14

Turkey’s president has announced May 14 as the date for the country’s next parliamentary and presidential elections

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उसरी चट्टी कांड में मुख्तार अंसारी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज, 4 अन्य के नाम भी शामिल

मुख्तार अंसारी के खिलाफ गाजीपुर की मुहम्मदाबाद कोतवाली में एफआईआर दर्ज किया गया है. आईजीआरएस पर मिले प्रार्थना पत्र के आधार पर पुलिस ने ये एफआईआर दर्ज की है. उसरी चट्टी कांड में मृत मनोज राय के पिता के प्रार्थनापत्र पर ये कार्रवाई की गई है.

जानकारी अनुसार बक्सर के रहने वाले शैलेन्द्र राय के प्रार्थना पत्र पर मुख्तार समेत पांच लोगों पर हत्या का केस दर्ज किया गया है. वर्ष 2001 में उसरी चट्टी कांड में 3 लोग मारे गए थे.

मामले में बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह मुख्य आरोपी हैं. उसरी चट्टी कांड मामले में मुख्तार अंसारी वादी हैं और एमपी/एमएलए कोर्ट में विचाराधीन हैं. शैलेन्द्र राय ने अपने प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया है कि 14 जुलाई 2001 को मुख्तार के करीबी लोग मनोज राय के अपने साथ मिलवाने के लिए लेकर गए. जबकि अगले दिन उन्हें उसरी चट्टी कांड में मनोज के मारे जाने की सूचना मिली. 

वर्ष 2001 में उसरी चट्टी कांड में मुख़्तार अंसारी पर हमला हुआ था. हमले में तीन लोग मारे गए थे, जिसमें मनोज राय भी शामिल था. शैलेंद्र राय के पिता का कहना है कि उनका बेटा मनोज राय मुख्तार के लिए ठेकेदारी का काम करता था. लेकिन फिर उसने अपने नाम से ठेकेदारी शुरू कर दी. 

इसी बात से नाराज होकर मुख़्तार ने उसकी हत्या करवा दी. गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने मुकदमा दर्ज होने की जानकारी दी. 

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आर्टिकल-370 हटाए जाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म नहीं हुआ : दिग्विजय सिंह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के बावजूद यहां पर आतंकवाद अब भी खत्म नहीं हुआ है. सिंह ने कहा कि राजौरी जिले के डांगरी गांव सहित हाल में हुए आतंकवादी हमले चिंताजनक हैं.

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी जम्मू स्थित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में आतंकवाद के पीड़ितों से मुलाकात के बाद की. इस दौरान सिंह के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा भी थे.

दिग्विजय सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सबसे पहले हम राजौरी के डांगरी गांव और जम्मू के नरवाल में हुए आतंकवादी हमलों की निंदा करते हैं. जम्मू-कश्मीर की स्थिति वह नहीं है जो अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद बताई जा रही थी. लक्षित हत्याएं और बम धमाके एक बार फिर शुरू हो गए हैं.''

गौरतलब है कि एक और दो जनवरी को राजौरी के डांगरी गांव में हुए दोहरे आतंकवादी हमले में एक समुदाय विशेष के सात लोगों की मौत हो गई थी जबकि शनिवार को जम्मू के नरवाल में हुए दोहरे धमाके में नौ लोग घायल हुए हैं.

सिंह ने कहा, ‘‘डांगरी गांव में हुए हमले में घायल एक व्यक्ति जीवन भर के लिए दिव्यांग हो गया है और सरकार ने उसे महज एक लाख रुपये दिए हैं. हम ऐसे पीड़ितों के लिए स्थायी पुनर्वास नीति चाहते हैं ताकि वे अपना जीवन बिना किसी पर निर्भर रहे बिता सकें.''

उन्होंने कहा,‘‘हम इन चिंताजनक घटनाओं का राजनीतिक लाभ नहीं लेना चाहते लेकिन एक तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद भी जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद जिंदा है.''

कांग्रेस नेता ने कहा कि विभाजनकारी राजनीति न तो हिंदुओं के और न ही मुसलमानों के हित में है. उन्होंने कहा, ‘‘ यह देश हम सभी का है और हम देश के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं.''

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राहुल गांधी की ओर से अस्पताल गया था.



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Israelis press on with protests against new government

Tens of thousands of Israelis are gathering in Tel Aviv to protest plans by Prime Minister Benjamin Netanyahu’s new government to overhaul the judicial system

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"जो मंदिरों में घंटी बजाते थे ...": योगी आदित्यनाथ पर बिहार के मंत्री का कटाक्ष

रामचरितमानस पर बिहार के शिक्षा मंत्री की टिप्पणी पर विवाद अभी थमा नहीं है और वहीं के एक और मंत्री आलोक मेहता ने शनिवार को ब्राह्मणों और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि जो मंदिरों में घंटियां बजाने वाले थे... अब राज्य पर शासन कर रहे.

