Tuesday, June 11, 2024

शहबाज शरीफ और नवाज शरीफ ने दी जीत की बधाई, कुछ ऐसा था PM मोदी का रिएक्‍शन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने फिर एक बार देश की बागडोर संभालने के बाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-एन) के प्रमुख नवाज शरीफ की ओर से दिए गए बधाई संदेश के जवाब में सोमवार को कहा कि भारत के लोग हमेशा शांति, सुरक्षा और प्रगतिशील विचारों के पक्ष में खड़े रहे हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जहां मोदी को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए ‘एक्स' पर संदेश पोस्ट किया, वहीं उनके भाई नवाज शरीफ ने कहा कि लोकसभा चुनाव में मिली सफलता मोदी के नेतृत्व में लोगों के विश्वास को दर्शाती है.

नवाज शरीफ ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘तीसरी बार प्रधानमंत्री का पद संभालने पर मोदी जी को मेरी हार्दिक बधाई. हालिया चुनावों में आपकी पार्टी की सफलता आपके नेतृत्व में लोगों के भरोसे को दर्शाती है.''

उन्होंने कहा, ‘‘आइए हम नफरत को आशा से बदलें और इस अवसर का लाभ उठाते हुए दक्षिण एशिया के दो अरब लोगों का भविष्य संवारें.''

प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार तीसरी बाद देश की बागडोर संभालने पर बधाई संदेश के लिए अपने पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ को भी धन्यवाद दिया.

चार जून को लोकसभा चुनाव की मतगणना संपन्न होने के बाद से करीब 100 देशों के नेताओं ने मोदी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जीत के लिए बधाई दी.

शहबाज शरीफ को PM मोदी ने दिया धन्‍यवाद 

मोदी ने ‘एक्स' पर शरीफ के बधाई संदेश के जवाब में कहा, ‘‘शहबाज शरीफ आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद.''

इससे पहले, शरीफ ने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने पर नरेन्द्र मोदी को बधाई.''

भारत के पड़ोसी देशों और हिंद महासागर क्षेत्र के सात नेताओं ने रविवार को प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया.

इन देशों के नेताओं और कई अन्य लोगों ने राजग की चुनावी जीत के बाद मोदी को फोन किया और बधाई संदेश भेजे.

हालांकि, सोमवार को ‘एक्स' पर शरीफ की पोस्ट से पहले पाकिस्तान की तरफ से ऐसा कोई संदेश नहीं आया था.

2019 में तनावपूर्ण हो गए थे दोनों देशों के संबंध 

पुलवामा आतंकवादी हमले के जवाब में फरवरी 2019 में भारत के युद्धक विमानों द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर बमबारी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे.

भारत द्वारा पांच अगस्त 2019 को जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने की घोषणा के बाद दोनों देशों के संबंधों में और खटास आ गई.

भारत का कहना है कि वह पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी वाले संबंध चाहता है और इस बात पर जोर देता रहा है कि इस तरह के संबंधों के लिए आतंक और शत्रुता से मुक्त माहौल बनाने की जिम्मेदारी इस्लामाबाद की है.

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Monday, June 10, 2024

नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फिर मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, यहां से शुरू किया था राजनीतिक सफर

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता और असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रविवार को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली.सोनोवाल 2014 में बनी नरेंद्र मोदी की सरकार में दो साल तक खेल और युवा कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री थे. असम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखने और मुख्यमंत्री बनने से पहले वो केंद्रीय मंत्रिपरिषद में पूर्वोत्तर के एकमात्र प्रतिनिधि थे.वह बाद में मुख्यमंत्री पद त्याग कर 2021 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री बने.

रविवार को दिल्ली में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले सोनोवाल ने कहा कि वह पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ देश के लोगों की सेवा करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि वो 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करने में योगदान देंगे.

क्या कहा है सोनोवाल ने

सोनोवाल ने कहा,''प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों के आशीर्वाद के कारण लगातार तीसरी बार कार्यभार संभाला है.लोगों ने मोदी की विनम्रता, ईमानदारी, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता के कारण उन पर विश्वास जताया है.'' छात्र राजनीति के उतार-चढ़ाव से लेकर तीन बार मंत्री बनने तक सोनोवाल का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव वाला रहा है.

सोनोवाल राज्य की सबसे प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी असम गण परिषद में एक छात्र नेता रहने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए.वह असम के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी की स्पष्ट पसंद थे,जब बीजेपी ने 2016 में पहली बार पूर्वोत्तर के इस राज्य में जीत हासिल की थी.

हालांकि,2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने सोनोवाल या किसी अन्य नेता को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं करने का विकल्प चुना था.इसके बजाय,उनकी सरकार के कद्दावर मंत्री हिमंत विश्व शर्मा को चुनाव के बाद राज्य में मुख्यमंत्री पद दिया गया.फिर भी, सोनोवाल (62) लंबे समय तक हाशिए पर नहीं रहे.उसी साल हुए फेरबदल में उन्हें जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में पदोन्नत कर दिया गया और जहाजरानी, जलमार्ग, बंदरगाह और आयुष जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए.

सोनोवाल का राजनीतिक सफर

विधि स्नातक,राज्यसभा सदस्य को एक ईमानदार नेता माना जाता है.उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी की लड़ाई को आगे बढ़ाया और अपने बार-बार दोहराए जाने वाले वाक्य 'बराक-ब्रह्मपुत्र-मैदान-पहाड़ियां' के साथ समुदायों को एकजुट किया, जो राज्य की विविध देशज आबादी को एकजुट करने वाले के रूप में उनकी भूमिका का प्रतीक है.

मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की सबसे कठिन परीक्षा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई,जब ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) के उनके पूर्व सहयोगियों ने उन पर देशज आबादी के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया था.

सोनोवाल ने अखिल असम छात्र संघ में शामिल होने के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की.वहां वह 1992 से 1999 तक इसके अध्यक्ष रहे और 1996 से 2000 तक नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष भी रहे.

