Saturday, April 22, 2023
With upcoming three-nation tour, Sheikh Hasina balancing the big powers
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Friday, April 21, 2023
झारखंड में भीषण गर्मी, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पारा 43 डिग्री पार
झारखंड और ओडिशा में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. झारखंड के कुछ इलाकों में जहां अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, वहीं ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पारा 43.2 डिग्री सेल्सियस के पार हो गया है. रांची में मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि हालांकि, 21 अप्रैल से राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश से आंशिक राहत मिलने की उम्मीद है.
रांची मौसम केंद्र के प्रभारी अभिषेक आनंद ने बताया, 'झारखंड के गोड्डा में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि जमशेदपुर में यह 44.1 डिग्री सेल्सियस और डाल्टनगंज में 43.8 डिग्री सेल्सियस रहा.” आनंद ने कहा, '21 अप्रैल से दो-तीन दिनों तक हल्की बारिश और आंधी चलने की संभावना है, जिससे तापमान में दो से चार डिग्री की कमी आ सकती है.'
राज्य की राजधानी रांची में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया. वहीं, भुवनेश्वर स्थित मौसम कार्यालय ने कहा कि ओडिशा का सबसे गर्म इलाका बौद्ध रहा, जहां अधिकतम तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, उसके बाद भुवनेश्वर (43.2 डिग्री सेल्सियस), तालचेर और केंद्रपाड़ा (43 डिग्री सेल्सियस) का स्थान रहा.
महानदी नदी के किनारे बसे कटक शहर में भी तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मयूरभंज, झारसुगुड़ा, खुर्दा और कटक जिलों में अगले 24 घंटों में लू की स्थिति के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है.
इसी तरह, क्योंझर, सुंदरगढ़, संबलपुर, देवगढ़, अंगुल, बौद्ध, सोनपुर और बलांगीर जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट' जारी किया गया है.
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Charge to be dropped in Alec Baldwin movie set shooting
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मानहानि केस: कोर्ट के झटके के बाद राहुल गांधी शनिवार को खाली करेंगे सरकारी बंगला: सूत्र
मोदी सरनेम वाले आपराधिक मानहानि केस (Modi Surname Defamation Case) में सजा के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi ) की याचिका सूरत कोर्ट ने खारिज कर दी है. एडिशनल सेशन कोर्ट जज आरपी मोगेरा गुरुवार को कोर्ट में आए और इस याचिका पर केवल एक शब्द कहा- 'डिसमिस्ड.' जज मोगेरा ने इस मामले पर 13 अप्रैल को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं और फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले सूत्रों ने NDTV के बताया कि याचिका खारिज होने के बाद अब राहुल गांधी शनिवार को 10 तुगलक लेन स्थित अपना सरकारी बंगला छोड़ देंगे. उनका सामान पहले ही सोनिया गांधी के सरकारी बंगले में शिफ्ट किया जा चुका है. अब राहुल हाईकोर्ट में अपील करेंगे.
मानहानि केस में 23 मार्च को राहुल गांधी को 2 साल की सजा सुनाई गई थी. इसके अगले ही दिन यानी 24 मार्च को उनकी लोकसभा सदस्यता भी रद्द हो गई. इसके बाद 27 मार्च को उन्हें सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिला था. बंगला खाली करने की मियाद 22 अप्रैल है.
2005 में अलॉट हुआ था बंगला
सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार, दो साल की सजा पाने वाला दोषी सांसद या विधायक नहीं रह सकता. ऐसे केस में सदस्यता रद्द होने पर सरकारी बंगला खाली करना होता है. राहुल गांधी 10 तुगलक लेन स्थित बंगले में 2005 से रह रहे थे.
2019 में दिया था मोदी सरनेम वाला बयान
मानहानि का केस 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में हुई चुनावी रैली में राहुल के बयान से जुड़ा है. राहुल गांधी ने रैली में कहा था- 'हर चोर का सरनेम मोदी क्यों होता है.' इस बयान पर गुजरात के बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने मानहानि का केस दाखिल किया था.
