Friday, March 24, 2023

दिल्ली : दुकानदारी कर रही महिला पर एसिड फेंककर भागा शख्स, तलाश में जुटी पुलिस

दिल्ली के भारत नगर इलाके में वीकली मार्केट में दुकान लगाने वाली 33 वर्षीय महिला के ऊपर अज्ञात शख्स द्वारा एसिड अटैक करने का मामला गुरुवार को प्रकाश में आया है. घटना में महिला मामूली रूप से घायल हो गई है.

जानकारी अनुसार जिस वक्त उस महिला के ऊपर एसिड डाला गया, उसका छोटा बच्चा भी उसके साथ था. इस कारण बच्चा भी मामूली रूप से घायल हुआ है. 

पुलिस को घटना के संबंध में शाम आठ बजे कॉल मिली. महिला ने बताया कि वो भारत नगर इलाके में गुरु बाजार में अपनी दुकान लगाकर बैठी थी. उसी दौरान पार्क के रास्ते अज्ञात शख्स आया और उसके ऊपर एसिड फेंककर चला गया. 

पुलिस का कहना है कि महिला जब अस्तपताल से इलाज करवा कर वापस आई तब उसने उन्हें इस घटना के बारे में सूचना दी. फिलहाल महिला की निशानदेही पर पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है. 

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-- Exclusive: अमृतपाल सिंह पर खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में अहम खुलासे



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Exclusive: अमृतपाल सिंह पर खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में अहम खुलासे

खालिस्तान समर्थक अलगाववादी अमृतपाल सिंह पर खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमृतपाल के फाइनेंसर दलजीत कलसी ने 13 सालों में (2007-2020) थाईलैंड की 18 यात्राएं कीं. थाइलैंड की इतनी यात्राओं के पीछे के कारणों की जांच की जरूरत है, कहीं वह वेश्यावृत्ति में लिप्त तो नहीं था.

अमृतपाल सिंह जब सिख सिद्धांतों का पालन किए बिना दुबई में रह रहा था, तब वह लैविश लाइफ स्टाइल जी रहा था. अमृतपाल के उकसावे पर बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवासी छात्रों को निशाना बनाया गया और उन्हें घेर लिया गया. खालसा वहीर के दौरान ईसाई बहुसंख्यक वाले रास्ते में जाकर जानबूझकर शरारत करने का प्रयास किया गया. 

अमृतपाल सिखों के ईसाई धर्म में धर्मांतरण और मिशनरियों द्वारा क्राउड फंडिंग का मुद्दा उठाता रहा है. उसने यह कहकर ईसा मसीह को नीचा दिखाने की कोशिश की कि वह खुद को नहीं बचा सका, तो वह दूसरों के लिए क्या कर सकता है.

उसने इसी तरह के भड़काऊ भाषण हिंदू धर्म के खिलाफ भी दिए थे. सुधीर सूरी की हत्या में शामिल संदीप सिंह उर्फ सनी अमृतपाल का सहयोगी है. उसकी कार पर WPD (वारिस पंजाब दे) का स्टीकर लगा था. हत्या से चार दिन पहले अमृतपाल ने उसे हत्या के लिए उकसाया था. फिर अमृतपाल ने उसे धमकाते हुए कहा था कि वह उसका नाम न ले.

अमृतपाल को दीप सिद्धू की मौत से पहले पंजाब में कोई नहीं जानता था. इसी वजह से वह अपने अतीत के बारे में खुलकर बात नहीं करता था क्योंकि इससे उसकी छवि को नुकसान हो सकता था. अमृतपाल दुबई में ड्रग डीलर जसवंत सिंह रोडे से जुड़ा हुआ है, जिसका भाई पाकिस्तान से काम कर रहा है. अमृतपाल अपने पिछले जीवन के बारे में बात नहीं करता है, जब वह गैर-अमृतधारी था और सिख धार्मिक सिद्धांतों का पालन नहीं करता था.

भारत आने के बाद अमृतपाल और उसके संगठन ने एक धार्मिक कट्टरपंथी ग्रुप के रूप में काम करना शुरू कर दिया, जो कि उसके पहले के व्यक्तित्व के बिल्कुल विपरीत है. यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उसे भारत में देश विरोधी ताकतों द्वारा लगाया गया है. 

अमृतपाल के पास सिख रूढ़िवाद का अपना संस्करण है. उसके संस्करण का सिख धर्म के बारे में सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है. अमृतपाल ड्रग माफिया रवेल सिंह द्वारा गिफ्ट में दी गई एक शानदार मर्सिडीज में घूम रहा था.

अमृतपाल सिंह की हालिया (पिछले 10 दिनों की) गतिविधियां
अमृतपाल सिंह (अध्यक्ष, वारिस पंजाब दे/डब्ल्यूपीडी) की हालिया गतिविधियां इस तथ्य की ओर इशारा करती हैं कि वह कैसे व्यवस्थित रूप से सिखों को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहा है. 