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Sunday, June 9, 2024

उत्तर भारत में हीटवेव का अनुमान तो दक्षिण में भारी बारिश की संभावना, जानिए आपके शहर का मौसम

देश के विभिन्‍न इलाकों में मौसम का मिजाज बहुत अलग-अलग है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) ने अगले कुछ दिनों में जहां एक ओर दक्षिण भारत (South India) के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. वहीं उत्तर भारत (North India) के कई इलाकों में भीषण गर्मी और हीटवेव चलने का अनुमान जताया गया है. इस बीच पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी से जूझ रहे राजस्‍थान के कई इलाकों में गरज और तेज आंधी के साथ हल्की बारिश हुई. इसके चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली है. 

मौसम विभाग ने देश के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों में रविवार को हीटवेव से गंभीर हीटवेव चलने की संभावना है. साथ ही इस दिन पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, गांगेय-पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ स्थानों में हीटवेव लहर चलने की संभावना जताई है. 

राजस्‍थान में गरज और आंधी के साथ बारिश  

पूर्वी राजस्थान में शनिवार को कुछ स्थानों पर गरज और तेज आंधी के साथ हल्की बारिश हुई. इसके साथ ही मौसम में आए बदलाव से अधिकतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है. मौसम विभाग ने यह जानकारी दी. विभाग के अनुसार शनिवार को करौली में अधिकतम तापमान 42.9 डिग्री, धौलपुर में 42.7 डिग्री, जालौर में 42.6 डिग्री, अलवर में 42.2 डिग्री, अंता-बारां में 42.1 डिग्री, बाड़मेर में 41.9 डिग्री, चूरू और वनस्थली में 41.6 डिग्री, जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ में 41.5 डिग्री व जोधपुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. अजमेर, भीलवाड़ा, कोटा में अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री तो राजधानी जयपुर में 40.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

एक नए पश्चिमी विक्षोभ के असर के कारण राज्य में गत कई दिनों से तेज आंधी, बादलवाही और बूंदाबांदी का दौर जारी है. राजधानी जयपुर में भी शनिवार शाम गहरे बादल छाए रहे.

देश में सबसे गर्म शहर रहा प्रयागराज 

देश में शनिवार को सर्वाधिक तापमान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दर्ज किया गया. यहां पर अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके बाद बिहार के देहरी में 44.4 डिग्री सेल्सियस, मध्‍य प्रदेश के रीवा में 43.6 डिग्री सेल्सियस, गुजरात के सुरेंद्र नगर में 43 डिग्री सेल्सियस, हरियाणा के भिवानी में 42.7 डिग्री सेल्सियस और दिल्‍ली के रिज इलाके में अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. 

इन स्‍थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान 

इसके साथ ही मौसम विभाग ने कई दक्षिणी राज्‍यों में अलग-अलग स्‍थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. मौसम विभाग के मुताबिक, तटीय कर्नाटक में 10 और 11 जून को अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा का अनुमान है. इसके साथ ही आंतरिक उत्तरी कर्नाटक में 09 जून को भारी से बहुत भारी के साथ अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है. वहीं मध्य महाराष्ट्र में 09 से 11 जून के मध्‍य अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी और अत्यंत भारी वर्षा वर्षा की की संभावना है. केरल में 09 जून को अलग-अलग स्‍थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के आसार हैं तो असम और मेघालय में 11 और 12 जून को कुछ स्थानों पर भारी से लेकर बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है. 

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चयन परीक्षाओं की शुद्धता के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं, शीघ्र लागू होगा नया कानून: CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया तेज करने के लिए शनिवार को शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में विभिन्न चयन आयोगों के अध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. चयन परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और गोपनीयता सुनिश्चित करने पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने इस दौरान चयन प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार पर जोर दिया, साथ ही चयन प्रक्रिया की समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए. मुख्यमंत्री ने आयोगों में प्रचलित चयन प्रक्रियाओं और भावी कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी ली और शासन से उनकी अपेक्षाओं के बारे में भी पूछा. 

CM योगी ने कहा कि युवाओं के हित संरक्षण के लिए राज्य सरकार संकल्पित है. हर एक युवा की मेहनत, मेधा और प्रतिभा का सम्मान है. पेपर लीक अथवा साल्वर गैंग जैसी अराजक गतिविधियों को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता. ऐसे अपराध में संलिप्त हर अपराधी के खिलाफ ऐसी कठोरतम कार्रवाई की जाए, जो नजीर बने. ऐसे प्रकरणों में अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए कठोर कानून लाया जाना आवश्यक है. इसके दृष्टिगत यथाशीघ्र आवश्यक कार्यवाही की जाए.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि चयन आयोगों से अपेक्षा है कि वे भर्ती परीक्षाओं के लिए कैलेंडर समय से जारी करें और कड़ाई के साथ उसका अनुपालन करें. कैलेंडर के अनुसार परीक्षा न होने से अभ्यर्थियों को असुविधा होती है, इसका ध्यान रखा जाए.

CM योगी ने कहा कि  पेपर सेट करने की प्रक्रिया, उनकी छपाई, कोषागार तक पहुंचाने, कोषागार से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने, परीक्षा केंद्र की व्यवस्था, परीक्षा के बाद OMR आयोग तक पहुंचाने OMR की स्कैनिंग, परिणाम तैयार करने सहित पूरी व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है. अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग एजेंसियों का उपयोग करें. एजेंसी के रिकॉर्ड की भलीभांति जांच करने के बाद ही दायित्व दें. 

CM योगी ने कहा, "हर पाली में 02 या अधिक पेपर सेट जरूर होने चाहिए. प्रत्येक सेट के प्रश्नपत्र की छपाई अलग-अलग एजेंसी का माध्यम से कराया जाना चाहिए. पेपर कोडिंग को भी और व्यवस्थित करने की आवश्यकता है. तलाशी लेने के लिए महिला कर्मियों की तैनाती जरूर हो."
 



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Saturday, June 8, 2024

PM मोदी का शपथ ग्रहण समारोह: 9 और 10 जून को दिल्ली में नो-फ्लाई जोन लागू

PM नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने 9 और 10 जून के लिए राष्ट्रीय राजधानी को (उड़ान निषिद्ध क्षेत्र) नो-फ्लाई जोन घोषित किया है और निषेधाज्ञा लागू की है. पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश में यह कहा गया. PM मोदी प्रधानमंत्री के रूप में तीसरे कार्यकाल के लिए 9 जून को शपथ ग्रहण करेंगे.

