Tuesday, March 5, 2024

सीट बंटवारे पर फंसा पेंच! शिंदे और अजित पवार के दावों के बीच कल अमित शाह का महाराष्‍ट्र दौरा

भाजपा (BJP) के मुख्य रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) मंगलवार को महाराष्‍ट्र के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान शाह सहयोगी दल शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के साथ मतभेद दूर करने की कोशिश करेंगे. शिंदे गुट 2019 की तरह ही महाराष्‍ट्र की 42 सीटों में से 22 सीटों की अपने लिए मांग कर रहा है, जिसने शिवसेना के तत्‍कालीन प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ टकराव पैदा कर दिया था. हालांकि पिछले कुछ सालों से राज्य में बड़े भाई की स्थिति का आनंद ले रही भाजपा इतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजित पवार गुट के शामिल होने से मामले में कोई सुधार नहीं हुआ है और वे 10 सीटों की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. 

सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से भाजपा 30 पर अपने उम्मीदवारों को उतारना चाहती है, जबकि शिवसेना को 12 सीटें और एनसीपी को छह सीटें मिल सकती हैं. हालांकि अभी तक सीट बंटवारे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है, क्‍योंकि सभी पार्टियां एक मत नहीं हैं. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए को 400 और भाजपा को अकेले 370 सीटों का टारगेट दिया है. भाजपा जानती है कि इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए महाराष्ट्र महत्‍वपूर्ण है. पार्टी को सहयोगियों को साथ लेकर चलते हुए सभी बदलावों और संयोजनों को संतुलित करना होगा. 

समस्या विदर्भ, उत्तरी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा क्षेत्रों की कुछ सीटों को लेकर है, जहां तीनों सहयोगी दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं. 

भाजपा और शिवसेना नेताओं के अलग-अलग बयान 

इसलिए समन्वय की जबरदस्‍त कमी के बीच भाजपा और शिवसेना नेताओं को पिछले हफ्ते राज्य की दो महत्वपूर्ण सीटों - अमरावती और रत्नागिरी सिंधुदुर्ग (विदर्भ, कोकण क्षेत्र) में आमने-सामने होना पड़ा, जहां शिवसेना के पूर्व सांसद आनंद राव अडसुल ने अमरावती से दावा ठोका है, वहीं बीजेपी इस सीट से मौजूदा सांसद नवनीत राणा को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है.

केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के एक बयान ने शिवसेना के खेमे में बेचैनी को और बढ़ा दिया है. राणे ने कहा है कि भाजपा रत्‍नागिरी सिंधुदुर्ग सीट से चुनाव लड़ेगी. पूर्व कांग्रेसी राणे ने 2019 में भाजपा में अपने महाराष्‍ट्र स्‍वाभिमान पक्ष का विलय कर दिया था. 

भाजपा भी अमरावती की मौजूदा निर्दलीय सांसद नवनीत राणा के समर्थन में सामने आई है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी. भाजपा के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा, ''नवनीत राणा हमारी सहयोगी सदस्य हैं, उन्होंने पिछले पांच वर्षों में एनडीए का समर्थन किया है, इसलिए वह हमारे साथ रहेंगी.''

इस बीच, शिवसेना के पूर्व सांसद आनंद राव अडसुल ने ऑन रिकॉर्ड कहा, "शिवसेना-बीजेपी गठबंधन में यह सीट हमारी है, इसमें कोई सवाल नहीं है. इस सीट पर केवल शिवसेना ही चुनाव लड़ेगी."

सीट बंटवारे को लेकर पहली बैठक कल 

एनसीपी की चाही गई लिस्‍ट में कुछ सीटें ऐसी हैं, जहां से भाजपा या शिवसेना के सांसद हैं. इस मामले में माधा और गढ़चिरौली (भाजपा) और बुलढाणा, हिंडोली (शिंदे गुट) शामिल हैं. 

एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि भाजपा 30 सीटें चाहती हैं और कल की बैठक में अपने विचार रखेगी. उन्होंने कहा, "कल होने वाली बैठक सीट बंटवारे को लेकर पहली बैठक होगी. बैठक में अमित शाह, देवेंद्र फड़णवीस, अजित पवार और एकनाथ शिंदे मौजूद रहेंगे."

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"जाओ सोनिया गांधी से कह दो..." : पंजाब विधानसभा में हंगामे के बीच ऐसा क्यों बोले CM भगवंत मान?

पंजाब विधानसभा (Punjab Assembly) में सोमवार को बजट पेश किए जाने के दौरान काफी हंगामा हुआ. विपक्ष की ओर से राज्यपाल के अभिभाषण को बाधित करने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Mann) ने विधानसभा में अपना आपा खो दिया. भगवंत मान की पंजाब कांग्रेस के नेता और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा (Partap Singh Bajwa) के साथ तीखी बहस हुई. भगवंत मान ने बाजवा पर बरसते हुए सीट शेयरिंग समझौता खत्म करने की बात कह डाली. मान ने बाजवा से कहा, "जाओ और सोनिया और राहुल गांधी से कहो कि वे हमारे लिए कुरुक्षेत्र, दिल्ली और गुजरात की लोकसभा सीटें न दें."

भगवंत मान की ओर से स्पीकर कुलतार सिंह संधवान को 'एक ताला और चाबी' सौंपने के बाद विधानसभा में बेकाबू सीन देखने को मिला. संधवान से विपक्ष को सदन के अंदर बंद करने के लिए कहा गया, ताकि वे चर्चा के दौरान बाहर न निकलें. ऐसा तब हुआ जब स्पीकर ने AAP विधायकों के अनुरोध पर सत्र की शुरुआत में 'प्रश्नकाल' और 'शून्यकाल' लेने की प्रथा से हटकर राज्यपाल के अभिभाषण में व्यवधान पर चर्चा की अनुमति दी.

CM भगवंत मान के हस्तक्षेप से भारत सरकार और किसानों के बीच विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनी 

आपा खोते हुए पंजाब के सीएम भगवंत मान ने प्रताप सिंह बाजवा से कहा, "राहुल गांधी और सोनिया गांधी किसके साथ बैठते हैं? मेरे साथ. क्या आप कभी उनके साथ बैठे हैं?" मान ने कहा, "एक तरफ आप हमारे साथ (सीट बंटवारे पर) समझौता कर रहे हैं. दूसरी तरफ ये सब... जाओ और उनसे (सोनिया और राहुल गांधी) से कहो कि वे हमारे लिए कुरुक्षेत्र, दिल्ली और गुजरात (लोकसभा) सीटें न दें." मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता का मजाक उड़ाते हुए उन्हें याद दिलाया कि कैसे कई वरिष्ठ नेता सबसे पुरानी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. 