पिछले 10 दिनों में अमृतपाल ने पांच कार्यक्रमों (अमृतसर, मुक्तसर, तरनतारन, मनसा और कपूरथला) में शिरकत की थी, जहां 800-1000 लोगों का जमावड़ा था. इन आयोजनों में उसके सम्बोधन के मुख्य सूत्र यह थे - 

  • सिक्खों से बपतिस्मा (अमृतधारी और शास्त्रधारी) लेने और नशीले पदार्थों से मरने के बजाय सिक्ख पंथ के लिए अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार रहने का आग्रह करना.
  • उसने आरोप लगाया कि सरकार सिखों के शस्त्र लाइसेंस रद्द करके उन्हें निहत्था बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है. गुरु गोविंद सिंह (10 वें सिख गुरु) ने सिखों को हथियार रखने का आदेश दिया था ताकि सरकार द्वारा उन्हें सताने पर वे अपनी अपने परिवार और धर्म की रक्षा कर सकें.
  • उसने आगे सरकार से सिखों के साथ शांति से बातचीत करने, उन्हें उनके अधिकार देने, सिखों के साथ हुई जबरदस्ती को स्वीकार करने और उसके लिए माफी मांगने के लिए कहा.
  • पंजाब की भावी पीढ़ियों के लिए खालसा शासन प्राप्त करने के लिए युवाओं को एकजुट होने का आग्रह करते हुए, उसने दावा किया कि सिख पंथ विभाजित था जिसके कारण दुश्मन उन पर हमला कर रहे थे और उनकी कमजोरी का फायदा उठा रहे थे.
  • उसने कहा कि सरकार को पंजाब में ड्रग्स की समस्या के लिए पाकिस्तान को दोष नहीं देना चाहिए क्योंकि दिल्ली और हरियाणा से ड्रग्स आता है.
  • उसने डेरा के अनुयायियों को उन गुरुओं से प्यार करने की धमकी दी, जिन्होंने अपना और अपने बच्चों का बलिदान दिया और अपनी मातृभूमि के लिए लड़े, न कि उनसे (बाबा राम रहीम, प्रमुख, डीएसएस के संदर्भ में) जिन्होंने उनके पैसे लूट लिए, झूठ बोला और उन्हें बम से उड़ा दिया.
  • उसने दावा किया कि मूसेवाला की हत्या में शामिल सिखों का इस्तेमाल 'तिलकधारी' द्वारा एक सिख को मारने के लिए किया गया था.
  • उसने जोर देकर कहा कि जब भी गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी होती है, सिख पुलिसकर्मियों को कानून की ओर नहीं देखना चाहिए और इसके बजाय पंथ के लिए स्टैंड लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि भाई दिलावर सिंह, भाई सतवंत सिंह, भाई बेअंत सिंह और भाई केहर सिंह ने पहले पुलिस में सेवा की और पंथ के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और अब तक उनकी वर्षगांठ पर त्योहार मनाए जाते थे. उसने तर्क दिया कि कई पुलिस कर्मियों की अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए मृत्यु हो गई, कुछ समय बाद भुला दिया गया और इसलिए उन्हें संघर्ष के लिए सिख पंथ के पक्ष में लाइन खींचनी चाहिए.
  • हाल ही में, WPD ने बरनाला में एक और नशामुक्ति केंद्र खोला है और मोगा और मुक्तसर में दो और खोलने की योजना बना रहे थे ताकि एक निजी मिलिशिया उसकी कमान पर कार्रवाई करने के लिए तैयार रहे.

WPD की भविष्य की योजना का खुलासा करते हुए अमृतपाल सिंह ने 19 मार्च को गुरुद्वारा मुक्तसर साहिब, मुक्तसर से खालसा वाहीर का दूसरा चरण शुरू करने और दमदमा साहिब, जिला में समाप्त करने की घोषणा की थी. वह बैसाखी के दिन मालवा क्षेत्र के गांवों का दौरा कर मालवा में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के बाद बठिंडा की तरफ रुख कर रहा था.

इस बीच अमृतपाल के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहने वाले ज्ञानी हरप्रीत सिंह (अभिनय जत्थेदार, अकाल तख्त) ने अजनाला के बाद सिख जत्थेदारों द्वारा विरोध के दौरान गुरु ग्रंथ साहिब को ले जाने पर गठित समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट (12 मार्च) पर असंतोष व्यक्त किया. घटना में जहां गुरु ग्रंथ साहिब को अमृतपाल सिंह ने ढाल के रूप में इस्तेमाल किया और समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ इसे फिर से जमा करने के निर्देश के साथ रिपोर्ट वापस कर दी.