दिल्ली में शपथ ग्रहण समारोह के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी और राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की पांच कंपनी, राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (एनएसजी) कमांडो, ड्रोन और ‘स्नाइपर' (अचूक निशानची) को तैनात किया जाएगा. 

अधिकारियों ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के सदस्य देशों की गणमान्य हस्तियों को आमंत्रित किए जाने के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी ‘हाई अलर्ट' पर रहेगी. पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि निषेधाज्ञा नौ और 10 जून को दो दिन तक लागू रहेगी.

अरोड़ा ने आदेश में कहा, ‘‘ऐसा बताया गया है कि भारत के प्रति शत्रुता रखने वाले कुछ आपराधिक, असामाजिक तत्व या आतंकवादी आम जनता, गणमान्य व्यक्तियों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं.''

उन्होंने कहा कि सीआरपीसी की धारा 144 द्वारा उन्हें प्राप्त शक्ति का प्रयोग करते हुए शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर दिल्ली के हवाई क्षेत्र में उड़ान निषेध रहेगा और इसका उल्लंघन करना भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दंडनीय होगा.

उन्होंने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने वाले गणमान्य व्यक्तियों के उनके होटल से समारोह स्थल जाने और वापस आने के लिए निर्दिष्ट मार्गों की व्यवस्था की जाएगी. शपथ ग्रहण समारोह में बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, भूटान, नेपाल, मॉरीशस और सेशेल्स के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है. शहर के लीला, ताज, आईटीसी मौर्या, क्लेरिजेस और ओबेरॉय जैसे होटल को पहले ही सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है.

समारोह के दिन दिल्ली पुलिस के स्वाट और एनएसजी के कमांडो राष्ट्रपति भवन एवं विभिन्न अहम स्थानों के आसपास तैनात रहेंगे. अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने समारोह के मद्देनजर सुरक्षा योजना बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय और नयी दिल्ली जिले में कई बैठकें कीं.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि चूंकि यह आयोजन राष्ट्रपति भवन के अंदर होना है, इसलिए परिसर के अंदर और बाहर तीन-स्तरीय सुरक्षा होगी. ‘बाहरी घेरे' पर दिल्ली पुलिस के जवान तैनात रहेंगे, उसके बाद अर्धसैनिक बल के जवान और ‘भीतरी घेरे' में राष्ट्रपति भवन की आंतरिक सुरक्षा के जवान तैनात रहेंगे.

अधिकारी ने कहा, ‘‘अर्धसैनिक बलों और दिल्ली सशस्त्र पुलिस (डीएपी) के जवानों की पांच कंपनी सहित लगभग 2500 पुलिस कर्मियों को कार्यक्रम स्थल के आसपास तैनात किए जाने की योजना बनाई गई है.'' एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गणमान्य व्यक्ति जिन मार्गों का इस्तेमाल करेंगे, उन पर ‘स्नाइपर' और सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे और नई दिल्ली में अहम स्थानों पर ड्रोन तैनात किए जाएंगे.

उन्होंने बताया कि सुरक्षा घेरा पिछले वर्ष हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई व्यवस्था की तरह ही रहने की संभावना है. अधिकारी ने बताया कि रविवार को दिल्ली के मध्य भाग की ओर जाने वाली कई सड़कें बंद की जा सकती हैं या सुबह से ही यातायात में बदलाव किया जा सकता है.

राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर शनिवार से ही जांच बढ़ा दी जाएगी. PM मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे. लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 293 सीट जीतकर बहुमत हासिल किया है.

ऐसा माना जा रहा है कि मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए विदेशी नेताओं की अतिथि सूची नयी दिल्ली की ‘‘पड़ोसी प्रथम'' की नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण माने जाने वाले द्वीप देशों पर उसके रणनीतिक रूप से ध्यान केंद्रित करने के मद्देनजर तैयार की गई है.



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Friday, June 7, 2024

महाराष्ट्र में कांग्रेस टॉप परफॉर्मर, MVA में सीटों को लेकर बनाएगी दबाव? पटोले हो सकते हैं CM चेहरा

महाराष्ट्र में कांग्रेस का कमबैक चर्चा का विषय बना हुआ है. पूरे देश में कांग्रेस की परफॉर्मेंस देखी जाए तो सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में सुधार हुआ है. अब महाराष्ट्र के आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दमखम से उतरने की तैयारी में है. तो वहीं कांग्रेस मुख्यमंत्री चेहरे का दावेदार भी खड़ा कर सकती है. नाना पटोले सीएम चेहरा पेश किए जा सकते हैं. 96 किलो लड्डुओं से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले का अनोखा सत्कार हुआ.

कांग्रेस ने जिन 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और उनमें से 13 सीटों पर जीत हासिल की. एनडीटीवी से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष,  नाना पटोले ने कहा, "कार्यकर्ताओं में बहुत जोश है. खुशी जाहिर कर रहे हैं, कमाल का परफॉर्मेंस रहा. इस ख़ुशी को आगे बढ़ाना है."

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2014 में कांग्रेस ने सिर्फ 2 सीटें जीती थीं. 2019 में मात्र एक सीट हासिल कर पाई थी. 2024 के चुनाव में कांग्रेस 13 सीटें जीतकर राज्य में नंबर वन पार्टी बन गई है. विदर्भ की सभी सीटें खासकर आदिवासी बेल्ट में गढ़चिरौली, चिमूर, चंद्रपुर, भंडारा गोंदिया, अमरावती में कांग्रेस ने जीत हासिल की है. रामटेक जैसी सीट भी कांग्रेस ने कई सालों बाद जीती है. मराठवाड़ा में भी कांग्रेस ने अपने पुराने गढ़ पर फिर से कब्जा कर लिया. नांदेड में चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के वरिष्ट नेता रहे अशोक चव्हाण ने पाला बदला और बीजेपी में चले गए. इस नांदेड़ सीट पर भी कांग्रेस ने फतह की. करीब 15 साल बाद लातूर सीट भी कांग्रेस जीती.

