Monday, December 16, 2024
Uncle, cousin beat woman, her father over love marriage
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Sunday, December 15, 2024
Habitual offender stabs man to death, arrested within hours
Duo in city to avenge 2022 murder caught
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Saturday, December 14, 2024
Fees for BBA-BCA colleges raised before FRC nod
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Two illegal floors of building in Jamalpur razed
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Two-day conclave on Vasudhaiva Kutumbakam begins today
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Friday, December 13, 2024
Edu digest
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Thursday, December 12, 2024
Perform or perish: Gujarati singer chased by armed men
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मेरे बाबा और पीएम मोदी का रिश्ता राजनीतिक सीमाओं से परे था : प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने सुनाए किस्से
शर्मिष्ठा मुखर्जी (Sharmistha Mukherjee) ने अपने पिता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) की जयंती पर कुछ किस्से साझा किए. ये भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रणब दा के संबंध नए नहीं बल्कि बहुत पुराने थे. शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया कि मेरे पिता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के बीच संबंध राजनीतिक सीमाओं से परे था. ऐसा आमतौर पर देखने को नहीं मिलता है. पीएम मोदी ने शर्मिष्ठा मुखर्जी को इसके लिए धन्यवाद दिया है.
शर्मिष्ठा मुखर्जी के वीडियो को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, "प्रणब बाबू के साथ मेरी बातचीत की कई यादें वापस लाने के लिए शर्मिष्ठा जी को धन्यवाद. मैं उनके साथ अपने जुड़ाव को हमेशा याद रखूंगा. उनकी अंतर्दृष्टि और बुद्धिमत्ता अद्वितीय थी."
Thank you Sharmistha Ji for bringing back several memories of my interactions with Pranab Babu. I will always cherish my association with him. His insights and wisdom remain unparalleled.@Sharmistha_GK https://t.co/sFPS7ODpyu
— Narendra Modi (@narendramodi) December 11, 2024
एक टीम की तरह काम करते थे : शर्मिष्ठा
उन्होंने कहा, “यह बात बिलकुल सार्वजनिक थी कि मोदी जी, प्रधानमंत्री के रूप में, और प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रपति के रूप में, किस तरह से एक टीम की तरह काम करते थे. दोनों ने एकदम लोकतांत्रिक ढंग से काम किया. यह हैरान करने वाली बात थी, क्योंकि दोनों की राजनीतिक और वैचारिक पृष्ठभूमि बिलकुल अलग थी. मुझे बाबा की डायरी पढ़ने के बाद और मोदी जी से कुछ दिलचस्प बातें जानने के बाद ये सारी बातें समझ में आईं.”
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, “एक बार जब मोदी जी प्रधानमंत्री बनने के बाद बाबा से मिलने गए, तो उन्होंने बाबा के पैर छुए और कहा, "दादा, आप मुझे मेरे छोटे भाई की तरह मार्गदर्शन दीजिए." बाबा ने उन्हें पूरी मदद का आश्वासन दिया. मोदी जी ने मुझे बताया कि उनका संबंध बाबा से बहुत पुराना है, और ये सिर्फ गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद का नहीं था. वह पहले भी, जब आरएसएस के साधारण कार्यकर्ता थे, बाबा से मिलने आते थे. दिल्ली में नॉर्थ एवेन्यू और साउथ एवेन्यू में उनकी मुलाकातें होती थीं.”
PM मोदी को बताया था पेशेवर और फोकस्ड
उन्होंने कहा, “मोदी जी ने मुझे बताया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो एक बार बाबा ने डायरी में लिखा था कि मोदी जी कांग्रेस सरकार के आलोचक हैं, लेकिन जब भी वह निजी तौर पर बाबा से मिलते, तो हमेशा उनके पैर छूते थे. बाबा ने यह भी लिखा था कि मोदी जी की इज्जत उन्हें बहुत अजीब तरह से महसूस होती थी, हालांकि वह खुद नहीं जानते थे. इसका कारण क्या था.”
पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ने कहा, “एक और दिलचस्प बात यह है कि जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने बाबा से मिलने के बाद कहा कि उन्हें अपनी विदेश नीति को समझने में मदद मिली थी. बाबा ने कहा था कि मोदी जी को विदेशी मामलों में गहरी समझ है, और वह जल्दी ही विदेश नीति के जटिल पहलुओं को समझने में सक्षम हो गए थे.”
वे बताती हैं, “मोदी जी की कार्यशैली के बारे में बाबा ने लिखा था कि वह बहुत ही पेशेवर और फोकस्ड हैं. बाबा ने यह भी कहा था कि मोदी जी ने राज्य राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई, और यही कारण था कि उन्हें विदेश नीति और अन्य मामलों में त्वरित समझ मिली.”