    
दूसरी तरफ, बाजवा ने आरोप लगाया कि सीएम भगवंत मान ने सभी के लिए अनुचित शब्दों का इस्तेमाल किया. बाजवा ने कहा, "सीएम भगवंत मान ने कहा कि कांग्रेस सुनना नहीं जानती, इसलिए विधानसभा के दरवाजे अंदर से बंद कर लेने चाहिए. क्या हम मजदूर हैं? हमने इतना कमजोर वक्ता नहीं देखा." विपक्ष के नेता और कांग्रेस सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने मान से कहा कि वे नहीं भागेंगे. हालांकि, मान लगातार कहते रहे कि विपक्षी विधायक चले जाएंगे. 

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इस बीच अध्यक्ष ने कहा कि सदन के दरवाज़े पर ताला लगाने का मुद्दा सांकेतिक है, ताकि सदन में चर्चा की जा सके. सत्ता पक्ष के सदस्यों और कांग्रेसी विधायकों के बीच तीखी तकरार के बीच सदन को कुछ देर के लिए स्थगित भी करना पड़ा. सदन स्थगित होने के बाद बाजवा ने कुछ टिप्पणी की. इसके चलते सत्तारूढ़ AAP के सदस्य विपक्षी मेजों की ओर आ गए. नौबत हाथापाई तक पहुंच गई.

इस हंगामे के बीच राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने अपना संबोधन छोटा कर दिया था. उन्होंने कुछ पंक्तियां पढ़ीं और सदन से कहा कि इसका बाकी हिस्सा पढ़ा हुआ समझा जाए.
 

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Monday, March 4, 2024

"भाजपा को शर्म आनी चाहिए..." AIDMK ने BJP पर एमजीआर, जयललिता की विरासत को हड़पने का प्रयास का लगाया आरोप

तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)पर अपने दिवंगत नेताओं, एम जी रामचंद्रन और जे जयललिता की विरासत को ‘‘हड़पने'' की ''घटिया राजनीति'' करने का आरोप लगाया. भाजपा की पुडुचेरी इकाई द्वारा सोशल मीडिया पर अपने अभियान में एमजीआर और जयललिता की तस्वीरों के कथित इस्तेमाल के बारे में पूछे जाने पर अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता डी जयकुमार ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में उनकी पार्टी के नेता पहले ही इसकी निंदा कर चुके हैं.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अन्नाद्रमुक के दिग्गज नेताओं की विरासत को ‘‘हड़पने'' का कृत्य ''घटिया राजनीति है और यह निंदनीय है.'' उन्होंने आरोप लगाया, 'भाजपा को शर्म आनी चाहिए. क्या भाजपा को थोड़ी भी शर्म नहीं है? यह एक ऐसी पार्टी है जिसमें कोई शर्म नहीं है. आपने (भाजपा) हमारे नेताओं की विरासत का उपयोग क्यों किया है? यह दर्शाता है कि आपको अपनी पार्टी के नेताओं पर कोई भरोसा नहीं है.''

जयकुमार ने कहा, ‘‘अगर भाजपा का लक्ष्य अन्नाद्रमुक के दिग्गज नेताओं - दिवंगत मुख्यमंत्रियों एम जी रामचंद्रन और 'अम्मा' जयललिता - की विरासत को हथियाकर वोट पाने के लिए लोगों को 'धोखा' देना है, तो ऐसा नहीं होने वाला है, क्योंकि ये दिग्गज केवल अन्नाद्रमुक के ही हैं.' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु में अपनी हालिया रैलियों में एमजीआर के साथ-साथ जयललिता की विरासत का भी जिक्र किया था. अन्नाद्रमुक ने पिछले साल भाजपा से अपना नाता तोड़ लिया था.

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ओडिशा में BJD और BJP ने एक-दूसरे पर गठबंधन की अफवाह उड़ाने का लगाया आरोप

ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजद और विपक्षी भाजपा ने एक-दूसरे पर 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन के बारे में अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया है, जिससे राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल ने स्पष्ट किया कि बीजू जनता दल (बीजद) के साथ गठबंधन की कोई संभावना नहीं है. पार्टी के चुनाव प्रभारी विजय पाल सिंह तोमर ने बीजद पर ऐसी अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया.

बीजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता सस्मित पात्रा ने आरोप का खंडन करते हुए दावा किया कि भाजपा ने ही गठबंधन की अफवाह शुरू की. पात्रा ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, 'भाजपा गठबंधन की अफवाह फैला रही है. वास्तव में, बीजद को किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह जनता के आशीर्वाद से बहुत मजबूत है.' उन्होंने कहा, ''हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वे (भाजपा नेता) ऐसी अफवाहें क्यों फैला रहे हैं.''

पात्रा ने नवीन पटनायक के छठी बार मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद जताते हुए कहा कि बीजद का लक्ष्य राज्य विधानसभा और लोकसभा चुनाव दोनों में अच्छी खासी संख्या में सीटें जीतना है. उन्होंने कहा कि बीजद को 2024 के चुनावों में 147 में से 120 विधानसभा सीट और 21 में से 17 लोकसभा सीट जीतने की उम्मीद है. पात्रा ने कहा, 'पटनायक रिकॉर्ड छठी बार ओडिशा के मुख्यमंत्री बनेंगे.'

दूसरी ओर, तोमर ने राष्ट्रीय स्तर पर बीजद के साथ गठबंधन की किसी भी चर्चा से इनकार किया. उन्होंने दावा किया कि बीजद ने ही गठबंधन का विचार रखा था. तोमर ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में क्या चर्चा हुई क्योंकि मैं बोर्ड का सदस्य नहीं हूं. जहां तक ​​ओडिशा का सवाल है, विधानसभा चुनावों के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई.' सामल ने भी विश्वास जताया कि भाजपा सभी 21 लोकसभा सीट जीतेगी और ओडिशा में भी सरकार बनाएगी.

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Sunday, March 3, 2024

"उनका मकसद ही मेरा रेप करना था...", स्पेनिश महिला ने झारखंड में गैंगरेप का लगाया आरोप

झारखंड के दुमका जिले में स्पेन की एक महिला से कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है.
पुलिस ने शनिवार को बताया कि इस घटना के संबंध में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है. घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है. यह घटना राज्य की राजधानी रांची से करीब 300 किलोमीटर दूर हंसडीहा थाना क्षेत्र के कुरुमाहाट में शुक्रवार रात तब हुई जब स्पेन का एक पर्यटक जोड़ा एक अस्थायी टेंट में रात्रि विश्राम कर रहा था. स्पेन की महिला ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में घटना को लेकर लिखा है कि हमारे साथ कुछ ऐसा हुआ है कि जो कभी किसी के साथ न हो. सात लोगों ने मेरे साथ बलात्कार किया है. 