जालना लोकसभा सीट BJP का गढ़ मानी जाती है लेकिन इस बार कांग्रेस ने उलटफेर कर दिया. कांग्रेस के कल्याण वैजिनाथराव काले ने इस सीट से एतिहासिक जीत दर्ज की. इस सीट पर केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे पाटिल का कब्जा था और वो कभी यहां से चुनाव नहीं हारे थे. तो वहीं कांग्रेस ने अपनी परंपरागत सीट नंदुरबार में भी जबरदस्त जीत दर्ज की, यहां बीजेपी 2014 और 2019 में बड़े अंतर से चुनाव जीती थी. 

कांग्रेस मानती है कि महाराष्ट्र में राहुल गांधी की यात्राओं का असर दिखा. भारत जोड़ो यात्रा और न्याय यात्रा दोनों जहां-जहां से गुजरी, वहां कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया.

नाना पटोले ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा, “जीत की समीक्षा में यही समझते हैं कि श्रेय राहुल गांधी की दोनों यात्रा को जाता है, जिससे लोगों में जोश भरता हुआ दिखा. मेहनत रंग लायी. कन्याकुमारी से कश्मीर की यात्रा, हमारी गारंटी ये सब काम करती हुई दिख रही है. महाराष्ट्र से बीजेपी को सत्ता से बाहर करना है तो कांग्रेस ही विकल्प है, बीजेपी मुक्त महाराष्ट्र होने में समय नहीं लगेगा, बैठेंगे और रणनीति तैयार करेंगे.” 

विदर्भ में खोयी अपनी सुरक्षित सीटें फिर हासिल कर कांग्रेस ने पार्टी में बड़ी जान फूंकी है. नाना पटोले कहते हैं “विदर्भ, मराठवाड़ा,उत्तर और पश्चिम महाराष्ट्र. सभी जगह कांग्रेस का बेहतरीन प्रदर्शन हुआ है, बड़ी ताक़त के साथ सामने आयी है. आने वाले चुनाव में पार्टी दमखम से उतरेगी.”

राजनीतिक विश्लेषक अब नाना पटोले को भी मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार मान रहे हैं. गठबंधन में कांग्रेस अब मुख्यमंत्री चेहरे की डिमांड रख सकती है. राजनीतिक विश्लेषक अनुराग त्रिपाठी ने कहा, “कांग्रेस के अच्छे दिन आये हैं, विदर्भ में कमाल की परफॉर्मेंस, पंद्रह सालों से कांग्रेस गायब थी. विदर्भ में खासतौर से बाहर के कैंडिडेट भी आकर लड़ लेते थे जैसे गुलाम नबी आजाद, नरसिम्हा राव, ऐसी सेफ सीटें रहीं यहां की कांग्रेस के लिए लेकिन अब लंबे समय के बाद अच्छी वापसी हुई है. मुख्यमंत्री चेहरा पहले उद्धव को देख रहे थे लोग अब गठबंधन में नाना पटोले भी बड़े दावेदार रहेंगे.”

मुंबई में भी लगातार दो चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने जीत हासिल की है. जहां माना जाता है कि शिवसेना का वोट कांग्रेस को ट्रांस्फर हुआ. लोकसभा चुनाव में मिली 13 सीटें कांग्रेस के लिए ऐसी बूस्टर डोज़ बनी है कि आने वाले चुनावों में वो अपने गठबंधन में ज्यादा सीटों के लिए दबाव बना सकती है.

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Thursday, June 6, 2024

NDA सरकार के तीसरे कार्यकाल में कौन बनेगा पीएम मोदी का नया संकट मोचक?

अगले एक हफ्ते में भारत में नई सरकार होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) तीसरी बार शपथ लेंगे. उन्होंने पहले जो योजनाएं बनाई थीं, वे उन्हें आगे लेकर जाएंगे. प्रधानमंत्री ब्यूरोक्रेसी को लेकर अपना एक रोडमैप पहले ही कई बार शेयर कर चुके हैं. उसे लेकर उन्होंने काफी फैसले भी लिए हैं. यही नहीं देश में आंतरिक मामलों में कुछ बदलाव लाने की बात भी की जा रही है, ऐसे में उनका नया संकट मोचक कौन होगा? पहले यह भूमिका नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) निभा रहे थे. 

अजीत डोभाल को पिछली सरकार में कैबिनेट रैंक दी गई थी. उनका कार्यकाल 3 जून को खत्म हो गया. माना जा रहा है कि अब वे तीसरी टर्म में पीएम मोदी के साथ नहीं रहेंगे. उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा है कि बढ़ती उम्र के चलते अब वे तीसरे कार्यकाल में सुरक्षा सलाहकार के रूप में पीएम मोदी के साथ जुड़े रहना नहीं चाहते. 

एनएसए का पद क्यों है महत्वपूर्ण?
अब डोभाल की जगह कौन होगा, इस बारे में कई नाम सामने आए हैं. इससे पहले यह जान लेना चाहिए कि देश में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की क्या भूमिका रही है? और क्यों यह पद अहम माना जाता है? यह एक संवैधानिक पद है. प्रधानमंत्री का विश्वसनीय अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होता है. रणनीतिक मामलों में या पड़ोसी देशों की ओर से खतरों के मामलों में, आंतरिक सुरक्षा के मामलों में वे प्रधानमंत्री की मदद करते हैं और सलाह देते हैं. वे बताते हैं कि क्या फैसले लिए जाने चाहिए और भारत के हित में क्या ठीक होगा. वे प्रधानमंत्री को दुनिया भर के राजनीतिक मामलों को लेकर आगे का रोडमैप भी देते हैं. 

अजीत डोभाल पिछले 10 साल से इस कार्यभार को संभाल रहे थे. पहला कार्यकाल 2014 से 2019 तक था. सन 2019 में उनकी रैंक को बढ़ाकर कैबिनेट मिनिस्टर की रैंक के समतुल्य कर दिया गया. 