अपील के लिए 30 दिन का समय
गुजरात की अदालत ने सजा के खिलाफ आगे अपील के लिए राहुल गांधी को 30 दिन का समय दिया था. राहुल ने सजा के खिलाफ अपील की और उनकी याचिका सूरत कोर्ट में खारिज हो गई. इसका मतलब यह है कि राहुल को अभी सांसद के रूप में बहाल नहीं किया जा सकता है. कांग्रेस के मुताबिक, राहुल गांधी अब हाईकोर्ट में अपील करेंगे.
राहुल गांधी ने दी थीं ये दलीलें
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के वकील आरएस चीमा ने एडिशनल सेशन कोर्ट के जज आरपी मोगेरा को दलील दी थी कि मानहानि का केस उचित नहीं था. केस में अधिकतम सजा की भी जरूरत नहीं थी. उन्होंने कहा था- 'सत्ता एक अपवाद है, लेकिन कोर्ट को सजा के परिणामों पर विचार करना चाहिए. विचार करना चाहिए कि क्या दोषी को ज्यादा नुकसान होगा. ऐसी सजा मिलना अन्याय है.'
वहीं, मानहानि का केस करने वाले पूर्णेश मोदी ने कहा था कि राहुल गांधी बार-बार मानहानि वाले बयान देने के आदी हैं.
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Eid 2023 date : 22 या 23 अप्रैल भारत में किस दिन मनाई जाएगी ईद? Eid-Ul-Fitr 2023 बनाएं ये स्पेशल डिश
Eid-ul-Fitr 2023 Date in India: दुनियाभर में ईद का जश्म धूमधाम से मनाया जाता है. 1 महीने तक रोजा रखने के बाद ईद मनाई जाती है. जिसकी रौनक बाजारों में भी देखने को मिलती है. बाजार सजे रहते हैं और कई जगह तो ईद के 1 या 2 दिन पहले पूरी रात बाजारें लगती हैं. हालांकि इस साल ईद (ईद-उल-फितर या ईद अल-अधा ) (Eid-Ul-Fitr 2023 Date) की अभी कोई तारीख निश्चित नही है. 20 अप्रैल की शाम को चांद देखने के बाद ही निश्चित होगा कि भारत में ईद किस दिन होगी. 20 तारीख को अगर सऊदी अरब और खाड़ी देशों में चांद दिखाई देता है तो इसका मतलब है कि वहां पर 21 अप्रैल को ईद मनाई जाएगी.
अगर अरब देशों में ईद 21 को मनाई गई तो भारत में यह 22 अप्रैल यानि शनिवार या फिर 23 अप्रैल रविवार के दिन मनाई जाएगी. दरअसल भारत में ईद ( Eid 2023 Date) अरब देशों में जिस दिन ईद होती है उसके दूसरे दिन मनाई जाती है, लेकिन हमेशा ऐसा ही हो जरूरी नही. सब कुछ चांद दिखने के बाद ही तय होता है.
रमजान की शुरूआत
इस साल रमजान के पाक महीने की शुरूआत 24 मार्च से हुई थी. इस बार रोजा 29 या फिर 30 दिन का हो सकता है. रमजान के पाक महीने की शुरूआत चांद देखकर ही होती है और इस महीने की समाप्ति होने पर ईद का जश्न भी चांद देखकर ही मनाया जाता है. यही वजह है कि ईद की एक निश्चित तारीख तय नहीं होती है. यह हर साल चांद के निकलने पर ही ईद मनाई जाती है.
चांद रात क्या है
चांद रात के बाद सुबह ईद-उल-फितर मनाया जाता है, यह दुनिया भर के मुसलमानों द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक त्योहार है. रमजान के महीने भर के रोजे इस दिन समाप्त होते हैं. इस पाक महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं जिसमें सूरज निकलने के बाद से सूरज के डूबने तक खाने-पीने से दूर रहते हैं. इसलिए ईद-उल-फितर को "रोजे खत्म करने का त्योहार" भी कहा जाता है. इस्लामिक चंद्र कैलेंडर में दसवां महीना शव्वाल है और इस महीने का पहला दिन दुनिया भर में ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है.
ईद का त्योहार खास होता है और एक चीज जो इसे खास बनाती है वो है सेंवई. इस ईद पर हर घर में सेंवई बनाई जाती है जो अमूमन दो तरह की होती है. एक दूध वाली सेंवई और दूसरी सूखी मेवे और खोया वाली. ईद पर मीठी सेंवई बनाने की रेसिपी जानने के लिए यहां क्लिक करें.
