Thursday, August 3, 2023

Nuh Violence: नूंह में क्यों फेल हुई हरियाणा सरकार? हिंसा को रोकने में पुलिस से कहां हुई चूक?

हरियाणा के नूंह (Nuh Violence) में सोमवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा में अब तक 6 की मौत हो चुकी है. कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हिंसा को लेकर पुलिस ने अब तक 26 एफआईआर दर्ज की है. 116 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इस बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) ने कहा कि हिंसा में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों से करेंगे. नूंह में भड़की हिंसा को लेकर हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. 

NDTV की एक रिपोर्ट में हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों ने भी माना कि नूंह में पुलिस और प्रशासन हालात को भांपने में नाकाम रहा. उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हिंसा कैसे हुई? यह पता लगाने के लिए अभी भी जांच चल रही है. पुलिस हिंसा के लिए उपद्रवियों द्वारा फैलाई गई अफवाहों को जिम्मेदार ठहराती है.

आइए जानते हैं नूंह हिंसा में आखिर सीएम खट्टर सरकार से कहां हुई चूक और उठ रहे कौन से सवाल:-
 

1. जिस दिन हिंसा हुई, उस दिन नूंह के एसपी छुट्टी पर थे. पलवल के एसपी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. क्या पलवल के एसपी पहले से नूंह में मौजूद थे या वो हिंसा के बाद वहां पहुंचे? ये अभी साफ नहीं हो पाया है.
 
2. जब मोनू मानेसर का एक वीडियो पहले से ही सोशल मीडिया पर चल रहा था, जिसमें वो कह रहा था कि वो नूंह आएगा. ऐसे में सवाल है कि बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा के रास्ते पर पुलिस की पहले से ही पर्याप्त तैनाती क्यों नहीं की गई?

3. क्या प्रशासन को पहले से सोमवार के तनाव का अंदाज़ा नहीं हो पाया था. जबकि ये बात सामने आ रही है कि भीड़ में कई लोग पत्थर और हथियार लेकर पहुंचे हुए थे, तभी तो शोभायात्रा पर पत्थरबाज़ी हुई. ऐसे में क्या इसे खुफिया विभाग की नाकामी नहीं मानी जानी चाहिए?
 
4. हरियाणा के नूंह में तैनाती को लेकर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच ये धारणा है कि उन्हें मेवात की ज़िम्मेदारी देकर मुख्य धारा से किनारे कर दिया गया है. कुछ अधिकारियों की यह भी शिकायत रहती है कि उन्हें पनिशमेंट पोस्टिंग दी गई है. इसलिए ये कहा जाता है कि कई अधिकारी वहां तैनाती को बहुत गंभीरता से नहीं लेते. 
अगर ऐसा है, तो ये पुलिस प्रशासन की भूमिका पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है.

5. हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बयान दिया है कि उनके प्रशासन को अंदाजा नहीं था कि शोभायात्रा में इतनी भीड़ जुटेगी. सवाल ये है कि प्रशासन को शोभायात्रा में कितने लोग आएंगे, इसकी जानकारी क्या वाकई नहीं दी गई थी?

6. सवाल इस बात का है कि अगर इतने पुलिसकर्मी थे, तो उनका किस इलाके में मोबिलाइजेशन हुआ? सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज और सावन के महीने को देखते हुए क्या अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत नहीं थी? 

एसपी के छुट्टी पर होने से क्या होनी चाहिए व्यवस्था?
जब किसी जिले का एसपी छुट्टी पर हो, तो जिले में क्या व्यवस्था होनी चाहिए? इस सवाल के जवाब में यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा, "ऐसे संवेदनशील प्रकरणों के पहले, जहां मालूम है कि समस्या उत्पन्न होने की प्रबल संभावना है... जब तक कि जिंदगी और मौत का मामला न हो, पुलिस अधिकारियों की छुट्टी निरस्त कर दी जाती है. ऐसे मामलों में अधिकारी छुट्टी पर नहीं जा सकते और न उन्हें जाना चाहिए. अगर इसके बाद भी अधिकारी या एसपी छुट्टी पर गए हैं, तो उनके लिंक अफसर की पूरी जिम्मेदारी बनती है."