बांग्लादेश से दुमका पहुंचे थे दोनों पीड़ित
यह युगल दुपहिया वाहन से बांग्लादेश से दुमका पहुंचा और वह बिहार से होते हुए नेपाल जाना चाहता था. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘मामले की जांच की जा रही है और फॉरेंसिक दलों ने घटनास्थल का दौरा किया है. इस घटना के संबंध में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए एक तलाश अभियान शुरू किया गया है.'' उन्होंने कहा, ‘‘एक एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया गया है और सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.''

अधिकारियों ने क्या कहा? 
अधिकारी ने बताया कि पीड़िता को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दुमका के पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 11 बजे हंसडीहा पुलिस गश्त दल को सड़क किनारे दो लोग मिले. उन्होंने बताया, ‘‘गश्त दल ने यह भांप लिया कि उनके साथ कुछ हुआ है. चूंकि वे स्पेनिश भाषा बोल रहे थे तो पुलिस समझ नहीं पायी कि वे क्या कह रहे हैं. हालांकि, पुलिसकर्मी उन्हें यह मानकर एक स्थानीय अस्पताल लेकर गए कि उन्हें कुछ इलाज की जरूरत है.''

स्पेनिश युगल ने डॉक्टरों को यौन शोषण की घटना के बारे में बताया
अधिकारियों ने कहा कि स्पेनिश युगल ने डॉक्टरों को यौन शोषण की घटना के बारे में बताया. पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे घटना के बारे में सूचित किया गया. हमें सूचना मिलने के तुरंत बाद जांच शुरू की गयी. हमने पीड़िता से बात की. इसके बार हमने कुछ लोगों को हिरासत में लिया और पूछताछ के दौरान उन्होंने अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है. आरोपियों ने कुछ और नाम भी लिए. हमने एक दल गठित किया है और अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है. हम इस संबंध में एक फॉरेंसिक दल और सीआईडी की मदद भी ले रहे हैं.''

महिला और उसके पति का ईलाज जारी है
दुमका के सिविल सर्जन बच्चा प्रसाद सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि करीब 28 साल की महिला और उसके 64 वर्षीय पति का इलाज दुमका के फुलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किया जा रहा है. अधिकारी ने कहा कि वे पुलिस सुरक्षा के साथ लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय करके सरैयाहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मोटरसाइकिल पर पहुंचे थे. सिविल सर्जन ने कहा, 'दोनों खतरे से बाहर हैं और अस्पताल में इलाज किया जा रहा है. व्यक्ति को मामूली चोट आई हैं. एक मेडिकल बोर्ड पीड़िता की चिकित्सा जांच करेगा, जिसमें मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉक्टर अनुपूरण पूर्ति की अध्यक्षता में तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ और एक दंत चिकित्सक शामिल होगा.”

7-8 की संख्या में शामिल थे लोग
इस बीच, एक अन्य अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कहा कि घटना में सात से आठ स्थानीय युवक शामिल थे. अधिकारी ने कहा कि अपराधियों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. झारखंड भाजपा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पुलिस पर ढिलाई का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा, 'जब विदेशियों के साथ ऐसी घटनाएं होंगी, तो कौन झारखंड आना चाहेगा? यहां कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है. पुलिस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.'

झारखंड विधानसभा में उठा मामला
यह मुद्दा शनिवार को झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के समापन दिवस के दौरान उठाया गया. भाजपा विधायक अमित मंडल ने विधानसभा में यह मामला उठाते हुए दुमका के एसपी को तत्काल निलंबित करने और जांच समिति गठित करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया, ''इस घटना ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश को शर्मिंदा किया है... दोषियों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है.'' घटना की निंदा करते हुए राज्य के मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है. अपराध में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.' कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने विधानसभा के बाहर कहा, 'यह बहुत दुखद स्थिति है और सभी के लिए शर्मिंदगी की बात है. हमारी सरकार उन लोगों को नहीं छोड़ेगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.'  

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सदन में वोट के बदले नोट मामला : SC की 7 जजों की संविधान पीठ सोमवार को सुनाएगी अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की सात जजों की संविधान पीठ सोमवार को सदन में वोट के बदले नोट मामले में अहम फैसला सुनाएगी. सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि सदन में वोट के लिए रिश्वत में शामिल सांसदों/विधायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से छूट दी जाए या नहीं.  इस मामले में CJI डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जेबी पारदीवाला, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच फैसला सुनाएगी. 5 अक्टूबर 2023 को सात जजों की संविधान पीठ ने दो दिनों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. 

इससे पहले, पिछले साल 20 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया था. सदन में वोट के लिए रिश्वत में शामिल सांसदों/विधायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से छूट पर फिर से विचार करने को सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया था. 

पांच जजों की संविधान पीठ ने 1998 के पी वी नरसिम्हा राव मामले में अपने फैसले पर फिर से विचार करने का फैसला लिया था. इस मामले को सात जजों के संविधान पीठ को भेजा था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह राजनीति की नैतिकता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण मुद्दा है. 

कोर्ट यह तय करेगा कि अगर सांसद या विधायक सदन में मतदान के लिए रिश्वत लेते हैं तो क्या तब भी उस पर मुकदमा नहीं चलेगा? 1998 का नरसिम्हा राव फैसला सांसदों को मुकदमे से छूट देता है. 

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने छूट निर्धारित करने के लिए एक कार्यात्मक परीक्षण का सुझाव दिया और कहा कि यह परिणाम के डर के बिना, एक विधायक/ सासंद के कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए आवश्यक बोलने या मतदान के कार्यों तक विस्तारित हो सकता है. दरअसल अनुच्छेद 105(2) संसद सदस्यों (सांसदों) को संसद या किसी संसदीय समिति में उनके द्वारा कही गई किसी भी बात या दिए गए वोट के संबंध में अभियोजन से छूट प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद 194(2) विधान सभा सदस्यों (विधायकों) को समान सुरक्षा प्रदान करता है. 