इसके अलावा अमृतपाल की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश में 'कौमी इंसाफ मोर्चा'(QIM) के आयोजक, अजनाला घटना के दौरान गुरु ग्रंथ साहिब ले जाने पर अमृतपाल सिंह के समर्थन में सामने आए क्योंकि वे चाहते हैं कि अमृतपाल लामबंदी बढ़ाने के लिए QIM का हिस्सा बने. धरना स्थल पर और इसके लिए वेकोर कमेटी के एक सदस्य के खिलाफ कार्रवाई की, जिसने अमृतपाल द्वारा अजनाला में विरोध स्थल पर गुरु ग्रंथ साहिब ले जाने की निंदा की थी.

अमृतपाल पाकिस्तान में सिख समुदाय को दी जाने वाली विभिन्न यातनाओं पर स्पष्ट रूप से चुप रहा है, जिसमें जबरन धर्मांतरण के लिए नाबालिग सिख लड़कियों का अपहरण, गुरुद्वारा ननकाना साहिब पर हमला, महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति को नुकसान पहुंचाना और पाकिस्तान में एक गुरुद्वारा को बंद करना शामिल है.

अमृतपाल जहां रहता था वहां से महज 40 किलोमीटर दूर उसकी नाक के नीचे ऐसी तमाम घटनाएं हो रही हैं. 

NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980) की आवश्यकता क्यों?
अमृतपाल की पंजाब के शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने की मंशा थी, जिसका अंदाजा एक अन्य सिख वरिंदर सिंह के अपहरण और हमले में शामिल होने से लगाया जा सकता है. अजनाला की घटना के दौरान अधिकारियों की खुलेआम अवहेलना करना और ऐसा करते समय पुलिसकर्मियों को घायल करने से नहीं हिचकिचाना, बेअदबी/बेदबी में शामिल होना कपूरथला और जालंधर के गुरुद्वारों में तोड़-फोड़ का सहारा लेते हुए, ईसा मसीह और हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण देकर सांप्रदायिक माहौल को खराब करना, युवाओं को हिंसा के लिए इस्तेमाल करना और आनंदपुर खालसा फौज ( AKF) के रूप में अपने निजी मिलिशिया का नाम देकर गन कल्चर को बढ़ावा देना, धमकी देना, खुले तौर पर यह घोषणा करके कि वे राज्य में विश्वास नहीं करते हैं और पंजाब सरकार के खुले में हथियारों का प्रदर्शन नहीं करने के आदेश की अवहेलना करते हैं. प्रतिबंधित संगठन एसएफजे (सिख फॉर जस्टिस) के साथ संबंध, जो अब डब्ल्यूपीडी के खुले समर्थन में आ गया है. 

खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि NSA में हिरासत में लेने के बाद WPD से जुड़े लोगों  को पंजाब से बाहर भेजने की जरूरत है. अगर उन्हें पंजाब की किसी जेल में रखा जाता तो वे जेल ब्रेक में शामिल होंगे. वे जेल में बंद अन्य अपराधियों को कट्टरपंथी बना देंगे और उन्हें आनंदपुर खालसा फौज (AKF) में शामिल कर लेंगे.

WPD से जुड़े लोग कौन हैं और उनका असल मकसद क्या है?

अमृतपाल- ट्रक ड्राइवर, कटे बाल, दुबई में आधुनिक तरीके से जीवन जी रहा था.
दलजीत कलसी- एक्टर, वित्तीय धोखाधड़ी/पोंजी योजना में शामिल, थाईलैंड की अक्सर यात्राएं करने वाला.
पापलप्रीत- स्मॉल टाइम रिपोर्टर.
गुरमीत बुक्कनवाला- फर्नीचर की दुकान चलाता था.

इन सभी व्यक्तियों का मकसद पैसा कमाना और कम समय में सत्ता हासिल करना था. अमृतपाल ने दीप सिद्धू की अचानक हुई मौत को भुनाया.



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अदाणी समूह की सात कंपनियों के शेयर चढ़े, तीन में रहा नुकसान

शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के बीच अदाणी समूह की दस सूचीबद्ध कंपनियों में से सात के शेयर शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए. समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर भी दो प्रतिशत चढ़ गया. अदाणी एंटरप्राइजेज समेत समूह की सात कंपनियों के शेयर लाभ के साथ बंद हुए, जबकि तीन में नुकसान रहा.

बीएसई पर अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 1.88 प्रतिशत बढ़कर 1,877.15 रुपये पर बंद हुआ. इसका बाजार मूल्यांकन बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये हो गया.

इसके अलावा अदाणी ट्रांसमिशन का शेयर 1,024.85 रुपये और अदाणी ग्रीन एनर्जी 816.80 रुपये पर बंद हुआ. इन कंपनियों के शेयरों में पांच-पांच प्रतिशत की बढ़त हुई. इन कंपनियों के शेयरों ने बीएसई पर अपने ऊपरी सर्किट को छुआ.