बाबा को भारत रत्न मिला तो एक पत्रकार से पता चला : शर्मिष्ठा
उन्होंने कहा, “एक और दिलचस्प घटना यह थी कि जब बाबा थोड़े समय के लिए राष्ट्रपति पद से रिटायर हुए, और मोदी जी ने उन्हें फोन किया.”
वे बताती हैं, “जब बाबा को भारत रत्न मिला, तो मुझे एक पत्रकार से पता चला. मोदी जी ने इसे एक गुप्त सूचना की तरह रखा था. मुझे बाद में पता चला कि प्रधानमंत्री ने बाबा को पहले फोन किया था. लेकिन, यह तब तक सार्वजनिक नहीं किया गया, जब तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई.”
शर्मिष्ठा ने आगे कहा, “इससे मुझे यह समझ में आया कि मोदी सरकार ने वास्तव में एक अच्छे और सच्चे तरीके से काम किया है, और प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा के प्रति अपना सम्मान और स्नेह हमेशा दिखाया.”
PM मोदी ने दी पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी और कहा कि वह एक ऐसी अनूठी हस्ती थे जो एक उत्कृष्ट राजनेता होने के साथ ही अद्भुत प्रशासक और ज्ञान का भंडार भी थे. कांग्रेस के वरिष्ठ एवं अनुभवी नेता मुखर्जी ने भारत का 13 वां राष्ट्रपति बनने से पहले कई सरकारों में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया. 31 अगस्त, 2020 को 84 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया.
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं. प्रणब बाबू एक ऐसी अनूठी हस्ती थे जो एक उत्कृष्ट राजनेता होने के साथ ही अद्भुत प्रशासक और ज्ञान का भंडार भी थे.'
उन्होंने कहा, 'भारत के विकास में उनका योगदान उल्लेखनीय है. उनके पास विभिन्न क्षेत्रों में आम सहमति बनाने की अद्भुत क्षमता थी और यह शासन में उनके व्यापक अनुभव और भारत की संस्कृति एवं लोकाचार के बारे में उनकी गहरी समझ के कारण संभव हुआ.'
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Wednesday, December 11, 2024
Fee freedom: GU renames BBA, BCA courses
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Tuesday, December 10, 2024
Credai opposes proposed jantri rates, submits memorandums to dist collectors
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हम कब तक कलाकार स्त्री को तवायफ कहकर पुकारेंगे : रामेश्वरी नेहरू स्मृति समारोह में बोलीं मीनाक्षी प्रसाद
रजा फाउंडेशन, स्त्री दर्पण और ड्रीम फाउंडेशन द्वारा रामेश्वरी नेहरू स्मृति समारोह का आयोजन किया गया. इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि करीब 115 साल पहले स्त्री दर्पण पत्रिका निकालकर स्त्री आंदोलन शुरू करने वाली संपादक रामेश्वरी नेहरू ने हरिजनों और विभाजन के समय दंगा पीड़ितों की भी सेवा की. दस दिसम्बर 1886 को लाहौर में जन्मी रामेश्वरी नेहरू की याद में पहली बार किसी साहित्य समारोह का आयोजन किया गया.
समारोह के दौरान वरिष्ठ कवि विमल कुमार के कविता संग्रह तवायफनामा का विमोचन किया गया. तवायफनामा में भूली बिसरी 33 गायिकाओं और तवायफों पर कविताएं हैं. समारोह की अध्यक्षता ममता कालिया की. उन्होंने मशहूर गायिका जानकी बाई छप्पन छुरी का जिक्र करते हुए कहा कि तब पुरुष स्त्री की प्रतिभा से जलते भूनते बहुत थे. यही कारण है कि जानकी बाई पर चाकू से 56 वार किए गए. उन्होंने बताया कि हुस्ना जान ने किस तरह महात्मा गांधी के साथ बनारस में आजादी की अलख जगाने का काम किया.

मुस्लिम महिलाओं के बिना स्त्री विमर्श अधूरा : शर्मा
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिका नासिरा शर्मा ने कहा कि 1857 के विद्रोह के बाद औरतों की विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के लिए आजीविका का संकट पैदा हो गया और महिलाएं कोठे पर नाच गाकर अपना हुनर बेचने लगी और तवायफ कहलाने लगी, जबकि वे उस अर्थ में तवायफ नहीं थी जिस अर्थ में लोग समझते हैं.

उन्होंने कहा कि हमें औरतों के इतिहास की बात करते हुए स्त्री विमर्श की बात करते हुए मुस्लिम महिलाओं को छोड़ नहीं देना चाहिए. बिना उनके हिंदुस्तान में स्त्री विमर्श अधूरा है. उन्होंने बताया कि उस जमाने में मुस्लिम महिलाएं क्या-क्या लिख रहीं थीं.