अपराधिक कार्य में भी विशेषाधिकार काम करेगा? : CJI

इससे पहले  CJI जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि किसी अपराधिक कार्य में भी क्या सदन में विशेषाधिकार का कवच काम करेगा? क्या हमें कानून के दुरुपयोग की आशंका पर राजनीतिक भ्रष्टाचार को छूट देनी चाहिए? क्योंकि कानून के दुरुपयोग की आशंका अदालत से सुरक्षा के लिए उत्तरदायी होती है. हम सिर्फ इस बेहद महीन मुद्दे पर विचार करेंगे कि जब मामला आपराधिक कृत्य का हो तब भी विशेषाधिकार का संरक्षण मिलेगा या नहीं क्योंकि कानून और उसके तहत संरक्षण के प्रावधानों का इस्तेमाल राजनीतिक भ्रष्टाचार के लिए नहीं किया जा सकता है. 

CJI ने कहा कि घूसखोरी के मुद्दे को थोड़ी देर के लिए भूल भी जाएं तो सवाल है. मान लीजिए किसी ने सांसद पर कोई मुकदमा कर दे कि उसने सदन में किसी अहम मुद्दे पर चुप्पी साध ली. ऐसे में विशेषाधिकार की बात जायज है. 

जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि हम संवैधानिक प्रावधान और उसके इस्तेमाल के बीच संतुलन बनाने के नजरिए से इस मामले में सुनवाई कर रहे हैं. 

वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पीवी नरसिम्हा राव मामले में समुचित तार्किक और मजबूत फैसला दे रखा है. उससे सारी चीजें स्पष्ट हैं. 

CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि कोई अदालत किसी से ये नहीं कहेगी कि आपने भाषण में ये या वो बात क्यों बोली? या आपने किसी खास को ही वोट क्यों डाला? राजनीतिक नैतिकता संविधान के अनुच्छेद 10 से निर्देशित होती है. 

वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रिश्वत खोरी के तथ्य सामने आने के बाद इसमें अपराधिक पहलू आया है. सदन में सदस्य को ज्यादा आजादी रहेगी. इस पर CJI ने कहा कि हम इस पहलू पर नहीं जा रहे हैं. हम राजाराम पाल वाले फैसले पर पुनर्विचार नहीं करेंगे. हमारा मानना है कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी पर कोई शिकंजा नहीं होना चाहिए. 

JMM सांसदों के रिश्‍वत मामले पर नए सिरे से जांच  

सितंबर 2023 में CJI चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 5-जे बेंच ने कहा था कि पीठ झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसदों के रिश्वत मामले में फैसले की नए सिरे से जांच करेगी. इसमें 1993 में राव सरकार के खिलाफ विश्वास प्रस्ताव के दौरान सांसदों ने कथित तौर पर किसी को हराने के लिए रिश्वत ली थी. 

CJI ने कहा था कि विधायिका के सदस्यों को परिणामों के डर के बिना सदन के पटल पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए. जबकि अनुच्छेद 19(1)(ए) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के व्यक्तिगत अधिकार को मान्यता देता है. 105(2) और 194(2) का उद्देश्य प्रथम दृष्टया आपराधिक कानून के उल्लंघन के लिए दंडात्मक कार्यवाही शुरू करने से प्रतिरक्षा प्रदान करना नहीं लगता है, जो संसद के सदस्य के रूप में अधिकारों और कर्तव्यों के प्रयोग से स्वतंत्र रूप से उत्पन्न हो सकता है. ऐसे मामले में छूट केवल तभी उपलब्ध होगी जब दिया गया भाषण या दिया गया वोट देनदारी को जन्म देने वाली कार्यवाही के लिए कार्रवाई के कारण का एक आवश्यक और अभिन्न अंग है. 

यह मामला सीता सोरेन बनाम भारत संघ है. ये मामला जनप्रतिनिधि की रिश्वतखोरी से संबंधित है. इस मामले के तार नरसिंहराव केस से जुड़े हैं जहां सांसदों ने वोट के बदले नोट लिए थे. यह मसला अनुच्छेद 194 के प्रावधान 2 से जुड़ा है, जहां जन प्रतिनिधि को उनके सदन में डाले वोट के लिए रिश्वत लेने पर मुकदमे में घसीटा नहीं जा सकता है, उन्हें छूट दी गई है. इस मामले में याचिकाकर्ता सीता सोरेन झारखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भाभी हैं और उस समय हुए वोट के लिए नोट लेने की आरोपी भी. सीता के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की गुहार लगाते हुए 2012 में निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी. सीता सोरेन को जन सेवक के तौर पर गलत काम करने के साथ आपराधिक साजिश रच कर जन सेवक की गरिमा घटाने वाला काम करने का आरोपी बनाया गया था. झारखंड हाईकोर्ट ने 2014 में केस रद्द कर दिया था. तब हाईकोर्ट ने कहा कि सीता ने उस पाले में वोट नहीं किया था जिसके बारे में रिश्वत की बात कही जा रही है. 

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"कोई इंसाफ का इंतजार करते-करते मर जाए, ये ठीक नहीं" : CJI डी वाई चंद्रचूड़

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि देश की न्यायिक प्रणाली में ‘स्थगन का चलन' वादियों की पीड़ा को बढ़ाता है और अदालतों को मामलों पर फैसले सुनाने के लिए नागरिकों के मरने का इंतजार नहीं करना चाहिए. उन्होंने ये भी चिंता जताई कि ‘जमानत नियम है, जेल अपवाद है' का दीर्घकालिक सिद्धांत कमजोर हो रहा है, क्योंकि जिला अदालतें व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों से निपटने में झिझक रही हैं.

गुजरात के कच्छ जिले के धोर्डो में अखिल भारतीय जिला न्यायाधीशों के सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण में, प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि लंबित मामले न्याय के कुशल प्रशासन के लिए ‘एक गंभीर चुनौती' पेश करते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘एक बड़ा मुद्दा स्थगन का चलन है. कार्यवाही में देरी के लिए बार-बार अनुरोध करने के इस चलन का हमारी कानून प्रणाली की दक्षता और अखंडता पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है.''

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘स्थगन के चलन के बारे में आम लोगों का मानना ​​है कि यह न्यायिक प्रणाली का हिस्सा बन गया है. ये वादियों की पीड़ा को बढ़ा सकती है और मामलों के लंबित रहने के चक्र को कायम रख सकती है.''

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने एक किसान के कानूनी उत्तराधिकारियों के कानूनी कार्यवाही में उलझने के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा, ‘‘हमें अपने नागरिकों के मामले के फैसले के लिए उनके मरने का इंतजार नहीं करना चाहिए.''

उन्होंने कहा कि मामलों के लंबित पड़ने की समस्या को दूर करने के लिए प्रणालीगत सुधार, प्रक्रियात्मक सुधार और प्रौद्योगिकी के उपयोग को शामिल करते हुए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है.