हरियाणा में क्या हैं ताजा हालात?
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए नूंह, फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम में मानेसर, पटोदी व सोहना इलाके में 5 अगस्त की आधी रात तक इंटरनेट बंद कर दिया गया है. नूंह में सोमवार को भड़की हिंसा के दो दिन बाद भी कर्फ्यू जारी है. गुरुग्राम, पलवल जिले में तनाव का माहौल है. हरियाणा में पुलिस की 30 कंपनियां और केंद्रीय सुरक्षा बलों की 20 कंपनियों को तैनात किया गया है. सेंट्रल फोर्स की गुरुग्राम में 2 और नूंह में 14 कंपनियां लगाई गई हैं. दिल्ली और राजस्थान के भरतपुर में भी अलर्ट जारी किया गया है.



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Wednesday, August 2, 2023

"ये कैसा ढोंग है?": PM मोदी के साथ मंच साझा करने पर ओवैसी का शरद पवार पर निशाना

पुणे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मंच साझा करने को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार पर ‘ढोंग' का आरोप लगाया. वहीं, पवार की पार्टी राकांपा ने पलटवार करते हुए ‘उनकी राजनीतिक समझ' पर सवाल उठाया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने तथा लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार स्वीकार करने के लिए मंगलवार को महाराष्ट्र के पुणे में थे.  

ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘‘लोकसभा में राकांपा और अन्य विपक्षी दल मणिपुर मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि शरद पवार खुशी-खुशी पुणे में नरेन्द्र मोदी के साथ मंच साझा कर रहे हैं. ये कैसा ढोंग है? वहीं, भाजपा खुशी-खुशी बिना चर्चा के विधेयक पास करा रही है.''

इस पर पलटवार करते हुए रांकापा प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने ट्वीट किया, ‘‘असदुद्दीन ओवैसी को राजनीतिक समझ की कमी दिखाने वाले बयान देने से पहले अपनी आंखें और कान खुले रखने की जरूरत है. शरद पवार साहब लोकमान्य तिलक के सम्मान में समारोह में शामिल हुए. क्या ओवैसी को तिलक जी का महत्व पता है और क्या उन्होंने कभी उन्हें कोई सम्मान दिया है?''

बता दें कि लोकमान्य तिलक की विरासत का सम्मान करने के लिए 1983 में तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट ने लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत की थी. 

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PM मोदी कांग्रेस सरकारों पर बरसे, कहा - कर्नाटक में स्वार्थ के कारण खजाना खाली, राजस्‍थान में विकास ठप

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस स्वार्थ के लिए राज्य का खजाना ''खाली'' कर रही है और चुनावी राज्य राजस्थान में भी विकास रुक गया है, जहां उसकी सरकार है, लेकिन इसके विपरीत महाराष्ट्र में चौतरफा विकास हो रहा है. मोदी ने कहा कि कर्नाटक में, सिद्धरमैया सरकार ने स्वीकार किया है कि राज्य का खजाना खाली है और विकास के लिए धन नहीं है. कर्नाटक में मई में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से बेदखल करने के बाद कांग्रेस सत्ता में आई थी. प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस लोकलुभावन घोषणाएं करके कर्नाटक में सत्ता में आने में कामयाब रही, लेकिन इस प्रक्रिया में उसने लोगों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है. 

प्रधानमंत्री दो नयी पुणे मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाने और पुणे में 15,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करने के बाद बोल रहे थे. 

उन्होंने कहा, 'हालांकि हम महाराष्ट्र (जहां भाजपा सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है) में सर्वांगीण विकास देख रहे हैं, पड़ोसी राज्य कर्नाटक में जो कुछ भी हो रहा है वह भी हमारे सामने है. बेंगलुरु एक बड़ा आईटी केंद्र है, यह वैश्विक निवेश का केंद्र है. इस समय बेंगलुरु का तेज गति से विकास जरूरी था, लेकिन कुछ (लोकलुभावन) घोषणाएं करके सरकार बनी और इतने कम समय में इसके दुष्परिणाम दिखने लगे...यह चिंता का विषय है.”