बिहार के भागलपुर जिले में एक जनसभा में राज्य के राजस्व मंत्री आलोक मेहता ने शनिवार को कहा, "जो लोग मंदिरों में घंटी बजाते थे, वे अब शक्तिशाली पदों पर आसीन हैं. उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ही लें."

इसके अलावा उच्च जाति समुदायों को निशाना बनाते हुए मंत्री ने कहा कि, देश की 10 प्रतिशत आबादी, जो ब्रिटिश राज की एजेंट हुआ करती थी, अब शेष 90 प्रतिशत वंचित और पिछड़े समुदायों पर अपना अधिकार चला रही है.

मेहता ने दावा किया, "हमारी आबादी का नब्बे प्रतिशत, जिसका प्रतिनिधित्व (बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री) जगदेव बाबू करते थे, का पहले ब्रिटिश राज ने और फिर उनके एजेंटों ने शोषण किया था. यह वे लोग थे जिन्हें जिन्हें जगदेव बाबू 10 प्रतिशत कहते थे."

इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई तो मंत्री ने सफाई दी.,

एक व्यक्तिगत वीडियो में मेहता ने कहा कि, जगदेव बाबू ने जिन 10 प्रतिशत के बारे में बात की, वे किसी विशेष जाति के लोग नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पिछड़े वर्गों का शोषण करता रहा है और यह प्रथा आज भी जारी है.

इससे पहले बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने अपने बयान में रामायण पर आधारित तुलसीदास रचित महाकाव्य रामचरितमानस को विभाजनकारी और समाज में नफरत फैलाने वाला बताकर विवाद खड़ा कर दिया था.



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Sunday, January 22, 2023

Jacinda Ardern | The woman who defied realpolitik

New Zealand’s Prime Minister, who announced her resignation citing burnout, offered an alternative leadership model rooted in a moral vision rather than political opportunism and rose to become a global hero of liberalism

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कूरियर कंपनी का कर्मचारी बनकर जालसाज ने महिला से सात लाख रुपये ठगे

नशीले पदार्थों से भरे एक अंतरराष्ट्रीय पार्सल को ठुकराने का हवाला देकर एक महिला से एक जालसाज ने कथित रूप से करीब सात लाख रुपये ठग लिए. पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी. पीड़िता प्राची ढोके ने अपनी शिकायत में कहा कि उसे एक व्यक्ति का फोन आया था, जिसने खुद को एक कूरियर कंपनी का ग्राहक सेवा कर्मी बताया.

पुलिस ने शिकायत का हवाला देते हुए बताया कि व्यक्ति ने महिला को बताया कि उसके नाम पर एक अंतरराष्ट्रीय पार्सल आया है, जिसमें दो पासपोर्ट, पांच एटीएम कार्ड, 300 ग्राम चरस और एक लैपटॉप शामिल है, जिसे अस्वीकार कर दिया गया है.

ढोके ने जब उस व्यक्ति को बताया कि पार्सल उसने नहीं भेजा है, तो फोन करने वाले ने उससे इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का आग्रह किया, क्योंकि उसके आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया है.

ढोके ने अपनी शिकायत में कहा कि इसके बाद फोन करने वाले ने एक व्यक्ति को फोन लगाया, जिसने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया. उक्त व्यक्ति ने महिला को बताया कि उसके पहचान पत्र का अंतरराष्ट्रीय तस्करी और धन शोधन के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है.

महिला ने कहा, ‘‘उन्होंने मुझे यह कहते हुए जांच में मदद करने को कहा कि वे मुझे एक प्रमाण पत्र देंगे कि मैं इस मामले में शामिल नहीं हूं.'' पुलिस ने कहा कि जालसाजों ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से जांच के बहाने महिला से 95,499 रुपये अंतरित करने को कहा.

ढोके की शिकायत का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि आरोपी द्वारा जमानत राशि और जांच के नाम पर और पैसे मांगे जाने के बाद पीड़िता ने चार बार में कुल 6,93,437.50 रुपये अंतरित किए.

जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419 (खुद की गलत पहचान बताकर धोखा), 420 (धोखाधड़ी) के तहत शुक्रवार को साइबर अपराध, पूर्वी पुलिस थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है. 

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नेपाल विमान हादसा : मारे गए चार भारतीयों के परिजनों को अब तक नहीं मिले शव

नेपाल विमान हादसे में मारे गए चार भारतीयों के शवों को शनिवार तक परिजनों को सौंपा नहीं जा सका था. मारे गए चार भारतीयों के परिजन यहां गत तीन दिन से शव प्राप्त करने का इंतजार कर रहे हैं.