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अदालती प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, मामले के निस्तारण में तेजी लाने और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को बढ़ावा देने में जिला न्यायाधीश की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि ऐसी आशंका बढ़ रही है कि जिला अदालतें व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों पर विचार करने को अनिच्छुक होती जा रही हैं.

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘लंबे समय से मौजूद यह सिद्धांत कि ‘जमानत नियम है, जेल अपवाद है' कमजोर पड़ता दिख रहा है, जैसा कि निचली अदालतों द्वारा जमानत याचिका खारिज किये जाने के खिलाफ अपील के रूप में उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय तक पहुंचने वाले मामलों की बढ़ती संख्या से पता चलता है.'' उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति गहन पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता बताती है.

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जिला न्यायपालिका, न्याय प्रणाली और स्थानीय समुदायों के बीच एक प्राथमिक मंच के रूप में काम करती है और इसे लगातार अपने कामकाज को बेहतर बनाना चाहिए ताकि न्यायपालिका में लोगों का विश्वास बना रहे.

उन्होंने यह भी कहा कि जिला न्यायपालिका में न्यायाधीशों को अदालती कार्यवाही और निर्णयों में उपयोग की जाने वाली भाषा के प्रति सचेत रहना चाहिए.

सीजेआई ने कहा कि न्यायाधीशों को सोशल मीडिया पर आलोचना और टिप्पणी से बेवजह प्रभावित नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘एक न्यायाधीश की भूमिका बाहरी दबाव या सार्वजनिक राय से प्रभावित हुए बिना निष्पक्ष रूप से न्याय प्रदान करने की है.''
 



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उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती के बाद एक और परीक्षा रद्द, सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 11 फरवरी 2024 को आयोजित समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा, 2023 की शनिवार को समीक्षा की गई. इस परीक्षा में कथित रूप से प्रश्न पत्र के कतिपय प्रश्नों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के शिकायतें प्राप्त हुई थीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा के बाद परीक्षा को रद्द करने का आदेश दिया है. 

सरकार को उपलब्ध कराए गये साक्ष्यों तथा आयोग द्वारा उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि लोक सेवा आयोग द्वारा 11 फरवरी को आयोजित समीक्षा अधिकारी / सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा 2023 की दोनों सत्रों की परीक्षाओं को निरस्त कर दिया जाए. इसकी परीक्षा आगामी 06 माह में पुनः कराई जाए.

 मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि इस प्रकार के आपराधिक कृत्य में सम्मिलित व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी वैधानिक व दण्डात्मक कार्यवाही करने हेतु यह प्रकरण राज्य की एसटीएफ को संदर्भित कर दिया जाए. एस.टी.एफ. शीघ्रातिशीघ्र इसकी विवेचना संपन्न करेगी तथा इस कृत्य में लिप्त सभी उत्तरदायी व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

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Saturday, March 2, 2024

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लेकर AAP और कांग्रेस सरकार में तनातनी, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लेकर AAP और कांग्रेस सरकार में तनातनी बढ़ती दिख रही है. पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर में ब्रिटिश निर्मित शानन हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना को लेकर याचिका दाखिल की है. इसमें 99 साल की लीज खत्म होने पर हिमाचल सरकार को प्रोजेक्ट के टेकओवर करने पर रोक लगाने की मांग की गई है. पंजाब के AAG शादान फरासत ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है.

CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने जल्द सुनवाई का भरोसा देते हुए कहा कि अगले हफ्ते इस मामले की सुनवाई करेंगे. राजनीतिक रूप से संवेदनशील अंतर-राज्य विवाद को उठाते हुए पंजाब की भगवंत मान सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. कांग्रेस के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार को प्रोजेक्ट की 99 साल की लीज खत्म होने  पर परियोजना को संभालने से रोकने का निर्देश देने की मांग की है. ये याचिका संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत किया गया है, जिस पर केवल SC ही सुनवाई कर सकता है.

पंजाब सरकार ने सूट में कहा है कि कि लीज की समाप्ति अप्रासंगिक है, क्योंकि परियोजना का रखरखाव और नवीनीकरण राज्य द्वारा अपने स्वयं के पैसे से किया गया है ताकि इसकी क्षमता 48 से 110 मेगावाट तक बढ़ाई जा सके. इसके अलावा, यह दलील दी गई है कि शानन परियोजना के बदले में, पंजाब ने हिमाचल प्रदेश के लिए 100 मेगावाट की बस्सी जलविद्युत परियोजना का निर्माण किया था. पंजाब ने हिमाचल पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से बिजलीघर पर कब्जा करने का इरादा रखने का आरोप लगाया है. याचिका में कहा गया है कि इससे पहले चार मौकों पर, 2 मार्च को समाप्त होने वाली लीज के अस्तित्व के दौरान, सिविल अदालतों ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को परियोजना का मालिक होने का फैसला सुनाया था.

इस परियोजना को उहल नदी जलविद्युत परियोजना के रूप में भी जाना जाता है. इसकी अनुमानित लागत 1,600 करोड़ रुपये है और वर्तमान में यह 110 मेगावाट बिजली पैदा करती है. जब इसका निर्माण 1932 में किया गया था, तब इसकी स्थापित क्षमता 48 मेगावाट थी. इसे बाद में 1982 में पंजाब सरकार ने बढ़ा दिया था.1966 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद, शानन परियोजना पंजाब को दे दी गई क्योंकि 99 साल का लीज समझौता खत्म  नहीं हुआ था. दिलचस्प बात ये है कि 1932 में शुरू की गई शानन परियोजना, मेगावाट क्षमता में भारत का पहला पनबिजली स्टेशन है. इसका निर्माण 3 मार्च, 1925 को मंडी राज्य के शासक जोगिंदर सेन और ब्रिटिश प्रतिनिधि कर्नल बीसी बट्टे के बीच 99 साल की लीज के तहत  हुआ था. यह वर्तमान में पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के नियंत्रण में है.

परियोजना से पूरा राजस्व पंजाब को मिलता है..वहीं चूंकि लीज खत्म हो रही है, हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार परियोजना पर नियंत्रण हासिल करने के लिए लीज को आगे नवीनीकृत नहीं कराना चाहती. राजनीतिक रूप से संवेदनशील यह मुद्दा आम चुनाव से पहले भारतीय गठबंधन के AAP और कांग्रेस के बीच दरार पैदा कर सकता है. जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही सुक्खू शानन परियोजना को तुरंत हिमाचल प्रदेश में ट्रांसफर करने की मांग कर रहा है.