कर्नाटक में नवगठित कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए मोदी ने कहा, ''जब कोई पार्टी अपने स्वार्थ के लिए राज्य का खजाना खाली कर देती है, तो इसका खामियाजा राज्य की जनता को भुगतना पड़ता है और युवा पीढ़ी के भविष्य पर सवालिया निशान लग जाता है.'

मोदी ने कहा, 'अब स्थिति ऐसी है कि कर्नाटक सरकार स्वीकार कर रही है कि बेंगलुरु या राज्य के बाकी हिस्सों के विकास के लिए राज्य का खजाना खाली है. ऐसी ही हालत राजस्थान में है, जहां कर का बोझ बढ़ता जा रहा है और विकास कार्य ठप पड़े हैं.”

भाजपा शासित मध्यप्रदेश और कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ व राजस्थान में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं. 

उन्होंने कहा कि देश को विकास के पथ पर ले जाने के लिए 'नीति', 'नीयत' और 'निष्ठा' आवश्यक तत्व हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'नीति, नियत और निष्ठा ही तय करती है कि विकास होगा या नहीं.'

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देश के 4001 विधायकों के पास 54,545 करोड़ रुपये की संपत्ति, इन तीन राज्‍यों के संयुक्‍त बजट से भी ज्‍यादा

देश के मौजूदा 4001 विधायकों की कुल संपत्ति 54,545 करोड़ रुपये है, जो नगालैंड, मिजोरम और सिक्किम के 2023-24 के संयुक्त सालाना बजट से कहीं ज्यादा है. एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (एडीआर) और 'नेशनल इलेक्शन वॉच' (एनईडब्ल्यू) ने चुनाव से पहले इनके (विधायकों) द्वारा दाखिल हलफनामे से यह आंकड़े जुटाए हैं. रिपोर्ट में बताया कि 4033 विधायकों में से 4001 के हलफनामों का विश्लेषण किया गया. प्रति विधायक औसत संपत्ति 13.63 करोड़ रुपये है. इन 4001 विधायकों में निर्दलीय और 84 राजनीतिक दलों से जुड़े विधायक हैं. 

रिपोर्ट में बताया गया, ''मौजूदा 4001 विधायकों की कुल संपत्ति 54,545 करोड़ रुपये है. यह राशि तीन राज्यों नगालैंड, मिजोरम और सिक्किम के वर्ष 2023-24 के संयुक्त सालाना बजट 49,103 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. वर्ष 2023-24 के लिए नगालैंड का बजट 23,086 करोड़ रुपये, मिजोरम का 14,210 करोड़ रुपये और सिक्किम का बजट 11,807 करोड़ रुपये है.''

बड़े दलों की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 1356 विधायकों में प्रति विधायक औसत संपत्ति 11.97 करोड़ रुपये, कांग्रेस के 719 विधायकों में प्रति विधायक औसत संपत्ति 21.97 करोड़ रुपये, तृणमूल कांग्रेस के 227 विधायकों में प्रति विधायक औसत संपत्ति 3.51 करोड़ रुपये, आम आदमी पार्टी के 161 विधायकों में प्रति विधायक औसत संपत्ति 10.20 करोड़ रुपये और युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के 146 विधायकों में प्रति विधायक औसत संपत्ति 23.14 करोड़ रुपये पाई गई है.

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AAP के दिल्‍ली संगठन में नई नियुक्तियां, पहली बार थर्ड जेंडर विंग बनाया 

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली संगठन के लिए की नई नियुक्तियां की हैं. पार्टी ने दिल्ली में पहली बार थर्ड जेंडर विंग बनाया है. दिल्ली के सुल्तानपुरी से पार्षद बॉबी किन्नर को थर्ड जेंडर विंग का स्‍टेट प्रेसिडेंट बनाया गया है. पार्टी ने दिल्ली प्रदेश के लिए विभिन्न विंग के स्टेट प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट और स्टेट सेक्रेटरी नियुक्त किए हैं. मंगलवार देर रात पार्टी ने नव नियुक्‍त पदाधिकारियों की आधिकारिक सूची को अपने ट्विटर अकाउंट पर भी पोस्‍ट किया. 

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली प्रदेश के लिए 6 स्टेट ज्वाइंट सेक्रेटरी बनाये हैं. साथ ही 14 जिलों में 5-5 डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी भी नियुक्‍त किए गए हैं. इस तरह से दिल्ली के लिए पार्टी ने कुल 70 डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी बनाए हैं.