वहीं अदाणी विल्मर का शेयर 1.52 प्रतिशत उछलकर 427.35 रुपये पर, अदाणी टोटल गैस 1.07 प्रतिशत बढ़कर 897.95 रुपये पर और अदाणी पावर 0.60 प्रतिशत बढ़कर 199.95 रुपये पर बंद हुआ.

साथ ही, बीएसई पर अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन का शेयर 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 680.10 रुपये पर बंद हुआ.

दूसरी ओर, एनडीटीवी 1.63 प्रतिशत गिरकर 205.70 रुपये पर, एसीसी 1.39 प्रतिशत गिरकर 1,728.80 रुपये पर और अंबुजा सीमेंट्स 0.09 प्रतिशत घटकर 378.25 रुपये पर बंद हुआ.

इस बीच, शेयर बाजार में बीएसई सेंसेक्स 355.06 अंक यानी 0.62 प्रतिशत चढ़कर 57,989.90 अंक पर बंद हुआ. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 114.45 अंक या 0.67 प्रतिशत बढ़कर 17,100.05 अंक पर बंद हुआ.

शेयर बाजारों में गुरुवार को सकारात्मक रुख के बीच अडाणी समूह की छह सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर लाभ दर्शाते बंद हुए थे, जबकि चार कंपनियां नुकसान में रही थीं.

एनएसई और बीएसई ने गुरुवार को घोषणा की थी कि अडाणी समूह की तीन कंपनियां - अडाणी एंटरप्राइजेज, अडाणी पावर और अडाणी विल्मर शुक्रवार से अल्पकालिक अतिरिक्त निगरानी उपाय (ASM) ढांचे से बाहर हो जाएंगी.



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Pakistan's election body postpones Punjab polls to October; Imran Khan says constitution violated

In a late-night order issued on Wednesday, the Election Commission of Pakistan (ECP) said that after considering the reports, briefing and material brought before the commission, it has concluded that it is impossible to hold and organise the elections

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Thursday, March 23, 2023

मुंबई : सोनू निगम के पिता के घर से 72 लाख रुपये की चोरी के आरोप में पूर्व ड्राइवर पर मामला दर्ज

मुंबई में गायक सोनू निगम के 76-वर्षीय पिता के घर से कथित रूप से 72 लाख रुपये चोरी करने के आरोप में उनके (पिता के) पूर्व ड्राइवर पर मामला दर्ज किया गया है. एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. अधिकारी ने बताया कि गायक के पिता अगमकुमार निगम अंधेरी पश्चिम के ओशिवारा में विंडसर ग्रैंड बिल्डिंग में रहते हैं और कथित चोरी 19 मार्च से 20 मार्च के बीच हुई. उन्होंने बताया कि सोनू की छोटी बहन निकिता ने बुधवार तड़के कथित चोरी की शिकायत ओशिवारा पुलिस थाने में दर्ज कराई. 

अधिकारी ने बताया कि शिकायत के अनुसार, अगमकुमार के पास लगभग आठ महीने से रेहान नाम व्यक्ति ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था, लेकिन हाल ही में उसे हटा दिया गया, क्योंकि उसका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था. 

अधिकारी ने शिकायत का हवाला देते हुए बताया कि रविवार (19 मार्च) दोपहर अगमकुमार दोपहर के भोजन के लिए वर्साेवा इलाके में निकिता के घर गए और कुछ देर बाद लौटे. शाम को उन्होंने अपनी बेटी को फोन कर बताया कि लकड़ी की अलमारी में रखे डिजिटल लॉकर से 40 लाख रुपये गायब हैं. 

उन्होंने बताया कि अगले दिन अगमकुमार वीजा संबंधी किसी काम से अपने बेटे के घर “7-बंगलों” में गए और शाम को लौटे. उन्होंने लॉकर से और 32 लाख रुपये गायब पाए, जो क्षतिग्रस्त नहीं था. 

अधिकारी ने बताया कि अगमकुमार और निकिता ने अपनी सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें उनके पूर्व ड्राइवर रेहान को दोनों दिन बैग लेकर उनके (अगमकुमार के) फ्लैट की ओर जाते हुए दिखाया गया है, जब वह बाहर थे.

शिकायत के अनुसार, अगमकुमार को शक है कि रेहान “डुप्लीकेट चाबी” की मदद से उनके फ्लैट में घुसा और कमरे में डिजिटल लॉकर से 72 रुपये चुरा लिए.

अधिकारी ने बताया कि निकिता की शिकायत पर ओशिवारा पुलिस ने चोरी और घर में घुसने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 380, 454 और 457 के तहत प्राथमिकी दर्ज की. उन्होंने बताया कि जांच जारी है. 

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New bill aims to outlaw caste discrimination in California

California state Sen. Aisha Wahab has introduced legislation adding caste as a protected category under the state's anti-discrimination laws

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U.S.-Argentine researcher wins Abel Prize for maths

Last year, the prize was won by U.S. mathematician Dennis Sullivan for his research into topology and chaos theory.