हिमाचल सरकार ने प्रोजेक्ट के खराब रखरखाव, इमारतों की मरम्मत बंद करने और ढुलाई मार्ग ट्रॉली सेवा के खराब रखरखाव का आरोप लगाया.सरकार ने पहले कहा था कि 1966 में राज्य पुनर्गठन के दौरान HP  के साथ अन्याय किया गया था. चूंकि परियोजना हिमाचल  क्षेत्र के भीतर स्थित है, इसलिए इसे HP को दिया जाना चाहिए. जब परियोजना पंजाब को दी गई, उस समय हिमाचल एक केंद्र शासित प्रदेश था.



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Google ने शुल्क विवाद को लेकर भारतीय मैट्रिमोनी ऐप्स को Play Store से हटाया

Google ने शुक्रवार को भारत में 10 कंपनियों के ऐप्स के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए इन्‍हें गूगल प्‍ले स्‍टोर से हटाना शुरू कर दिया है. Google ने सेवा शुल्‍क भुगतान विवाद के बाद यह कदम उठाया है. हटाए जाने वाले एप्‍स में भारत मैट्रिमोनी जैसे कुछ लोकप्रिय मैट्रिमोनी ऐप्स भी शामिल हैं, जिसके बाद स्टार्टअप फर्मों के साथ टकराव की आशंका जताई जा रही है. गूगल के इस कदम को लेकर कुछ भारतीय कंपनियों के संस्‍थापकों ने काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. Matrimony.com के संस्थापक ने गूगल के कदम को "भारतीय इंटरनेट का काला दिन" बताया है. 

रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, यह विवाद कुछ भारतीय स्टार्टअप्स के Google को ऐप भुगतान पर 11 से 26 फीसदी शुल्क लगाने से रोकने की कोशिश को लेकर है. शुल्‍क की पुरानी प्रणाली में यह फीस 30 फीसदी तक थी. Google को जनवरी और फरवरी में दो अदालती फैसलों के बाद शुल्क वसूलने या ऐप्स हटाने की अनुमति मिल गई थी.  

Matrimony.com के डेटिंग ऐप्स भारत मैट्रिमोनी, क्रिश्चियन मैट्रिमोनी, मुस्लिम मैट्रिमोनी और Jodii को शुक्रवार को हटा दिया गया. Matrimony.com के संस्‍थापक मुरुगावेल जानकीरमन ने इस कदम को "भारतीय इंटरनेट का काला दिन" बताया. उन्‍होंने कहा, "हमारे ऐप्स एक-एक करके डिलीट होते जा रहे हैं."

Alphabet Inc की एक यूनिट ने भारतमैट्रिमोनी ऐप का संचालन करने वाली भारतीय कंपनी Matrimony.com और जीवनासाथी एप चलाने वाली Info Edge को प्ले स्टोर उल्लंघन के नोटिस भेजे हैं. दोनों कंपनियां नोटिस की समीक्षा कर रही हैं और इसके बाद अगले कदम पर विचार करेंगी. उनके अधिकारियों ने इस बारे में रॉयटर्स को बताया है. 

सिंघल ने की ईस्‍ट इंडिया कंपनी से की तुलना 

स्‍टेज एप के सीईओ और सह संस्‍थापक विनय सिंघल ने एक एक्‍स पोस्‍ट में लिखा, "एक ऐसी कंपनी के लिए जिसका आदर्श वाक्य था - बुरा मत बनो, Google इस समय सभी बुरी चीजें कर रहा है. STAGE ऐप को आज कुछ घंटों के नोटिस पर Google Plays Store से हटा दिया गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि हमने ऐप के अंदर केवल उनके बिलिंग सिस्टम को अनुमति देने की उनकी एकाधिकारवादी नीति को मानने से इनकार कर दिया."

उन्‍होंने लिखा, "हम सभी ने पढ़ा है कि कैसे करीब 400 साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने हमारे देश पर कब्जा कर लिया था, जब यह हो रहा था (और शायद 100 गुना अधिक) तो ऐसा ही महसूस हुआ होगा. 

उन्‍होंने लिखा, "Google ने CCI के सीधे आदेश की भी परवाह नहीं की, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि वे डेवलपर्स को तीसरे पक्ष के बिलिंग सिस्टम का उपयोग करने से प्रतिबंधित न करें. संदेश बड़ा और स्पष्ट है  - हम आपके लिए बहुत बड़े हैं और इस देश के कानून हम पर लागू नहीं होते."

साथ ही उन्‍होंने पीएम नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा, "हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया को इतनी बड़ी सफलता बनाने के लिए इतना प्रयास करते हैं, अगर Google जैसी डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनियां इस तरह से भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म कर दें तो इसका क्या मतलब है." 

प्रतिक्रिया रणनीतिक होनी चाहिए : बिखचंदानी 

Info Edge के संस्‍थापक संजीव बिखचंदानी ने अपनी एक एक्‍स पोस्‍ट में लिखा, "भारतीय कंपनियां इसका पालन करेंगी - अभी के लिए. लेकिन भारत को एक ऐप स्टोर/प्ले स्टोर की जरूरत है, जो डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा हो - जैसे यूपीआई और ओएनडीसी. प्रतिक्रिया रणनीतिक होनी चाहिए @पीयूष गोयल."

इस मामले में गूगल ने दिया स्‍पष्‍टीकरण 

Google ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि 10 भारतीय कंपनियों ने "Google Play से प्राप्त होने वाले अपार मूल्य" के लिए भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया है. कंपनी ने कहा, "वर्षों से किसी भी अदालत या नियामक ने Google Play के शुल्क लेने के अधिकार से इनकार नहीं किया है." साथ ही कहा कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी उसके ऐसा करने के अधिकार में "हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था."

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'अमेरिका में दोस्‍त को गोली मार दी गई' : टीवी अभिनेत्री ने PM मोदी से मांगी मदद

टेलीविजन अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) ने मंगलवार को अमेरिका में अपने दोस्त की गोली मारकर हत्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है. भट्टाचार्जी ने कहा कि अमेरिका में उनका दोस्त शाम को टहल रहा था, जब "उसे एक अज्ञात (व्यक्ति) ने कई बार गोली मारी." उनकी यह पोस्‍ट ऐसे वक्‍त में आई है, जब हाल के महीनों में भारतीयों या भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं. 

भट्टाचार्जी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मेरे दोस्त अमरनाथ घोष की मंगलवार शाम को अमेरिका के सेंट लुइस एकेडमी के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई."