पार्टी के दिल्‍ली संगठन में रिठाला से विधायक महेंद्र गोयल को ट्रेड विंग का अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं मॉडल टाउन विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को पूर्वांचल विंग का अध्यक्ष बनाया गया है. साथ ही पंकज गुप्ता यूथ विंग और दरियागंज की पार्षद सारिका चौधरी महिला विंग की स्‍टेट प्रेसिडेंट होंगी. 

इसी के साथ पार्टी ने दिल्‍ली में संजीव नसियर को लीगल विंग का अध्यक्ष और दिनेश भारद्वाज को स्पोर्ट्स विंग का अध्यक्ष बनाया है. इसके साथ ही पार्टी ने डॉ. निम्मी रस्तोगी को डॉक्टर विंग का अध्यक्ष और हैदर अली को ऑटो विंग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्‍त किया है. 

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नंदिनी दूध पर कर्नाटक की राजनीति में फिर से 'उबाल', अब दिया गया धार्मिक रंग

कर्नाटक में नंदिनी दूध के जिस मुद्दे पर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को घेरा था और अमूल ब्रांड के प्रदेश में लाने से स्थानीय नंदिनी डेयरी ब्रांड को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया था, बीजेपी अब उसी मुद्दे पर कांग्रेस पर हमलावार है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने कांग्रेस पर हिंदू मान्यताओं और भक्ति के प्रति उदासीनता के कारण तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को नंदिनी घी की आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया है. टीटीडी विश्व प्रसिद्ध तिरूपति लड्डू बनाने के लिए घी का टेंडर जारी करता है, जो भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है.

पार्टी नेता सीटी रवि ने यह भी दावा किया है कि राज्य सरकार ने नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाकर कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ), जो इस ब्रांड का मालिक है, उसको बोली की प्रक्रिया से दूर कर दिया है.

हालांकि, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि टीटीडी को नंदिनी घी की आपूर्ति पिछले डेढ़ साल से नहीं हुई है और कतील से पूछा कि क्या भाजपा, जो उस समय सत्ता में थी, 'हिन्दू भक्ति विरोधी' है.

मुख्यमंत्री के दावे की पुष्टि केएमएफ के अधिकारियों ने भी की. उन्होंने कहा कि आखिरी बार आंध्र प्रदेश में मंदिर को नंदिनी घी की आपूर्ति 2021 में की गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि आखिरी निविदा प्रक्रिया इस साल मार्च में हुई थी, जब बीजेपी सरकार सत्ता में थी.

एक ट्वीट में, कतील ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया था और कांग्रेस सरकार पर तिरुपति लड्डू के लिए केएमएफ से घी की आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया था.

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ट्वीट में कहा गया, "मंदिर और हिंदू मान्यताओं और भक्ति के प्रति कर्नाटक कांग्रेस की उदासीनता की नीति के कारण तिरूपति के लड्डुओं के लिए नंदिनी घी की आपूर्ति बंद कर दी गई है. तिरूपति के साथ 50 साल की विरासत खत्म हो गई है और यह सिद्धारमैया की हिंदुओं के प्रति उदासीनता की नीति को साबित करता है."

पिछले हफ्ते, कर्नाटक कैबिनेट ने केएमएफ को 1 अगस्त से नंदिनी दूध की कीमत ₹3 प्रति लीटर बढ़ाने की अनुमति दी थी. भाजपा नेता सीटी रवि ने कहा कि इससे नंदिनी के लिए टीटीडी को पहले की कीमत पर दूध की आपूर्ति करना असंभव हो गया.

रवि ने ट्वीट किया, "कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों के दौरान नंदिनी मुद्दे का बेशर्मी से राजनीतिकरण किया और अमूल को बदनाम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया. अक्षम कांग्रेस सरकार को धन्यवाद, नंदिनी अब प्रसिद्ध तिरूपति लड्डू तैयार करने के लिए घी की आपूर्ति नहीं करेगी. यह बहुत स्पष्ट है कि कांग्रेस इसे नष्ट करने पर तुली हुई है."