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अलग-अलग चूल्हों पर गठबंधन की खिचड़ी पका रहे विपक्षी दलों में एकजुटता के आसार कम

लोकसभा चुनाव 2024 जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, विपक्ष की एकजुटता की कवायद तेज होने के साथ-साथ इस पर सवाल भी उठते जा रहे हैं. साल 2024 से पहले मौजूदा वर्ष 2023 में तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और छह राज्यों के चुनाव होने हैं. पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड के चुनाव हो चुके हैं. कर्नाटक, मिजोरम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव आने वाले समय में होने हैं. लोकसभा चुनाव से पहले 'सेमीफाइनल' कहे जा रहे इन विधानसभा चुनावों के परिणामों से कुछ हद तक यह साफ हो जाएगा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) के खिलाफ विपक्ष लोकसभा चुनाव में कितना एकजुट होगा और कैसा प्रदर्शन करेगा? फिलहाल पूर्वोत्तर के राज्यों के नतीजों ने सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) को आईना दिखा दिया है. इन चुनाव परिणामों से यह भी साफ हो गया है कि क्षेत्रीय पार्टियां अपने राज्यों में भी अपने बलबूते सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पा रहीं.     

तीन मार्च को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया था कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव अकेले अपने बलबूते लड़ेगी. ममता के 'एकला चलो रे' के नारे के एक पखवाड़े के बाद ही उनकी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुलाकात हुई, फिर दोनों ने मिलकर अगला लोकसभा चुनाव गठबंधन करके लड़ने की घोषणा कर दी. उन दोनों की मंशा कांग्रेस से परहेज करते हुए क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की है. अखिलेश ने तो साफ तौर पर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के अस्तित्व पर सवाल उठाया. ममता बनर्जी और अखिलेश यादव ने संकेत दिए हैं कि वे कांग्रेस और बीजेपी से दूरी बनाकर रखेंगे. उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए क्षेत्रीय पार्टियों से बातचीत करने के संकेत भी दिए हैं. ममता बनर्जी बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से जल्द ही मुलाकात करने वाली हैं. 

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गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस को सौंपने पर विपक्ष में असहमति

तृणमूल और समाजवादी पार्टी की गठबंधन की घोषणा से पहले कांग्रेस के विपक्षी एकता को लेकर दिए गए बयान से बवाल हुआ था. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 21 फरवरी को नागालैंड में दावा किया था कि अगले साल केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई में गठबंधन सरकार बनेगी. इसके अगले ही दिन उन्होंने सफाई दी कि सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे. खरगे ने बात संभालने की कोशिश की लेकिन इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने लोकसभा चुनाव में विपक्ष के गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस को सौंपने का आह्वान किया. बात यहीं नहीं रुकी, उन्होंने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाने की भी पेशकश कर दी. उन्होंने इसे कांग्रेस और देश के लोगों की 'मन की बात' निरूपित किया. कांग्रेस के रुख को लेकर विपक्षी दलों में तीखी प्रतिक्रिया हुई. क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए उसे विपक्ष का नेतृत्व करने के बजाय आत्ममंथन करने की सलाह दी.  

विपक्ष के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस का दावा है कि उसके अलावा सिर्फ बीजेपी ही राष्ट्रीय दल है. कांग्रेस की तीन राज्यों में सरकारें हैं और तीन राज्यों में वह गठबंधन सरकारों का हिस्सा है. कांग्रेस खुद के सबसे बड़े विपक्षी दल होने का दावा करती है क्योंकि वह 10 राज्यों में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है.

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कांग्रेस को तमिलनाडु में एमके स्टालिन की पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK), बिहार में लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (RJD), बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) का साथ मिलने का विश्वास है. वह वामपंथी दलों को भी साथ लेकर विपक्षी गठबंधन की तैयारी कर रही है.

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को परे रखते हुए विपक्ष के तीसरे मोर्चे की कवायद लेकर कांग्रेस ने चेताया है. छत्तीसगढ़ में हुए कांग्रेस के विचार-मंथन सम्मेलन में कांग्रेस ने कहा कि तीसरा मोर्चा चुनाव में सिर्फ बीजेपी की मदद करेगा. उसने कहा कि बीजेपी से मुकाबला करने के लिए समान विचारधारा वाले धर्मनिरपेक्ष दलों को एकजुट होकर गठबंधन करना चाहिए. एनडीए का मुकाबला करने के लिए एकजुट विपक्ष की तत्काल जरूरत है. किसी तीसरी ताकत के उभरने से बीजेपी और एनडीए को लाभ  मिलेगा.