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असम-अरुणाचल के बीच सीमा विवाद खत्म, गृहमंत्री अमित शाह ने करवाया समझौता; जानें क्या है पूरा मामला
साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की बीजेपी सरकार को उत्तर पूर्व के सभी राज्यों में शांति बहाली को लेकर एक बड़ी सफलता मिली है. असम और अरुणाचल के बीच 50 साल से चले आ रहे सीमा विवाद का अंत हो गया है.असम और अरुणाचल प्रदेश की सरकारों ने दोनों राज्यों के बीच पांच दशक से भी पुराने सीमा विवाद को खत्म करने के लिए गुरुवार को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समक्ष एक समझौते पर हस्ताक्षर किया. इसके साथ ही दोनों पूर्वोत्तर राज्यों की सीमा पर स्थित 123 गांवों की समस्या का भी समाधान हो गया. असम और अरुणाचल प्रदेश 804.1 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं और अरुणाचल प्रदेश को 1972 में केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच यह सीमा विवाद चल रहा था.
किन शर्तों पर हुए हैं समझौते, क्या था पूरा मामला?
2 पूर्वोत्तर राज्य असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पिछले 50 साल से बॉर्डर पर स्थित कुछ गांवों को लेकर विवाद था. दोनों ही राज्य 804.1 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं. साल 1972 में जब अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया उसी समय से दोनों ही पक्ष इन 123 गांवों पर अपना-अपना दावा करते रहे थे. कई बार प्रयासों के बाद भी दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनी थी. गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हाल के दिनों में हुए कई दौर की वार्ता के बाद दोनों ही पक्षों के बीच सहमति बन गई.
अरुणाचल प्रदेश द्वारा स्थानीय आयोग के समक्ष 2007 में जिन 123 गांवों पर दावा किया था, उनमें से 71 पर सौहार्दपूर्ण समाधान निकल आया है. इनमें सरमा और खांडू के बीच 15 जुलाई, 2022 को ‘नामसाई घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर के दौरान निकले 27 गांवों के समाधान, और आज के समझौते के तहत निकले 34 गांवों के समाधान शामिल हैं. इन 71 गांवों में से अरुणाचल प्रदेश में से एक गांव को असम में शामिल किया जाएगा, 10 गांव असम में ही बने रहेंगे और 60 गांवों को असम से लेकर अरुणाचल प्रदेश में शामिल किया जाएगा. बाकि बचे 52 गांवों में से 49 गांवों की सीमाएं अगले छह महीनों में क्षेत्रीय समितियों द्वारा तय की जाएंगी, वहीं भारतीय वायुसेना के बमबारी क्षेत्र में आने वाले तीन गांवों का पुनर्वास किया जाना आवश्यक है. इस समझौते के तहत दोनों राज्यों की सरकारें सहमत हुई हैं कि 123 गांवों पर यह अंतिम फैसला होगा और यह विवाद समाप्त हुआ.
"यह विवाद आजादी के बाद ही खत्म होना चाहिए था"
केन्द्रीय मंत्री शाह ने कहा कि ये विवाद आज़ादी के बाद ख़त्म होना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ मुझे ख़ुशी है की ये मेरे कार्यकाल के दौरान हुआ. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जबकि देश स्वतंत्रता का 75वां साल मना रहा है, दोनों राज्यों की अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित 123 गांवों का विवाद अब हमेशा के लिए समाप्त हो गया है. शाह ने असम और अरुणाचल प्रदेश द्वारा पुराने लंबित सीमा विवाद को ‘सौहार्दपूर्ण' तरीके से सुलझाया जाना दोनों राज्यों के लिए ‘ऐतिहासिक' घटना है. शाह ने आशा जतायी कि 1972 से जारी इस पुराने सीमा विवाद की समाप्ति पूर्वोत्तर राज्यों में सर्वांगिण विकास और शांति लेकर आएगी.
गृहमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के कई स्थानों से आफस्पा को हटा लिया है. उन्होंने बताया, असम में 70 प्रतिशत, मणिपुर के छह ज़िलों के 15 पुलिस थानों, अरुणाचल में तीन ज़िले छोड़कर सभी ज़िलों, नगालैंड के सात जिलों और त्रिपुरा व मेघालय से पूर्णतया आफस्पा को हटा लिया गया है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह शांति और समृद्धि लाने वाला बनेगा.
यह ऐतिहासिक समझौता: पेमा खांडू
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सीमा विवाद की समाप्ति को ‘‘अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक'' बताया और भरोसा जताया कि इससे दोनों राज्यों में शांति और विकास में बड़ा बदलाव आएगा. उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की प्रेरणा और राजनीतिक इच्छाशक्ति तथा शर्मा नीत असम सरकार के सक्रिय सहयोग से संभव हो सका है.
संघीय ढांचा मजबूत होगा : हिमंत बिस्वा सरमा
असम के सीएम ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के साथ आज का समझौता पिछले दो वर्षों में मेघालय के साथ किए गए प्रयासों के अनुरुप ही है. इससे पूर्वोत्तर में भाईचारे की भावना बढेगी और हमारा संघीय ढांचा मजबूत होगा क्योंकि यह राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने का नया तरीका लाया है.
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Thursday, April 20, 2023
क्या है इजराइल-फिलिस्तीन विवाद? रमाल्लाह से देखिए NDTV की ये ग्राउंड रिपोर्ट
इजराइल और फिलिस्तीन दो ऐसे देश हैं, जिनका विवाद काफी लंबे समय से चला आ रहा है. दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए कई बार समझौते हुए, लेकिन निष्कर्ष कुछ खास नहीं निकला. रमजान के मौके पर तो दोनों देशों के बीच मतभेद और भी सामने आ जाते हैं. इजराइल-फिलिस्तीन विवाद पर रमाल्लाह से देखिए NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट.
फिलिस्तीन का रमाल्लाह शांत सा शहर लगता है. यह कॉस्मोपॉलिटन होने की वजह से गाजा से कुछ अलग है. रमाल्लाह को कुछ साल पहले दीवार बनाकर गाजा से अलग किया गया था. इजरायली सरकार ने सुरक्षा कारणों से ऐसा किया था. इस दीवार को लेकर दोनों पक्षों के बीच फिर से तनाव बढ़ा हुआ है, लेकिन अभी भी इजराइल और फिलिस्तीन की हाई टेक कंपनी के लोग मिलकर काम कर रहे हैं.
इजराइल-फिलिस्तीन के बीच मतभेद भले ही हो, लेकिन रमजान के महीने में रमाल्लाह में अमन का माहौल है. रमाल्लाह को लेकर धारणा रही है कि यह एक संघर्ष का पॉइंट है. लेकिन देखने पर यह किसी आम मोहल्ले जैसा ही दिखेगा. रमाल्लाह और गाजा दोनों की खासियतें भी अलग-अलग हैं.
बात करें अगर रमाल्लाह और गाजा के बीच दीवार की, तो इसे सुरक्षा कारणों से बनाया गया था. बमबारी और खून-खराबे की घटनाओं को नियंत्रित करने के इरादे से ऐसा किया गया था. ये दीवार इतनी मजबूत है कि दुश्मन भी इसे भेद नहीं सकता. इजराइल का दावा है कि इस दीवार के बनने के बाद से आतंकवादी वारदातों में कमी आई है. इजराइल को ये दीवार पांच दुश्मन देशों मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और फलस्तीन से सुरक्षित करती है.
इजराइल में 1994 में फेंसिंग का काम शुरू हुआ था. इसके लिए एक अरब डॉलर का बजट था, लेकिन दोगुना से ज्यादा पैसा खर्च हुआ. एक किमी पर 20 लाख डॉलर का खर्च आया. इससे आतंकी हमले 90% तक कम हो गए. इसके अलावा आर्मी पर होने वाला खर्च में भी बचत हुई. वहीं, गाजा पट्टी पर कंक्रीट की दीवार और फेंसिंग है. दीवार को जमीन से 8 फीट नीचे से बनाया गया है. दीवार की सुरक्षा के लिए इसे अत्याधुनिक सेंसरों, तकनीक और सीसीटीवी से भी जोड़ा गया है. इसके नीचे से सुरंग बनाना भी बहुत मुश्किल काम है.