वहीं बीजेपी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ''आंध्र प्रदेश के तिरूपति को नंदिनी घी की आपूर्ति आज या कल नहीं रोकी गई है. तिरूपति को घी की आपूर्ति डेढ़ साल पहले निलंबित कर दी गई थी. जब बीजेपी की सरका थी.''

सिद्धारमैया ने पूछा, "माननीय सांसद @nalinkateel, अब मुझे बताएं, क्या पिछली भाजपा सरकार हिंदू धार्मिक मान्यताओं और भक्ति के खिलाफ थी? या केवल तत्कालीन मुख्यमंत्री @BSBommai (बसवराज बोम्मई) हिंदू विरोधी थे."

उन्होंने कहा, "लोगों की धार्मिक आस्था के साथ-साथ डेयरी किसानों का जीवन भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए, यदि राज्य के किसानों के हित में, अगर तिरूपति मंदिर हमारे द्वारा मांगी गई कीमत देने के लिए सहमत हो जाता है, तो हमें घी की आपूर्ति करने में कोई समस्या नहीं है."

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केएमएफ के अध्यक्ष भीमा नायक ने कहा कि नंदिनी ब्रांड अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है और कीमत पर कोई समझौता नहीं कर सकता. इसीलिए संगठन ने निविदा प्रक्रिया से बाहर रहने का विकल्प चुना है.

केएमएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि निविदा प्रक्रिया हर छह महीने में होती है और आखिरी बार इस साल मार्च में आयोजित की गई थी. उन्होंने कहा कि अगस्त में मूल्य वृद्धि से मार्च में निविदा प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

अधिकारियों ने कहा कि केएमएफ ने 2005 में टीटीडी को नंदिनी घी की आपूर्ति शुरू की थी और आखिरी बार इसकी बोली आंशिक रूप से 2021 में सफल रही थी, जब बातचीत के बाद इसे आपूर्ति अनुबंध का 35% हिस्सा मिला था. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "2022 में बोली लगाई गई थी, लेकिन यह सफल नहीं रही. हमने 2023 में बोली नहीं लगाई."

टीटीडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, धर्मा रेड्डी ने कहा कि केएमएफ ने मार्च 2023 में पिछली नीलामी में भाग नहीं लिया था. उन्होंने यह भी कहा कि लड्डू के लिए घी सहित सभी वस्तुएं ई-टेंडर के माध्यम से खरीदी जाती हैं और सबसे कम बोली लगाने वाले को अनुबंध दिया जाता है, बशर्ते वे जिन सामग्रियों की आपूर्ति करते हैं वे टीटीडी द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से एक महीने पहले अप्रैल में, कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने कहा था कि अगर अमूल राज्य के बाजार में प्रवेश करेगा तो नंदिनी ब्रांड खतरे में पड़ जाएगा. पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर कर्नाटक को 'लूटने' का आरोप लगाया था.

बीजेपी ने दावा किया था कि कांग्रेस गलत सूचना अभियान चला रही है और दावा किया है कि उसने केएमएफ को मजबूत करने के लिए विपक्षी दल से कहीं अधिक काम किया है.



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नूंह हिंसा: हरियाणा पुलिस ने मृतक होमगार्डों के परिवारों के लिए 57-57 लाख रुपये मुआवजे का किया ऐलान

हरियाणा पुलिस ने नूंह में हुई हिंसा में जान गंवाने वाले दो होमगार्ड के परिवारों को 57-57 लाख रुपये का मुआवजा देने की मंगलवार को घोषणा की. हरियाणा में हुई हिंसा में पांच लोगों की मौत हो चुकी है. नूंह में दो होमगार्ड सहित चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए, जहां भीड़ ने विश्व हिंदू परिषद के जुलूस को रोकने की कोशिश की थी जबकि गुरुग्राम में एक मस्जिद में एक नायब इमाम की हत्या कर दी गई.

एक आधिकारिक बयान के अनुसार हिंसा के मद्देनजर गुरुग्राम से नूंह में तैनात किए गए होमगार्ड नीरज और गुरसेव की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई. बयान में कहा गया है, “हरियाणा पुलिस दुख की इस घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है. कोई भी राशि किसी प्रियजन को खोने से हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन फिर भी हरियाणा पुलिस की ओर से शोकाकुल परिवारों को 57-57 लाख रुपये और हर प्रकार की मदद प्रदान की जाएगी.”