अजीत डोभाल का दिलचस्प इतिहास
अजीत डोभाल का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. उन्होंने बतौर पुलिस अधिकारी काफी ऑपरेशन किए. उन्होंने कांग्रेस के साथ भी उतना ही काम किया है जितना बीजेपी की सरकारों के साथ किया. उन्होंने ज्यादा से ज्यादा डिटेल के साथ ऑपरेशनों का संचालन किया है. सबसे पहले मिजो एकॉर्ड का नाम सामने आता है. उसमें उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. जब सिक्किम को राज्य का दर्जा दिया गया था तब भी उन्होंने अहम रोल निभाया था. जब 1984 के दंगे हुए थे तब वे पाकिस्तान में थे. वे वहां जासूस के रूप में काम कर रहे थे. जब 1988 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर हुआ था तब भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. बताया जाता है कि तीन महीने तक वे बतौर पाकिस्तानी एजेंट आतंकवादियों के साथ स्वर्ण मंदिर में छुपे रहे थे. उन्हीं के नेतृत्व में एनएसजी का ऑपरेशन कामयाब हुआ था. इसी के चलते उन्हें कार्ति चक्र से नवाजा गया था. 

सन 1995 में जब जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए थे तब भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. कश्मीर में 1990 के दशक में आतंकवाद का दौर शुरू हो गया था. उसके बाद पहले चुनाव 1995 में हुए थे. सन 1999 में कांधार में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी, जब आईसी 814 हाईजैक हुआ था. हाईजैकर्स ने कांधार जाकर प्लेन पार्क कर दिया था. आतंकवादियों से डील करने के लिए डोभाल वहां गए थे. वे विमान के अंदर भी गए थे. उनके प्रयासों से सारे यात्रियों को छोड़ दिया गया था. 

मुंबई पुलिस के खलल डालने से नाकामयाब हुई योजना 
इसके बाद डोभाल का नाम चर्चा में तब आया जब 2004 में सरकार के बदलने पर वे डायरेक्टर इंटेलीजेंस बने थे. उन्होंने इस पद पर एक साल काम किया था और रिटायर हो गए थे. सन 2005 में उनके नाम का जिक्र तब फिर आया जब वे एक ऑपरेशन प्लान कर रहे थे. इंडिया का मोस्ट वांटेड दाउद इब्रहीम दुबई में था और उसकी बेटी की शादी होने वाली थी, तब उन्होंने ऑपरेशन प्लान किया था कि वे यहां से छोटा राजन के दो गुर्गों को भेजेंगे. लेकिन मुंबई पुलिस ने इस ऑपरेशन में खलल डाल दी थी. पुलिस ने जब चाणक्यपुरी में एक गाड़ी को इंटरसेप्ट किया था जो लोग मिले थे, उनमें विकी मल्होत्रा और उसका एक सहयोगी था और तीसरे शख्स अजीत डोभाल थे. तब इस ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहीं थी मुंबई पुलिस की मीरा भुरवनकर. तब वे डोभाल को जानती तक नहीं थीं. तब यह पता चला था कि वे इस तरह का ऑपरेशन प्लान कर रहे थे. मुंबई पुलिस के बाधा खड़ी करने से वे कामयाब नहीं हो पाए थे. 

सन 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार सरकार बनाई तब डोभाल दुबारा लाइम लाइट में आए और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में उनसे जुड़े. वे इसलिए चुने गए क्योंकि वे राष्ट्रवादी विचारधारा पर विश्वास करते हैं. वे हमेशा कहते हैं कि हमेशा नेशन फर्स्ट होना चाहिए. भारत के हित को वे हमेशा ऊपर रखते हैं, जिसके चलते उन्हें यह अहम भूमिका दी गई थी. उन्होंने 2014 से 2019 तक कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन किए. उनका सबसे पहला अहम ऑपरेशन वह था जिसमें इराक में फंसीं नर्सों को वापस लाया गया था. उन्होंने इंडिपेंडेंट फॉरेन पॉलिसी को लेकर भारत सरकार को एक रास्ता दिखाया. भारत की एक देश के रूप में मजबूत छवि बनाने में उन्होंने काफी मदद की थी. अमेरिका  और रूस के साथ संतुलन बनाकर चलने की पॉलिसी में भी दिशानिर्देश अजीत डोभाल ने ही दिए थे. 

पीएम मोदी की ग्लोबल लीडर की छवि बनाने में योगदान  
प्रधानमंत्री मोदी की जो विश्व नेता के रूप में छवि बनी उसमें भी अजीत डोभाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि उन्होंने अपने सारे काम स्टेज के पीछे रहकर किए. उड़ी की सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा हमले के बाद बालाकोट और साइबर टेरर जैसे मामलों में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.                                                

अगले एनएसए के लिए तीन नामों की चर्चा
अब माना जा रहा है कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी एनडीए सरकार में अजीत डोभाल नहीं होंगे. उनकी जगह कौन होगा, इसकी चर्चा काफी चल रही है. इनमें सबसे ऊपर नाम आरएन रवि का है, जो कि फिलहाल तमिलनाडु के राज्यपाल हैं. वे भी इंटेलीजेंस ब्यूरो में रहे हैं. दूसरा नाम विदेश मंत्री एस जयशंकर का है. तीसरा नाम आलोक जोशी का है, जो कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के हेड रह चुके हैं. यह तो तय नहीं कि इनमें से ही किसी को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका दी जाएगी या कोई और इस पर को संभालेगा, लेकिन सवाल यह है कि अजीत डोभाल ने पीएम मोदी के लिए जो संकट मोचक की भूमिका निभाई थी, क्या नया एनएसए भी वह भूमिका निभा पाएगा? 



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एलन मस्क की कंपनी ने अमेजन की जंगलों में पहुंचाया इंटरनेट, आदिवासी युवा देखने लगे पॉर्न

दुनिया के हर हिस्से में इंटरनेट की पहुंच होती जा रही है. अमेजन की जंगलों (Amazon rainforest) में हजारों साल से रह रहे आदिवासियों को इंटरनेट की दुनिया से जोड़ने के लिए एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने सुदूर जंगलों तक इंटरनेट को पहुंचाया. 2 हजार की आबादी वाली मारुबोस जनजाति इसके माध्यम से पहली बार दुनिया से जुड़ी. पिछले साल सितंबर में ब्राज़ील में इंटरनेट सेवाओं की शुरूआत होने के साथ ही अमेज़न के जंगलों में इंटरनेट सेवाएं पहुंच गईं. 