जेडीयू और आरजेडी कांग्रेस के साथ

जनता दल यूनाईटेड के नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में अपनी गठबंधन सरकार में सहयोगी कांग्रेस को विपक्ष की अगुवाई करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनका कहना है कि, कांग्रेस को विपक्ष की एकता के लिए पहल करनी चाहिए. यदि यह एकजुटता सही तरीके से हुई तो बीजेपी लोकसभा चुनाव में 100 सीटों पर सिमट जाएगी. उनका यह भी कहना है कि कांग्रेस के बिना विपक्ष में एकता संभव नहीं है. 

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में कहा जाता है कि वे प्रधानमंत्री बनने के महत्वाकांक्षी हैं और बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी का उत्तराधिकार आरजेडी के नेता व बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को सौंपना चाहते हैं. हालांकि तेजस्वी यादव ने कहा है कि न तो उन्हें मुख्यमंत्री बनना है और न ही नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री. लेकिन वक्त के गर्त में दबीं वास्तविकताएं तभी सामने आएंगी जब चुनाव में विपक्ष कामयाब होगा.  

कांग्रेस और बीजेपी से अलग तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद

क्षेत्रीय दलों के कुछ नेता लोकसभा चुनावों से पहले एकजुट होकर तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश में जुट गए हैं. हालांकि तीसरे मोर्चे के लिए भी अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं, किसी एक झंडे के नीचे आने को लेकर सहमति नहीं बन रही है. इसके पीछे जहां सबके अपने अलग राजनीतिक गणित हैं, वहीं सबकी अपनी महत्वाकांक्षाएं भी हैं.        

तेलंगाना के क्षेत्रीय दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS), जिसका नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति (BRS) कर दिया गया है, के अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (KCR) बीजेपी के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा बनाने की कवायद में सबसे आगे चल रहे हैं. उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार सहित विपक्ष के कई नेताओं के साथ इसको लेकर विचार मंथन किया है. हालांकि केसीआर कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहते और शिवसेना व एनसीपी कांग्रेस के साथ महाराष्ट्र में पिछली सरकार चला चुके हैं इसलिए वे कांग्रेस को छोड़ना नहीं चाहते. शरद पवार ने तो साफ कहा है कि कांग्रेस को किसी वैकल्पिक मोर्चे से बाहर नहीं छोड़ा जा सकता. ऐसे में केसीआर को शिवसेना और एनसीपी का साथ मिलेगा, इसमें संदेह है.     

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उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने यह संकेत भी दे दिए हैं कि वह कांग्रेस को छोड़कर केसीआर के साथ नहीं जाएगी. उसने कहा है कि अगर सभी विपक्षी दल समय पर सतर्क नहीं हुए और एकजुट नहीं हुए तो 2024 का लोकसभा चुनाव देश का आखिरी चुनाव साबित होगा. शिवसेना के निशाने पर वे क्षेत्रीय दल हैं जो कांग्रेस को अस्वीकर कर रहे हैं. शिवसेना ने कहा है कि, ममता बनर्जी, केसीआर बीजेपी से लड़ने के लिए अपनी अलग खिचड़ी पका रहे हैं, जिसका कोई मतलब नहीं है. कांग्रेस से द्वेष रखकर बीजेपी की मौजूदा तानाशाही से कैसे लड़ेंगे? इस पहेली को पहले सुलझाना होगा. 

बीआरएस को कांग्रेस स्वीकार्य नहीं

कांग्रेस और बीआरएस के बीच कितनी तल्खी है, इसका अंदाजा हाल ही में के चंद्रशेखर राव की बेटी और बीआरएस की नेत्री कलवकुंतला कविता (K Kavitha) की ओर से दिए गए एक बयान से साफ हो जाता है. कविता ने कहा कि यदि कांग्रेस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराना चाहती है, तो उसे क्षेत्रीय दलों के साथ 'टीम प्लेयर' बनना चाहिए. उनका कहना है कि कांग्रेस अब एक राष्ट्रीय पार्टी नहीं है. कांग्रेस अपना अहंकार छोड़कर कब वास्तविकता का सामना करेगी?

केसीआर जहां विपक्ष को एकजुट करने में लगे हैं वहीं वे अपनी पार्टी को राष्ट्रीय दल बनाने की कोशिश में भी जुटे हैं. पहले उन्होंने अपनी पार्टी के नाम में से 'तेलंगाना' हटाकर 'भारत' जोड़ा और फिर उनकी हाल ही में महाराष्ट्र में हुई रैली इसी कवायद का हिस्सा है. बीआरएस को राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए कम से कम चार राज्यों में एक राज्य पार्टी के रूप में मान्यता की जरूरत है. उसे यह पाने के लिए किन्हीं चार राज्यों और चार लोकसभा सीटों पर छह प्रतिशत वोट हासिल करने पड़ेंगे. या फिर कम से कम तीन राज्यों में दो फीसदी लोकसभा सीटें (11 सीटें) जीतनी होंगी. इस लक्ष्य को हासिल किए बिना केसीआर की पार्टी राष्ट्रीय स्तर की पार्टी नहीं बन सकती है. केसीआर उन असंतुष्ट किसानों को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं जो केंद्र सरकार के खिलाफ लंबा आंदोलन चला चुके हैं. उन्हें भरोसा है कि किसानों के वोटों के बलबूते वे अपनी पार्टी का विस्तार करने में कामयाब हो जाएंगे.      