इजराइल-फिलिस्तीन के बीच विवाद काफी पुराना है. जिसकी शुरुआत 1948 से मानी जाती है. तब से ही दोनों पक्ष समय समय पर लड़ते रहते हैं. ऐसा नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच शांति की कोशिश नहीं हुई है, लेकिन 2014 के बाद से दोनों देशों के बीच शांति वार्ता भी रुकी हुई है.
इजराइल में इस वक्त बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार है, जो अब तक की सबसे दक्षिणपंथी सरकार मानी जा रही है. मौजूदा वक्त में एक बार फिर इजराइल-फिलिस्तीन के बीच तनाव बढ़ गया है. लोगों के बीच झड़प के बाद हिंसा की कई घटनाएं हो रही हैं.
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Cuba's Parliament ratifies President Díaz-Canel for new term
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VIDEO: MP के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने खेली कबड्डी, छात्रों ने टांग खींचकर किया आउट
मध्य प्रदेश के मल्हारगढ़ विधानसभा के नारायणगढ़ में 'सांसद खेल महोत्सव' का आयोजन किया गया. बुधवार को कार्यक्रम में राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा शामिल हुए. इस दौरान वित्त मंत्री ने स्कूली छात्रों के साथ कबड्डी में दो हाथ आजमाए. 65 साल के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा को कबड्डी के खेल में छात्रों ने टांग खींचकर आउट कर दिया. इसके बाद टांग खिंचने वाले छात्र को वित्त मंत्री ने शाबाशी दी. मंत्री के कबड्डी खेलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
मध्य प्रदेश के मंदसौर संसदीय क्षेत्र की 8 विधानसभाओं में 95 स्थानों पर इन दिनों सांसद खेल महोत्सव चल रहा है. इसी कार्यक्रम के दौरान मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक और प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी नारायणगढ़ में बच्चों के साथ कबड्डी खेलते दिखाई दिए. हालांकि, जब वे अपनी बारी आने पर दूसरे पाले में गए, तो एक खिलाड़ी ने उनकी टांग खींच ली.
26 अप्रैल चलेगा आयोजन
रिपोर्ट के मुताबिक, यह आयोजन 26 अप्रैल चलेगा. खेल महोत्सव में पारंपरिक खेल खो-खो, कबड्डी, रस्सा कस्सी, मैराथन और सितौलिया जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी.
2 लाख छात्र-छात्राएं ले रहे हिस्सा
सांसद खेल महोत्सव में ढाई हजार स्कूलों के 2 लाख छात्र-छात्राएं शामिल होंगे. आयोजन का उद्देश्य देश के युवाओं में खेलों के प्रति जागृति लाना और एक स्वस्थ भारत का निर्माण करना है.
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ड्रग्स लेने वालों पर नहीं, तस्करों पर करें फोकस: NCB से बोले गृहमंत्री अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को उपभोक्ताओं को टार्गेट करने के बजाय मादक पदार्थों के तस्करों और कार्टेल पर नकेल कसने पर ध्यान देना चाहिए. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि नशा करने वाले पीड़ित होते हैं जिन्हें पुनर्वास की आवश्यकता होती है. अपराधीकरण की आवश्यकता नहीं होती है.
शाह ने कहा कि हमारा दृष्टिकोण साफ होना चाहिए कि जो ड्रग्स का सेवन करता है वह पीड़ित है और जो ड्रग्स का कारोबार करता है वह अपराधी है, और उनसे दृढ़ता से निपटने की आवश्यकता है. हमें पुनर्वास में उनकी मदद करनी चाहिए. जांच का फोकस ड्रग व्यापार के पीछे तस्करों और कार्टेलों पर होना चाहिए.
गृह मंत्री की टिप्पणी एनसीबी द्वारा आर्यन खान से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मामले को संभालने के विवाद के बाद आई है. आर्यन खान को अक्टूबर 2021 में एक क्रूज पार्टी पर छापे के दौरान गिरफ्तार किया गया था. इस मामले ने NCB के भीतर भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप सामने आए थे. इस केस के बाद एनसीबी की तरफ से आंतरिक जांच के लिए एक विशेष जांच दल का भी गठन किया गया था. जिसने मामले की जांच कर रही टीम द्वारा कई खामियां और "संदिग्ध व्यवहार" रेखांकित किया था. और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी. एजेंसी के लिए एक बड़ी शर्मिंदगी भरे फैसले में आर्यन खान को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था.