मीनाक्षी प्रसाद ने संग्रह के नाम पर जताई आपत्ति
बनारस घराने की प्रसिद्ध ठुमरी गायिका मीनाक्षी प्रसाद ने इस संग्रह के नाम पर आपत्ति जताई और कहा कि आखिर हम लोग कब तक एक कलाकार स्त्री को तवायफ गायिका कहकर पुकारेंगे, यह भाषा बदलनी चाहिए. हमारी भाषा पितृसत्ता से संचालित है. उन्होंने कहा कि महिलाओं में भी पितृसत्तात्मक मानसिकता काम करती है, उसे भी बदले जाने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि पुरुषों ने स्त्रियों की प्रतिभा को कमतर आंकने के लिए उस जमाने की भूली बिसरी गायिकाओं को तवायफ गायिकाएं कहकर पुकारना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि उन दिनों कोठे पर पुरुष कलाकार और महिला कलाकार साथ गाते बजाते और सीखते थे, लेकिन महिलाओं-गायिकाओं को बाई या जान कहकर पुकारा गया, जबकि उन्हें सम्मानजनक भाषा में पुकारा जाना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि वे महिलाएं विदुषी थीं, लिखती-पढ़ती थीं, उम्दा गायिकाएं थीं. उन्होंने हिंदुस्तानी मौसिकी को बचाया, लेकिन पुरुष कलाकारों को उस्ताद या पंडित कहा गया जबकि महिला कलाकारों को बाई या जान या तवायफ गायिकाएं.
उन्हें इतिहास में जगह नहीं मिला : लता सिंह
जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर लता सिंह ने कहा कि इन तवायफ महिलाओं और कलाकारों ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन उन्हें इतिहास में जगह नहीं मिली.
कथा कार प्रभात रंजन ने कहा कि उनके शहर में ढेला बाई ही नहीं बल्कि पन्ना बाई जैसी गायिकाएं भी थीं जो आज़ादी के बाद यूनेस्को द्वारा सूचीबद्ध गायिकाओं में शीर्ष पर थीं. उन्होंने कहा कि इतिहास में उत्खनन का काम कर उन्हें दर्ज किया जाना चाहिए.
समारोह में इब्बार रब्बी ने पुरुष कवियों की स्त्री विषयक कविताओं की पुस्तक 'कविता में स्त्री' का लोकार्पण करते हुए कहा कि हिंदी कविता में पुरुषों ने स्त्रियों पर बहुत कविताएं लिखीं, लेकिन समाज में महिलाएं बलात्कार की शिकार हो रही हैं.
वहीं समारोह में रीता दास राम द्वारा संपादित पुस्तक हमारी अम्मा और अलका तिवारी द्वारा संपादित गीतांजलि श्री आलोचना के दायरे में पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया.
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Monday, December 9, 2024
हिमाचल प्रदेश में सीजन की पहली बर्फबारी, शिमला और किन्नौर में तापमान गिरा
हिमाचल प्रदेश के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा, जब शिमला और किन्नौर जिलों में सीजन की पहली बर्फबारी हुई. बर्फबारी होने के कारण ठंड बढ़ गई है. शिमला की सड़कों पर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दिसंबर के दूसरे सप्ताह में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है. कई दशक बाद यहां इतनी जल्दी बर्फ गिरी है. आमतौर पर शिमला में बर्फबारी दिसंबर के अंत या जनवरी में होती है, लेकिन इस बार समय से पहले बर्फबारी ने पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर दिया.
शिमला में सैर करने आए पर्यटक इस बर्फबारी का जमकर आनंद ले रहे हैं. बर्फ से ढंकी पहाड़ियों और सड़कों पर पर्यटक मस्ती करते हुए बर्फ में खेलते नजर आ रहे हैं.
शिमला के अलावा किन्नौर जिले में भी सीजन की पहली बर्फबारी हुई है, जिससे तापमान शून्य के नीचे चला गया. किन्नौर जिले में बर्फबारी के कारण स्थानीय जलस्त्रोत जमने लगे हैं. इस बर्फबारी ने जिले के किसानों और बागवानों को राहत दी है, क्योंकि उन्हें सूखे के कारण काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. बर्फबारी के कारण इन किसानों और बागवानों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होगी.
किन्नौर के बागवानों और किसानों के लिए बर्फबारी एक वरदान साबित हुई है. उन्हें इस मौसम में बहुत समय से बर्फबारी का इंतजार था, ताकि सूखा और पानी की कमी की समस्या से छुटकारा पाया जा सके. बर्फबारी के बाद अब इन क्षेत्रों में जल स्रोतों में पानी का स्तर बढ़ने की संभावना है, जिससे कृषि कार्यों और बागवानी में मदद मिलेगी.
बर्फबारी के बाद पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है. बर्फबारी से जिले का आकर्षण बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
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