पोखरा शहर में उतरने से कुछ मिनट पहले नदी में दुर्घटनाग्रस्त हुए यति एयरलाइंस के विमान में सवार सभी 72 लोग मारे गए थे. अधिकारियों ने मंगलवार को मारे गए लोगों के शवों को परिवार के सदस्यों को सौंपना शुरू किया था.

दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में 53 नेपाली यात्री और पांच भारतीयों सहित 15 विदेशी नागरिक और चालक दल के चार सदस्य सवार थे. मारे गए पांचों भारतीयों के उत्तर प्रदेश का निवासी होने की खबर है और उनकी पहचान अभिषेक कुशवाहा (25), विशाल शर्मा (22), अनिल कुमार राजभर (27), सोनू जायसवाल (35) और संजय जायसवाल के रूप में हुई है.

संजय जायसवाल का शव शुक्रवार को उनके परिवार को सौंप दिया गया, जिन्हें वे घर वापस ले गए. हालांकि, चार अन्य भारतीय नागरिकों के परिजन अपने प्रियजन के शव लेने के लिए तीन दिन से इंतजार कर रहे हैं.

सोनू जायसवाल के पिता राजेंद्र प्रसाद जायसवाल शव लेने के लिए त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में इंतजार कर रहे रिश्तेदारों में शामिल थे.

अस्पताल सूत्रों ने बताया कि शनिवार को विशाल शर्मा के शव की शिनाख्त हुई. अस्पताल ने शुक्रवार को 49 शवों का पोस्टमॉर्टम किया. पोखरा में 22 नेपाली नागरिकों के शव उनके परिजनों को सौंपे गए हैं.

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ध्रुव तारा की तरह मार्गदर्शन करती है हमारे संविधान की मूल संरचना : CJI डीवाई चंद्रचूड़

भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को यहां कहा कि किसी न्यायाधीश का कौशल संविधान की आत्मा अक्षुण्ण रखते हुए बदलते समय के साथ उसकी व्याख्या करने में निहित है. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि जब आगे का रास्ता जटिल होता है तो भारतीय संविधान की मूल संरचना अपने व्याख्याताओं और कार्यान्वयन करने वालों को मार्गदर्शन और निश्चित दिशा दिखाती है.

उन्होंने कहा कि हाल के दशकों में ‘‘नियमों का गला घोंटने, उपभोक्ता कल्याण को बढ़ावा देने और वाणिज्यिक लेनदेन का समर्थन करने'' के पक्ष में भारत के कानूनी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है.

प्रधान न्यायाधीश मुंबई में नानी ए पालकीवाला स्मृति व्याख्यान में बोल रहे थे. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संविधान की मूल संरचना ध्रुव तारा की तरह मार्गदर्शन करती है और संविधान की व्याख्या करने वालों तथा कार्यान्वयन करने वालों को उस वक्त एक निश्चित दिशा देती है जब आगे का मार्ग जटिल होता है. हमारे संविधान की मूल संरचना या दर्शन संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, शक्तियों के पृथक्करण, न्यायिक समीक्षा, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद, स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता एवं अखंडता पर आधारित है.''

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उभरती विश्व अर्थव्यवस्था ने राष्ट्रीय सीमाओं को मिटा दिया है और कंपनियां अब सीमा पर नहीं रुकती हैं. उन्होंने कहा कि संविधान सरकार को सामाजिक मांगों को पूरा करने के लिए अपनी कानूनी और आर्थिक नीतियों को बदलने तथा विकसित करने की अनुमति देता है.

उन्होंने कहा, ‘‘हम उस समय से एक लंबा सफर तय कर चुके हैं जब एक आवश्यक फोन प्राप्त करने के लिए आपको एक दशक तक इंतजार करना पड़ता था और कई बार अपनी कार खरीदने में भी अधिक समय लगता था. हम पूंजीगत मुद्दों के नियंत्रण के समय से एक लंबा सफर तय कर चुके हैं. समय-समय पर हमें अपने आसपास की दुनिया को रोशन करने के लिए नानी (पालकीवाला) जैसे लोगों को अपने हाथों में मशाल पकड़ने की आवश्यकता होती है. नानी ने हमें बताया कि हमारे संविधान की एक निश्चित पहचान है जिसे बदला नहीं जा सकता है.''

पालकीवाला और उनके कई प्रमुख मामलों के बारे में बात करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह संविधान में निहित मूल पहचान और मूलभूत सिद्धांत को संरक्षित करने में सबसे आगे थे.



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