शाह ने कहा कि नशे ने न केवल युवा पीढ़ी को खोखला बनाया है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसके कई प्रतिकूल प्रभाव पड़े हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नार्को-टेररिज्म के जरिए ड्रग तस्कर देश की सीमा की सुरक्षा में सेंध लगा सकते हैं.उन्होंने कहा कि अगर 130 करोड़ भारतीय इसे एक साथ लड़ते हैं, तो हम इस लड़ाई को जीत लेंगे. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने आजादी के 100वें वर्ष 2047 तक देश को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है.
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भाई कहने वाले शख्स के धोखे का शिकार हुए मिस्टर बजाज, बोले- भाई, ब्रो...इन शब्दों का मतलब खत्म हो गया
टीवी अभिनेता रोनित रॉय ने खुलासा किया है कि भाई कहने वाले एक दोस्त ने उन्हें धोखा दिया है. इस बात का खुलासा रोनित रॉय ने सोशल मीडिया के जरिए किया है. रोनित रॉय सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वह अपने फैंस से जुड़े रहने के लिए अक्सर खास तस्वीरें और वीडियो शेयर करते रहते हैं. उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया है. जिसमें उन्होंने बताया है कि उन्हें उनके एक भाई ने धोखा दे दिया है.
रोनित रॉय ने अपने पोस्ट में बताया है कि एक शख्स ने उन्हें धोखा दिया है जो रोनित रॉय को भाई बोलता था. उन्होंने लिखा, 'भाई, ब्रो...इन शब्दों का तो अब असली मतलब की खत्म हो गया. जब कोई मुझे इन नामों से बुलाता है तो मैं इन्हें गंभीरता से ले लेता हूं. फिर वो मेरे साथ कुछ ऐसा करता है, जो मैं अपने दुश्मनों के साथ भी नहीं कर सकता. वो लोग गिर रहे हैं, मैं नहीं.' सोशल मीडिया पर रोनित रॉय का यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है.
अभिनेता के फैंस पोस्ट को पसंद कर रहे हैं. साथ ही कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. रोनित रॉय के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह आखिरी बार फिल्म शहजादा में नजर आए थे. इस फिल्म में रोनित रॉय के अलावा अभिनेता कार्तिक आर्यन और अभिनेत्री कृति सनोन मुख्य भूमिका में थी. यह फिल्म शहजादा 17 फरवरी को सिनेमाघरों में आई थी. लेकिन कुछ ही दिनों में फिल्म शहजादा बॉक्स ऑफिर पर फ्लॉप साबित हुई थी.
"मैं अहंकार नहीं रखती :" अपनी सफलता पर बोलते हुए प्रियंका चोपड़ा
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नोएडा प्रशासन ने रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक का कार्यालय किया सील
दिल्ली से सटे नोएडा में जिला प्रशासन ने जमीन, जायदाद के विकास से जुड़ी प्रमुख कंपनी सुपरटेक समूह के कार्यालय को सील कर दिया है. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. कंपनी ने प्रशासन की इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा कि जो कार्यालय सील किया गया है, वह सुपरटेक लिमिटेड का है जबकि बकाया वसूली का मामला सुपरटेक टाउनशिप से जुड़ा है. जिला प्रशासन ने समूह के सुपरटेक टाउनशिप से बकाया वसूलने के लिए हाल ही में कार्रवाई शुरू की थी.
अतिरिक्त जिला अधिकारी (वित्त/राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव ने पीटीआई-भाषा से कहा, “सुपरटेक का कार्यालय सील कर दिया गया है.” अधिकारियों के अनुसार, कार्यालय को सील करने की प्रक्रिया मंगलवार दोपहर दादरी के तहसीलदार की निगरानी में शुरू की गई थी. इस बीच, सुपरटेक समूह ने जिला प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की है.कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘अवैध कार्रवाई से उन घर खरीदारों को भारी परेशानी हुई है, जिन्हें अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए इस कार्यालय में आने की जरूरत है.''
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