उन्होंने कहा कि अमरनाथ घोष "परिवार में इकलौते थे, उनकी मां का 3 साल पहले निधन हो गया था और पिता बचपन में ही गुजर गए थे."

उन्‍होंने लिखा, "आरोपी की डिटेल और सब कुछ अभी तक सामने नहीं आया है या शायद उसके कुछ दोस्तों को छोड़कर उसके परिवार में उसके लिए लड़ने के लिए कोई नहीं बचा है. वह कोलकाता से था. बेहतरीन डांसर, वह पीएचडी कर रहा था. शाम की सैर करने निकला था जब अचानक किसी अज्ञात ने उन्‍हें कई बार गोली मारी."

38 वर्षीय महिला ने अपने पोस्ट पर अमेरिका में भारतीय दूतावास, पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर को टैग करते हुए कहा कि अमेरिका में कुछ दोस्त शव पर दावा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इसके बारे में कोई अपडेट नहीं है. 

भारतीय मूल के लोगों पर हमले बढ़े 

हाल ही में अमेरिका के राज्य उत्तरी कैरोलिना के न्यूपोर्ट शहर में एक बेघर शख्‍स ने एक भारतीय मूल के मोटल मालिक की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 

वहीं 10 फरवरी को वाशिंगटन में एक रेस्तरां के बाहर हमले के दौरान जानलेवा चोटें लगने से 41 साल के भारतीय मूल के एक आईटी एग्जिक्‍यूटिव की मौत हो गई थी.  

इससे पहले 25 वर्षीय भारतीय छात्र विवेक सैनी की जॉर्जिया के लिथोनिया में एक बेघर ड्रग्‍स के आदी शख्‍स ने हत्‍या कर दी थी. 

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Friday, March 1, 2024

Lok Sabha Elections 2024: हमीरपुर लोकसभा सीट पर 1998 से BJP का कब्जा, तीन बार से लगातार जीत रहे अनुराग ठाकुर

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में लोकसभा की चार और विधानसभा की 68 सीटें हैं. यहां लोकसभा की चार सीटें हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा और शिमला हैं. इनमें से एक हमीरपुर सीट हैं, जहां साल  2009 से लगातार भारतीय जनता पार्टी के अनुराग सिंह ठाकुर जीत रहे हैं. हमीरपुर सीट (Hamirpur seat) पर साल 1998 से लगातार भाजपा का कब्जा बना हुआ है. 1998, 1999 और 2004 लगातार तीन लोकसभा चुनाव भाजपा के सुरेश चंदेल ने जीत हासिल की है. 2004 में जीत का अंतर मात्र 1615 वोट थे.

2019 में लगभग 4 लाख मतों से अनुराग ठाकुर को मिली थी जीत
साल 2019 अनुराग सिंह ठाकुर को लोकसभा चुनाव में कुल 682692 वोट मिले थे. इन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार राम लाल ठाकुर को 399572 वोटों से हराया था, जिन्हें 283120 वोट मिले थे. साल 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो उसमें भी अनुराग ठाकुर को ही जीत हासिल हुई थी. तब उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार राजिंदर सिंह राणा को 98403 वोटों से हराया था. अनुराग ठाकुर को 448035 वोट तो राजिंदर सिंह राणा को 349632 वोट मिले थे.

1998 से भाजपा का कब्जा

  • साल 2009 में अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस उम्मीदवार नरिंदर ठाकुर को हराया था. हालांकि, 2009 में जीत का अंतर कम था, अनुराग ठाकुर को 373598 तो नरिंदर ठाकुर को 300866 वोट मिले थे. 
  • साल 2004 में भाजपा के सुरेश चंदेल ने 313243 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी. दूसरे नंबर पर कांग्रेस उम्मीदवार रामलाल ठाकुर रहे, जिन्हें 311628 वोट मिले. जीत का अंतर केवल 1615 वोट थे.
  • 2004 से पहले 1999 में भी भाजपा के सुरेश चंदेल ने कांग्रेस के रामलाल ठाकुर को हराया था. सुरेश चंदेल को 336172 वोट तो कांग्रेस रामलाल ठाकुर को 206925 वोट मिले थे. 
  • 1998 में भी भाजपा के सुरेश चंदेल ने ही जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार उन्होंने 77909 वोट के अंतर से हराया था कांग्रेस के कांग्रेस मेजर जनरल बिक्रम सिंह को. सुरेश चंदेल को 319631 तो मेजर जनरल बिक्रम सिंह को 241722 वोट मिले थे.

प्रदेश की सत्ता सुक्खू के हाथ में
हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव की बात करें तो 2022 के चुनाव में कांग्रेस को 40 सीटों के साथ बहुमत मिला था. वहीं, भाजपा को 68 में से 25 सीटें मिली थीं. इसके अलावा तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी. अभी प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हैं.

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Thursday, February 29, 2024

INSIDE STORY : 10 दिन से बन रही थी BJP की रणनीति, हिमाचल में पर्दे के पीछे से कांग्रेस को ऐसे हराया

राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections 2024) के बाद हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh Crisis) की सियासत में हलचल तेज हो गई हैं. राज्य की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए मंगलवार को वोटिंग हुई. राज्य में कांग्रेस (Congress) की सत्ता रहते हुए भी बीजेपी (BJP) ने ये सीट जीत ली. कांग्रेस के 6 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर बीजेपी के लिए क्रॉस वोटिंग कर दी. निर्दलीय विधायकों ने भी बीजेपी का साथ दिया. इन सबके बीच बेशक सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhvinder Singh Sukhu) सरकार ने बजट पास करा लिया हो, लेकिन सुक्खू की 14 महीने पुरानी सरकार पर खतरा मंडरा रहा है. पार्टी के कई विधायक और मंत्री सीएम सुक्खू के काम करने के तरीकों पर सवाल उठा रहे हैं. कांग्रेस हाईकमान पर भी कटघरे में है. आइए जानते हैं हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस हाईकमान से कहां लापरवाही हुई? कैसे सुक्खू सरकार पर संकट के बादल छा गए:-

हिमाचल प्रदेश की 68 विधानसभा सीटों के लिए के एक ही फेज में 12 नवंबर 2022 को चुनाव हुए. 8 दिसंबर 2022 को नतीजे आए. कांग्रेस ने 40 सीटें जीती, बीजेपी के खाते में 25 सीटें आईं. पूर्ण बहुमत मिलते ही पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के गुट ने सीएम पद पर दावेदारी पेश कर दी. इस गुट की मांग थी कि वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को सीएम पद दिया जाए. जबकि एक और गुट प्रियंका गांधी के करीबी और वीरभद्र के विरोधी रहे सुखविंदर सिंह सुक्खू को सीएम बनाने की मांग कर रहा था. 