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Tuesday, August 1, 2023

रांची की सड़कों पर धोनी का जलवा, विंटेज कार ड्राइव करते फिर आए नजर

Dhoni Driving Vintage Car: ये तो हम सभी जानते हैं कि भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni Viral Video) को गाड़ियों का कितना शौक है. यही वजह है कि उनके पास आज के समय में गाड़ियों का भंडार देखने को मिलता है. सोशल मीडिया पर अक्सर उनके गैराज के फोटो और वीडियो सामने आते रहते हैं, जिनमें एक से बढ़कर एक बाइक और कार की झलक फैंस का दिल जीत लेती है. हाल ही में सोशल मीडिया पर रांची की सड़कों पर दौड़ती एक विंटेज कार का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसे एमएस धोनी ड्राइव करते नजर आ रहे हैं. बीते दिनो इंटरनेट पर महेंद्र सिंह धोनी का फ्लाइट में विंडो सीट पर नैप लेते एक वीडियो सामने आया था, जिसे एक एयर होस्टेस ने चुपके से बनाया था.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर वायरल हो रहे इस वीडियो को जॉन @CricCrazyJohns नाम के अकाउंट से से इसे शेयर किया गया है, जिसे खूब देखा और पसंद किया जा रहा है. 31 जुलाई को शेयर किए गए इस वीडियो को अब तक 18 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं. वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया है, 'एम.एस धोनी रांची की सड़कों पर ड्राइवर करते हुए.' एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल एमएस धोनी के एक और वीडियो ने पल भर में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इस वीडियो में कैप्टन कूल रांची के सड़कों पर विटेंस कार चलाते स्पॉट हुए हैं. 

यहां देखें वीडियो

यूं तो इससे पहले महेंद्र सिंह धोनी रोल्स रॉयस रैथ चलाते दिखाई दिए थे, जो कि एक लग्जरी सेडान कार थी. बताया जा रहा है कि, यह मॉडल 1975 से 1980 के बीच डिमांड में था. महज 27 सेकंड के इस वायरल वीडियो में एमएस धोनी 1973 की विंटेज कार कपोंटिएक ट्रांस एम एसडी-455 चलाते नजर आ रहे हैं. इस दौरान लाल रंग की गाड़ी को चलते कैप्टन कूल आंखों पर काला चश्मा पहने दिखाई दिए. वीडियो देख चुके यूजर्स इस पर तरह-तरह के रिएक्शन देते हुए अपना प्यार लुटा रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, 'कलेक्शन हो तो ऐसा.' दूसरे यूजर ने लिखा, 'इस कार पर दिल आ गया.' तीसरे यूजर ने लिखा, 'कार और ट्रॉफी का सबसे अच्छे कलेक्शन धोनी के पास है.'
 

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आनंद महिंद्रा ने शेयर किया रस्सी कूद का हैरतअंगेज वीडियो, पहले नहीं देखा होगा ऐसा अमेजिंग टैलेंट

बचपन में आपने भी खेल-खेल में खूब रस्सी कूदी होगी. कभी रस्सी कूदना बच्चों का खेल हुआ करता था, आज खुद को फिट रखने का एक बेहतरीन तरीका बन चुका है. अब तक आपने कई बार रस्सी कूदी होगी या फिर लोगों को कूदते हुए देखा होगा, लेकिन Skipping का जो वीडियो आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं, उसे देखकर आपको पल भर के लिए भी आंखें झपकाना मुश्किल हो जाएगा. बिजनेस टायकून आनंद महिंद्रा ने इस वीडियो को शेयर किया है और लोगों को एक और नया मोटिवेशन दिया है. इस वीडियो को देखकर एक तरफ जहां बचपन की यादें ताजा हो जाएंगी, तो वहीं टीम वर्क की अहमियत भी समझ आएगी.