The New York Times से बात करते हुए 73 वर्षीय त्सेनामा मारुबो ने बताया कि जब यह आया, तो हर कोई खुश था. इंटरनेट से काफी लाभ है. इससे हमारी जिंदगी आसान हुई लेकिन अब चीजें बदतर हो गई हैं.  इंटरनेट के कारण युवा आलसी हो गए हैं. वे गोरे लोगों के तौर-तरीके सीख रहे हैं.

आदिवासियों को अब एक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इंटरनेट के गलत उपयोग से उनकी संस्कृति पर खतरा बढ़ रहा है. युवा अब अपने फोन से चिपके रहते हैं. वे दोस्तों के साथ चैट करने में लगे रहते हैं, अश्लील सामग्री और गलत सूचनाएं उन्हें मिल रही है.  NYT से बात करते हुए गांव के मारुबो संघ के नेता अल्फ्रेडो मारुबो ने इंटरनेट की जमकर आलोचना की उन्होंने कहा कि  वह पोर्नोग्राफी से सबसे ज्यादा परेशान हैं. युवा इससे काफी प्रभावित हो रहे हैं. लोगों पर इसका गलत प्रभाव पड़ रहा है. 

आदिवासियों को हो रहे हैं कई फायदे
इंटरनेट के  उपयोग के लिए ये एंटेना अमेरिकी उद्यमी एलिसन रेनेउ द्वारा जनजातियों को दान में दिए गए थे.  इंटरनेट के आगमन को दूरदराज की जनजाति के लिए काफी बेहतर माना जा रहा था. उपचार सहित कई आपात स्थिति में उन तक जल्दी मदद पहुंचाने में यह बेहद उपयोगी साबित होता है.  जनजाति के एक सदस्य ने कहा कि जहरीले सांप के काटने पर हेलीकॉप्टर द्वारा शीघ्र बचाव की आवश्यकता होती है. इंटरनेट से पहले, मारुबो शौकिया रेडियो का उपयोग करता था, जो अधिकारियों तक पहुंचने के लिए कई गांवों के बीच एक संदेश प्रसारित करता था.  इंटरनेट ने ऐसी कॉलों को फास्ट बना दिया है.

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लोकसभा चुनाव: इस बार 24 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत हासिल की

इस बार लोकसभा चुनाव में देश भर में 24 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत हासिल की जिनमें पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार एवं पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान और असम के धुबरी से कांग्रेस उम्मीदवार रकीबुल हुसैन भी शामिल हैं.

बहरहाल, 17वीं लोकसभा में 26 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी और इस बार (18वीं लोकसभा में) इस संख्या में मामूली कमी आई है लेकिन यह 2014 की संख्या से अधिक है. वर्ष 2014 में 23 मुस्लिम उम्मीदवार संसद के निचले सदन के लिए चुने गए थे.

इस वर्ष लोकसभा चुनाव में 78 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में थे जबकि पिछले चुनाव में विभिन्न दलों ने 115 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे.

इस बार चुनाव जीतने वाले मुस्लिम उम्मीदवारों में धुबरी से रकीबुल हुसैन की जीत मतों के अंतर के लिहाज से महत्वपूर्ण रही. कांग्रेस उम्मीदवार हुसैन ने असम की धुबरी लोकसभा सीट पर ‘सर्व भारतीय संयुक्त गणतांत्रिक मोर्चा' (एआईयूडीएफ) सुप्रीमो बदरुद्दीन अजमल को रिकॉर्ड 10,12,476 मतों के अंतर से हराया. राज्य में कांग्रेस विधायक दल के उपनेता हुसैन को 14,71,885 वोट मिले, जबकि इस निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चौथी बार जीत हासिल करने के लक्ष्य से चुनावी मैदान में उतरे अजमल को 4,59,409 वोट मिले.

पहली बार चुनाव लड़ रहे युसूफ पठान ने पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस नेता एवं अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अधीर रंजन चौधरी को 85,022 मतों से हरा दिया.

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद ने 64,542 मतों के अंतर से जीत हासिल की, जबकि कैराना से समाजवादी पार्टी (सपा) की 29 वर्षीय उम्मीदवार इकरा चौधरी ने भाजपा के प्रदीप कुमार को 69,116 मतों से हराया.

गाजीपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार अफजाल अंसारी ने गाजीपुर लोकसभा सीट से भाजपा के पारसनाथ राय को पराजित कर जीत हासिल की. अंसारी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के पारस नाथ राय को 1,24,861 मतों के अंतर से हरा दिया.

समाजवादी पार्टी के मोहिबुल्लाह ने 4,81,503 वोट हासिल कर रामपुर सीट जीती, जबकि जिया उर रहमान ने संभल में 1.2 लाख मतों के अंतर से जीत हासिल की.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद सीट बरकरार रखी. नेशनल कॉन्फ्रेंस के आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने श्रीनगर लोकसभा सीट पर जीत हासिल की.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मियां अल्ताफ ने अनंतनाग-राजौरी से जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को हराया.

लद्दाख में निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद हनीफा ने 27,862 मतों के अंतर से जीत हासिल की, जबकि एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार अब्दुल राशिद शेख ने 4.7 लाख वोट हासिल करके जम्मू-कश्मीर की बारामूला सीट जीती.

बिहार में, कांग्रेस के तारिक अनवर ने कटिहार सीट जीत ली. कांग्रेस के अब सबसे अधिक सात मुस्लिम सांसद हैं, तृणमूल कांग्रेस के पांच और सपा के चार मुसलमान सांसद है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के तीन सांसद मुसलमान हैं.
 



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Wednesday, June 5, 2024

दो दशक बाद दोबारा चुनाव जीतने वाले लोकसभा अध्यक्ष बने ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राजस्थान के कोटा लोकसभा सीट से 41,139 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की. इसके साथ ही ओम बिरला ने एक मिथक को तोड़ दिया. वो दो दशक बाद दोबारा चुनाव जीतने वाले लोकसभा अध्यक्ष बन गए हैं. 1999 के बाद कोई भी लोकसभा अध्यक्ष दोबारा चुनाव जीतकर सदन में नहीं पहुंचा था. बिरला ने इस बार जीत की हैट्रिक लगाई है. 

लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित होने वाले अंतिम लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा थे, जो 1996 से 1998 तक 11वीं लोकसभा के पीठासीन अधिकारी थे. उस समय कांग्रेस के सदस्य रहे संगमा 1998 के लोकसभा चुनाव में मेघालय के तुरा से दोबारा निर्वाचित हुए थे.

जीएमसी बालयोगी
अक्टूबर 1999 में जब देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी. तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता जीएमसी बालयोगी को लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया. 3 मार्च, 2002 को एक हेलिकॉप्टर हादसे में उनका निधन हो गया.

मनोहर जोशी
जीएमसी बालयोगी के निधन के बाद अटल वाजपेयी की सरकार में शिवसेना नेता मनोहर जोशी को स्पीकर चुना गया, लेकिन जब 2004 में लोकसभा सभा के चुनाव हुए तो, जोशी मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से अपना चुनाव हार गए. इसके कारण भी वो संसद नहीं पहुंच पाए.

सोमनाथ चटर्जी
साल 2004 में यूपीए की सरकार बनी. इसमें डॉ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने. इस बार सीपीएम के नेता सोमनाथ चटर्जी को लोकसभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. लोकसभा अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति को अलविदा कह दिया और 2009 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा.

मीरा कुमार
2009 में मीरा कुमार को लोकसभा की स्पीकर बनीं, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वो संसद नहीं पहुंच सकीं.

सुमित्रा महाजन
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला. इंदौर लोकसभा सीट से लगातार 8 बार चुनाव जीतने वाली सुमित्रा महाजन को स्पीकर बनाया गया, लेकिन, 2019 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट ही नहीं दिया.

ओम बिरला के नाम एक और भी रिकॉर्ड दर्ज हो गया है, जिसके टूटने की हाल-फिलहाल कोई संभावना नजर नहीं आ रही है. ये रिकार्ड है उनके द्वारा संसद के पुराने और नये भवन में लोकसभा की अध्यक्षता करने का. सत्रहवीं लोकसभा में उनके अध्यक्ष रहने के दौरान दिसंबर 2023 में लोकसभा से बड़ी संख्या में सांसदों को निलंबित किए जाने के कारण भी उनका कार्यकाल सुर्खियों में रहा था. इस दौरान ही 2023 में नई संसद का उद्घाटन हुआ और नए लोकसभा कक्ष में बिरला ने अध्यक्ष के रूप में लोकसभा की कार्यवाही का संचालन किया.

बिरला को पर्दे के पीछे रहकर संगठन के लिए काम करने वाला नेता माना जाता है. भाजपा की युवा शाखा के लिए उन्होंने सालों साल काम किया और इस दौरान भाजपा के आम कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेताओं के संपर्क में आए. इनमें तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं. यही कारण है कि शाह व मोदी ने जून 2019 में सबको चौंकाते हुए लोकसभा अध्यक्ष के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया.

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Photo Credit: ANI

लोकसभा अध्यक्ष पद पर पहुंचने वाले बिरला राजस्थान मूल के पहले राजनेता हैं. इससे पहले बलराम जाखड़ 1980 से 1989 तक इस पद पर रहे, जो 1980 में पहले फिरोजपुर और बाद में 1984 में राजस्थान के सीकर से सांसद थे.

राजनीतिक जानकारों के अनुसार बिरला छात्र जीवन से ही संघ से जुड़ गए. इसके बाद वह भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े रहे और जिला व राज्य स्तर पर उसकी अगुवाई की. बिरला ने 2003 में विधानसभा चुनाव में कोटा दक्षिण सीट पर कांग्रेस के दिग्गज शांति धारीवाल को हराकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा. वो लगातार तीन बार विधायक रहे.

इस दौरान भारतीय जनता पार्टी में बिरला का कद लगातार मजबूत हुआ. 2014 के आम चुनाव में पार्टी ने उन्हें कोटा सीट से लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया. बिरला ने मौजूदा सांसद इज्यराज सिंह को हराया. वहीं 2019 के आम चुनाव में बिरला ने कांग्रेस के रामनारायण मीणा को 279677 मतों से हराया.

दस्तावेजों के अनुसार बिरला का जन्म 23 नवंबर 1962 को हुआ. उनके पिता उस समय श्रीकृष्ण सरकारी सेवा में थे तो मां शकुंतला घर संभालती थीं. 62 वर्षीय बिरला के लिए कोटा जन्मभूमि व कर्मभूमि दोनों रही है. उन्होंने स्कूली शिक्षा कोटा के गुमानपुरा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से की और उसके बाद बाद राजस्थान विश्वविद्यालय से बीकॉम व एम कॉम किया. उनकी शादी अमिता से हुई और उनकी दो बेटियां अंजली, आकांक्षा हैं. अमिता पेशे से सरकारी चिकित्सक हैं.



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कर्नाटक : सेक्स स्कैंडल के आरोपी हासन के जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना पराजित

Lok Sabha Election 2024 Results: सेक्स स्कैंडल में आरोपी जनता दल-सेक्युलर (JDS) के नेता और हासन सीट से सांसद प्रज्वल रेवन्ना लोकसभा चुनाव में 42,649 वोटों से हार गए. इस सीट पर कांग्रेस के श्रेयस एम पटेल विजयी हुए. प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं. उनको 6,30,339 वोट मिले, जबकि श्रेयस पटेल को 6,72,988 वोट मिले.

जेडीएस के संरक्षक और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के 33 वर्षीय पोते प्रज्वल रेवन्ना ने एनडीए के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. हासन सीट पर 26 अप्रैल को मतदान हुआ था. इसके बाद प्रज्वल के खिलाफ महिलाओं के यौन शोषण का मामला सामने आया. इस पर जेडीएस ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था. प्रज्वल फिलहाल इस केस की जांच कर रही एसआईटी की हिरासत में हैं.