"सभी विधायकों की इच्छा पूरी नहीं हो सकती..." : सियासी संकट के बीच हिमाचल CM सुखविंदर सिंह सुक्खू

काफी सोच-विचार के बाद कांग्रेस हाईकमान ने सुक्खू पर भरोसा जताया. पार्टी ने प्रतिभा सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद दिया और उनके बेटे विक्रमादित्य को सरकार में मंत्री पद दिया गया. लेकिन चीजें नहीं बदली. दोनों गुटों में तनातनी जारी रही. बीजेपी को भी इसकी खबर थी.

10 दिन पहले ही बीजेपी ने बनाई थी प्लानिंग
बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट पर कांग्रेस को मात देने की प्लानिंग काफी पहले ही बना ली थी. चुनाव से करीब 10 दिन पहले यानी 17 फरवरी को दिल्ली में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई. इस दौरान पार्टी के हिमाचल प्रदेश के बड़े नेताओं ने केंद्र के बड़े नेताओं को बताया कि हिमाचल प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को मात दी जा सकती है.

इसके बाद बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष जे पी नड्डा, जयराम ठाकुर और पार्टी के उपाध्यक्ष सौदान सिंह को इस पूरे काम में लगा दिया. 17 और 18 फरवरी को दिल्ली में मोटे तौर पर ये तय हुआ कि बीजेपी कैसे ये चुनाव जीत सकती है. 

"जल्द बनेगी BJP की सरकार" : हिमाचल में राज्यसभा चुनाव विजेता का दावा - 10 और कांग्रेस MLAs संपर्क में

सुक्खू से नाराज़ हैं ये तीन नेता
राज्य के बीजेपी नेताओं का ग्राउंड से फीडबैक था कि पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिमा सिंह, उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह और मुकेश अग्निहोत्री का गुट मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से नाराज़ हैं. क्योंकि अपने एक साल के कार्यकाल में सुक्खू ने इनके सभी कामों जैसे ट्रांसफर, पोस्टिंग, अपॉइंटमेंट वगैरह पर एक तरीके से फुलस्टॉप लगा रखा था. 

आलाकमान ने उम्मीदवार चुनने में की गलती
दूसरी तरफ, कांग्रेस आलाकमान ने भी उम्मीदवार चुनने में गलती की. पार्टी ने हिमाचल के बाहरी अभिषेक मनु सिंघवी को उम्मीदवार बना दिया, जबकि प्रतिभा सिंह खुद राज्यसभा की उम्मीदवारी चाहती थीं. 

आनंद शर्मा ने प्रतिभा सिंह से मिलाया हाथ
राहुल गांधी की मुखालफत करके कांग्रेस के भीतर ही एक ग्रुप G-23 बना था. इसी G-23 में शामिल माने जाने वाले पार्टी के दिग्गज नेता आनंद शर्मा भी फिर से राज्यसभा जाना चाह रहे थे. हालांकि, आंनद शर्मा और रानी प्रतिभा सिंह के खेमों में बनती नहीं है, लेकिन सुक्खू को सबक सीखाने के लिए आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह एक साथ आ गए. सूत्र बताते हैं कि इस काम में बड़ी भूमिका एक और दिग्गज नेता मुकेश अग्निहोत्री की रही. 

BJP का 'गढ़' गांधीनगर : वाजपेयी, आडवाणी और अब अमित शाह... 2024 में किसे उतारेगी कांग्रेस?

हालांकि, कांग्रेस हाईकमान को इस प्लानिंग का कुछ आइडिया जरूर था. तभी सोनिया गांधी को हिमाचल के बजाय राजस्थान से राज्यसभा भेजा गया. जबकि अभिषेक मनु सिंघवी को पार्टी के टॉप लीडर्स ने ज़िम्मेदारी दी कि आप शिमला में ही रहें और कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों से बात करें. सिंघवी को दिल्ली का आशीर्वाद भी था.

बीजेपी ने ऐसे चली चाल
लेकिन बीजेपी ने कांग्रेस की इस कमी को भांप लिया. पार्टी ने हर्ष महाजन को हिमाचल में राज्यसभा सीट का प्रत्याशी बना दिया. महाजन कांग्रेस से टूटकर विधानसभा चुनावों के पहले ही बीजेपी में आये थे. वो वीरभद्र सिंह और उनके परिवार के बेहद करीबी रहे हैं. इसलिए उन्हें प्रतिभा सिंह और उनके खेमे के विधायकों को अपने साथ लाने में ज्यादा पापड़ नहीं बेलने पड़ते.

हर्ष महाजन की जीत को पक्का करने के लिए बीजेपी की लीडरशिप ने पहाड़ की राजनीति के महारथी माने जाने वाले सौदान सिंह को काम पर लगाया. उन्हें मंगलवार को वोटिंग के पहले ही शिमला पहुंचा दिया. सूत्रों के मुताबिक, सौदान सिंह ने हर्ष महाजन के जरिए कांग्रेस से नाराज चल रहे 9-10 विधायकों से संपर्क साधा. सौदान सिंह ने इन विधायकों को बीजेपी के लिए वोट करने के लिए मना लिया. इसके बदले में इन लोगों को नई सरकार बनने पर उनके काम होने का भरोसा दिलाया गया. 

सुक्खू से भी हुई बड़ी चूक
इसमें सीएम सुक्खू की सबसे बड़ी चूक ये रही कि उन्होंने पार्टी के विधायकों की नाराजगी को गंभीरता से नहीं लिया. सुजानपुर के कांग्रेसी विधायक राजेंद्र राणा और धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने सीएम के सामने कई मामले उठाए. लेकिन बताया जा रहा है कि सुक्खू ने इनपर ध्यान नहीं दिया. पार्टी हाईकमान भी इन नाराज विधायकों को मनाने में लापरवाह रही. 

कांग्रेस की एक 'चाल'... और बच गई हिमाचल सरकार : ये रणनीति आई सुक्खू की कुर्सी बचाने के काम

इसके बाद राज्यसभा चुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से नाराज कांग्रेस के 6 और 3 निर्दलीय विधायकों ने BJP कैंडिडेट के हक में क्रॉस वोटिंग की. दोनों प्रत्याशियों को 34-34 वोट मिलने के बाद टॉस हुआ, जिसमें बाजी बीजेपी उम्मीदवार के हाथ लगी.



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