विपक्षी दलों ने अरविंद केजरीवाल को किया निराश 

इधर, आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि उनको अब तक विपक्षी दलों का स्पष्ट समर्थन नहीं मिला है. अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी एकता के उद्देश्य से 18 मार्च को आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निमंत्रित किया था. इनमें  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव आदि शामिल थे. लेकिन केजरीवाल की यह कोशिश नाकामयाब हुई और यह बैठक ही नहीं हो सकी. यहां तक कि केसीआर, जिनके साथ पिछले कुछ अरसे में केजरीवाल की नजदीकियां काफी बढ़ी हैं, भी इस बैठक के लिए  दिल्ली नहीं आए.  

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विपक्षी दलों में राजनीतिक विचारधारा का द्वंद

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए विपक्ष की एकता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में एक राय नहीं बन रही है. समस्या यह है कि कांग्रेस और बीजेपी के अलावा देश में कोई भी ऐसा दल नहीं है जिसका राष्ट्रीय स्तर पर जनाधार हो. सभी दल अपने-अपने राज्यों तक सीमित हैं. उनका सीमित दायरा होने से स्वाभाविक रूप से उनका जनाधार भी क्षेत्र विशेष तक सीमित है. इसके अलावा वैचारिक रूप से भी इन दलों के बीच मत भिन्नता है. ऐसे में कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जो भले ही काफी सिमट चुकी हो, लेकिन उसे, उसकी विचारधारा को देश भर में जाना-पहचाना जाता है. क्षेत्रीय दल भले ही सीमाओं से बंधे हों लेकिन उनकी महत्वाकांक्षाएं बड़ी हैं.    

बड़ा सवाल यह भी है कि अलग-अलग विचारधाराओं वाले दल यदि साथ आए भी तो वे जनता के सामने किस विचारधारा को लेकर जाएंगे? विपक्ष में एकजुटता की कोशिशें तो बहुत हो रही हैं और यह सिलसिला लंबा चलने वाला है, लेकिन वास्तव में विपक्ष क्या एकजुट हो पाएगा? इस सवाल का जवाब मिलना फिलहाल बहुत मुश्किल नजर आ रहा है.



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Donald Trump indictment | New York grand jury fails to meet, delaying decision in hush money case

Donald Trump would become the first former or sitting president to ever be charged with a crime if the panel votes to indict.

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राष्ट्र-विरोधी तत्व पंजाब में अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं जो चिंता का विषय : पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार

पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रविरोधी तत्व पंजाब में अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं जो चिंता का विषय है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर कार्य करने का अनुरोध किया. राज्य में हालिया घटनाक्रम पर उन्होंने कहा कि भारत की एकता एवं अखंडता को राजनीतिक महत्वाकांक्षा का बंधक नहीं बनाया जा सकता है. कुमार की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब पंजाब पुलिस ने अलगाववादी अमृतपाल सिंह और उसके संगठन ‘वारिस पंजाब दे' के सदस्यों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है.

उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि इस तरह की स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सीमावर्ती राज्य में बड़ी मेहनत से हासिल की गई शांति को खतरे में डाल सकती है, इसलिए इस मामले में पक्षपातपूर्ण प्रतिक्रिया नहीं हो सकती है. सभी राजनीतिक दलों को राज्य और केंद्र सरकारों के प्रयासों का समर्थन करना चाहिए, जिनसे समझदारी से निपटने की उम्मीद है.'' कुमार ने कहा, ‘‘स्थिति से निपटने में कोई भी गलत कदम या राजनीतिक दलों का प्रयास का प्रयास इस अशांत स्थिति में राष्ट्र के लिए महंगा पड़ेगा. यह अस्सी के दशक में पंजाब में अलगाववादी आंदोलन का एक स्पष्ट सबक है.''

उन्होंने कहा कि पंजाब में हालात राष्ट्र विरोधी अलगाववादी तत्वों द्वारा उग्रवाद और अशांति को बढ़ावा देने के प्रयासों का संकेत दे रहे हैं जो गंभीर चिंता का विषय है.