श्रेयस पटेल के दादा ने प्रज्वल के दादा देवेगौड़ा को हराया था
प्रज्वल रेवन्ना को हराने वाले श्रेयस पटेल 34 साल के हैं. करीब 25 साल पहले सन 1999 में श्रेयस पटेल के दादा जी पुट्टास्वामी गौड़ा ने प्रज्वल रेवन्ना के दादा और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को हराया था. यानी इतिहास दोहराया गया है. सन 1999 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान एचडी देवेगौड़ा की लोकप्रियता चरम पर थी. कर्नाटक के वे पहले नेता हैं जो प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे थे. इसी साल, यानी सन 1999 में उन्होंने अपनी एक अलग पार्टी जेडीएस बनाई थी. इसके बावजूद एचडी देवेगौड़ा को श्रेयस पटेल के दादा जी पुट्टेगौड़ा ने 1,41,757 वोटों से हरा दिया था.

सेक्स स्कैंडल का हासन के चुनाव में नहीं पड़ा असर
हासन में 26 अप्रैल को मतदान हुआ था. प्रज्वल के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी पेन ड्राइव 21-22 अप्रैल को बाहर आ गई थीं. समूचे लोकसभा क्षेत्र में इसकी चर्चा थी. लेकिन इसके बावजूद विजयी कांग्रेस उम्मीदवार श्रेयस पटेल और प्रज्वल रेवन्ना के बीच हार-जीत का फासला महज 42,659 वोटों का है. यानी सेक्स स्कैंडल के सामने आने के बावजूद श्रेयस पटेल और प्रज्वल रेवन्ना के बीच कांटे की टक्कर हुई. 

श्रेयस पटेल को 6,72,988 वोट मिले जबकि प्रज्वल रेवन्ना को 6,30,339 मत मिले. दोनों ही उम्मीदवारों को महिला और पुरुष दोनों के वोट मिले. इससे यह साफ है कि सेक्स स्कैंडल का इस चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ा. इसकी एक वजह यह हो सकती है कि प्रज्वल रेवन्ना के दादा एचडी देवेगौड़ा को वोक्कालिग्गा अपना हीरो मानते हैं. कई लोगों ने बताया कि देवेगौड़ा की 91 साल की उम्र की वजह से वोक्कलिग्गाओं की सहानुभूति उनके साथ थी और हासन वोकलिग्गा बाहुल्य इलाका है.

एनडीए ने जेडीएस को तीन सीटें दी थीं
बीजेपी और जेडीएस का कर्नाटक में गठबंधन है. बीजेपी ने जेडीएस को 3 सीटें दी थीं- हासन, कोलार और मांड्या. मांड्या से एचडी कुमारस्वामी और कोलार से मलेश बाबू जीत गए हैं, जबकि हासन से प्रज्वल रेवन्ना हार गए.

वोक्कलिग्गाओं के नेता के तौर पर कौन उभरा? 
कुमारस्वामी ने दो लाख से ज्यादा मतों से जीत हासिल करके यह साबित कर दिया है कि प्रज्वल रेवन्ना यौन उत्पीड़न मामला सामने आने के बावजूद वोक्कलिग्गा समुदाय का नेतृत्व अब भी देवेगौड़ा परिवार के पास है. वहीं दूसरी तरफ राज्य के उप मुख्यमंत्री और वोकालिग्गा नेता डीके शिवकुमार के छोटे भाई डीके सुरेश बेंगलुरु रूरल से चुनाव हार गए हैं. उनके खिलाफ एचडी देवेगौड़ा के दामाद डॉक्टर सीएन मंजूनाथ 2,69647 वोटों से जीत गए हैं. सीएन मंजूनाथ बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे.

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Tuesday, June 4, 2024

5 महीने तक सिनेमाघर में लगी रही मनोज तिवारी की ये फिल्म, 30 लाख में 36 करोड़ का कलेक्शन कर हिला दिया था बॉक्स ऑफिस

भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार और बीजेपी के सांसद मनोज तिवारी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. मनोज तिवारी ने जब करियर स्टार्ट किया तब अपने गानों के जरिए वो भोजपुरी दर्शकों के चहेते बने रहे. राजनीति की दुनिया में भी मतदाताओं ने उन्हें हाथों हाथ लिया और जिताया भी है. जब उनकी डेब्यू मूवी रिलीज हुई थी तब भी हाल कुछ ऐसा ही था. मनोज तिवारी अपनी फिल्म से देखते ही देखते भोजपुरी इंडस्ट्री में छा गए थे. वो भी तब जब उनका मुकाबला रवि किशन जैसे पॉपुलर स्टार से था. तब अपनी पहली फिल्म से ही उन्होंने भोजपुरी दर्शकों के बीच जबरदस्त झंडे गाड़ दिए थे.

ये थी डेब्यू फिल्म

मनोज तिवारी की डेब्यू फिल्म थी ससुरा बड़ा पईसावाला. ये फिल्म रिलीज हुई थी साल 2004 में. इस मूवी के रिलीज होने के पहले ही मनोज तिवारी अपने गानों के जरिए भोजपुरी दर्शकों के दिलों में जगह बना चुके थे. उस दौर में मनोज तिवार की इस फिल्म को देखने के लिए थियेटर से बाहर दर्शकों की लाइन लगी हुई थी. उस समय पर रवि किशन भोजपुरी फिल्मों की दुनिया के सबसे बड़े सितारे माने जाते थे. ऐसे में एक नए चेहरे के साथ आई फिल्म क्या कमाल दिखा सकेगी. खासतौर से जब वो एक्टर एक सिंगर रहा तो क्या एक्टिंग में भी कमाल दिखा पाएगा. ये जानने की जिज्ञासा हर दर्शक के दिल में थी.

रातोंरात बने स्टार

इस फिल्म ने मनोज तिवारी को रातों रात भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा स्टार बना दिया. फिल्म बनी थी 30 लाख रुपये में, लेकिन इसकी कमाई 36 करोड़ रु. से भी ज्यादा की हुई. मनोज तिवारी तो बड़े स्टार बने ही एक्ट्रेस रानी चटर्जी भी भोजपुरी सिनेमा की स्थापित कलाकार बन गईं. इस फिल्म के लिए ये भी कहा जाता है कि फिल्म करीब 4 से 5 महीने तक सिनेमाघरों में लगी रही और दर्शक इसे देखने आते रहे.



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