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Wednesday, March 22, 2023

India and U.S. working to finalise Air Information Sharing agreement

U.S. Air Force Secretary Frank Kendall also mentions surveillance and joint development of jet engines and space capabilities as areas where the two countries could build together

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हाथरस में तेज रफ्तार रोडवेज बस ने ई.रिक्शा को मारी टक्कर, पांच की मौत

जिले में आगरा अलीगढ़ रोड पर तेज रफ्तार रोडवेज बस ने मंगलवार को एक ई रिक्शा को टक्कर मार दी, जिसमें एक बच्चे समेत पांच लोगों की मौत हो गई. पुलिस अधीक्षक देवेश पांडे ने बताया कि आगरा अलीगढ़ रोड के चंदपा क्षेत्र के कपूरा चौराहे पर एक रोडवेज बस ने ई.रिक्शा को टक्कर मार दी जिससे ई रिक्शा के चालक समेत नौ लोग घायल हो गए. उन्होंने बताया कि सूचना मिलने पर मौक पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया. अस्पताल में पांच लोगों ने दम तोड़ दिया.

वहीं, गंभीर हालत में कुछ घायलों को अलीगढ़ रेफर किया गया. 

पुलिस के मुताबिक, मौके से रोडवेज बस के चालक को हिरासत में ले लिया गया है.

पिछले महीने भी हाथरस में एक सड़क दुर्घटना का मामला सामने आया था, जिसमें एक साथ चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक दर्जन से अधिक अन्य घायल हो गए. हाथरस में राष्ट्रीय राजमार्ग-93 पर मिनी ट्रक और ट्रैक्टर की टक्कर हो गई थी. हादसा हाथरस गेट इलाके के पास रुहेरी गांव में हुआ. पुलिस के अनुसार करीब डेढ़ दर्जन लोग मिनी ट्रक में सवार होकर आगरा के खंदौली में एक शादी सगाई समारोह में शामिल होकर अपने गांव लौट रहे थे. 

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केंद्र ने दिल्ली के बजट को रोकने की रची साजिश, भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ : AAP

आम आदमी पार्टी ( आप) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि केंद्र ने दिल्ली के बजट को रोकने की साजिश रची और कहा कि 21 मार्च 'काला दिन' है क्योंकि एक चुनी हुई सरकार को निर्धारित दिन पर विधानसभा में बजट पेश करने से 'रोका' गया. मंगलवार को वित्त वर्ष 2023-24 के लिए विधानसभा में बजट पेश किया जाना था लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे रोक दिया क्योंकि मंत्रालय ने विभिन्न मदों के तहत आवंटन पर दिल्ली सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था. मंत्रालय की ओर से बजट को मंजूरी देने के कुछ घंटों के बाद आप नेता दिलीप पांडे ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह 'दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण' है कि केंद्र द्वारा दिल्ली का बजट रोक दिया गया. 

उन्होंने कहा, 'आज एक काला दिन है. एक चुनी हुई सरकार को विधानसभा में बजट पेश करने की अनुमति नहीं थी. भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ. लोकतंत्र की सुंदरता यह है कि हर कोई जवाबदेह है.'

पांडे ने कहा, “ 10 दिन से दिल्ली का बजट केंद्र के पास था. उन्होंने पिछले 10 दिनों से कोई कार्रवाई नहीं की. वे जानते थे कि अगर उन्हें बजट पेश होने से रोकना है तो उन्हें अंतिम समय में कुछ करना होगा.”

उन्होने दावा किया कि केंद्र ने अरविंद केजरीवाल सरकार को फाइल वापस भेजने के बजाय इसे मुख्य सचिव को भेज दिया. उन्होंने कहा कि इस कदम ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों को हिला दिया है.

पांडे ने कहा, “ केंद्र ने आज लोकतंत्र की मजबूत जड़ों को खोदने का प्रयास किया है. राजनिवास (उपराज्यपाल के आवास) से खबरें ‘प्लांट' की जा रही है.”

इससे पहले यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह बेहद ‘‘शर्मनाक'' है कि बजट को रोका गया है.

उन्होंने कहा, ‘‘पूरी दुनिया के सामने हमारा मजाक बनाया गया है. यह शर्मनाक है कि केंद्र एक छोटे-से प्रदेश का बजट रोक रहा है.''

भारद्वाज ने कहा कि गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के बजट को लेकर कुछ चिंता जतायी थी और 17 मार्च को मुख्य सचिव को भेजे एक पत्र में इसे स्वीकृति देने से इनकार कर दिया था.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘वह (मुख्य सचिव) तीन दिन तक इसे दबाकर बैठे रहे. यह किसी राष्ट्र विरोधी गतिविधि से बड़ा कदम है. इसकी जांच की जानी चाहिए. इस षड्यंत्र के पीछे केंद्र है और उसके इशारे पर बजट में देरी की जा रही है.''

वरिष्ठ आप नेता ने कहा कि बजट एक पवित्र दस्तावेज और गुप्त कवायद होती है. उन्होंने पूछा, ‘‘केंद्र में बैठा कोई ‘बाबू' (दिल्ली) सरकार के खर्च पर सवाल कैसे कर सकता है.''

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