यहां देखें वीडियो 


इसे कहते हैं टैलेंट

अपने मंडे मोटिवेशन पोस्ट में आनंद महिंद्रा ने स्किपिंग कॉम्पटीशन का एक वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है. वीडियो में टैलेंट, बैलेंस और टीमवर्क का बेहतरीन कॉन्बिनेशन देखने को मिल रहा है. ये वीडियो वर्ल्ड जंप रोप कम्पटीशन का है, जिसमें रस्सी कूदने की अद्भुत प्रतिभा देखने को मिल रही है. अगर हम इस टैलेंट को बियोंड इमेजिनेशन कहें तो गलत नहीं होगा. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि, टीम में दो लोग अपने दोनों हाथों से गजब का संतुलन कायम रखते हुए तेजी से एक साथ दो रस्सियां चला रहे हैं. बीच वाला बंदा रस्सी कूद रहा है और उसके पैरों का तालमेल देखकर लग रहा है मानों वो किसी रिदम पर डांस कर रहा हो. वीडियो को देखकर आप पलक भी नहीं झपका पाएंगे. वीडियो को शेयर करते हुए आनंद महिंद्रा ने कैप्शन में लिखा, 'फोकस, अलर्ट्नेस, एबिलिटी, कोलेबरेशन. एक अच्छे सप्ताह की शुरुआत के लिए एक ग्रेट टूलकिट'

एनर्जी और टैलेंट की तारीफ कर रहे हैं यूजर्स 

इस वीडियो को अब तक करीब डेढ़ लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं और इसे लगातार पसंद किया जा रहा है. ट्विटर पर शेयर किया गया यह वीडियो मंडे मोटिवेशन है, क्योंकि हफ्ते के पहले दिन लोगों में ऑफिस जाने और ज्यादा काम करने का प्रेशर होता है ऐसे में आनंद महिंद्रा के यह इंस्पायरिंग और मोटिवेशनल वीडियो लोगों को बेहतर फील करवाने के लिए मोटिवेट करते हैं. इस वीडियो को देखकर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन आ रहे हैं. एक ने लिखा कि, यह बहुत इंस्पायरिंग है. दूसरे यूजर ने लिखा, इनकी एनर्जी वाकई गए काबिले तारीफ है. 

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सोशल मीडिया पर बेहतरीन कंटेंट के जरिए धूम मचा रहे हैं मोहम्मद शकूर

सोशल मीडिया पर आए दिन कोई न कोई वायरल होता ही रहता है. कई लोग अपनी बेहतरीन कंटेंट के जरिए सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं. देखा जाए तो कई बेहतरीन कंटेंट क्रियटर्स भी हैं. हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे सोशल मीडिया आर्टिस्ट के बारे में जिन्होंने मनोरंजन के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. Instagram पर इनके 7 लाख से ज़्यादा फॉलोवर्स हैं.  हम बात कर रहे हैं मोहम्मद शकूर की, जो आपको अनूठे मनोरंजन प्रदान करने के अलावा और ऐसा बहुत कुछ सिखा सकते हैं.

बहुत ही कम समय में सोशल मीडिया की मदद से शकूर ने अपनी पहचान बना ली. उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल का नाम अपने पारिवारिक व्यवसाय, ज़म ज़म इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेडिंग के नाम पर रखा है, जिसने अब तक 21.1 मिलियन ग्राहक प्राप्त किए हैं और उनके प्रत्येक वीडियो पर हजारों व्यूज हैं.

दूसरों को खुश करने के लिए ही मोहम्मद शकूर वीडियो बनाते हैं.  अपने वीडियो में वह कॉमेडी और ड्रामा का खूबसूरती से मिश्रण करते हैं. उनके वीडियोज़ देखकर आपका दिन खुशियों से भर जाता है और आप जीवन को एक सकारात्मक नजरिये से देखने का मन बनाते हैं.

मोहम्मद शकूर बताते हैं कि सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसकी मदद से अच्छे संदेश समाज को दिए जा सकते हैं. मेरी कोशिश रहती है कि मैं लोगों के लिए बेहतरीन और सुंदर कंटेंट बनाऊं ताकि समाज में अच्छा संदेश जाए और लोग प्रभावित भी हों.
 



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पत्नी को कर्मचारी दिखाकर 10 साल तक वेतन दिलाता रहा निजी कंपनी का अधिकारी

दिल्ली में आर्थिक अपराध का एक चौंकाने मामला सामने आया है, जिसमें निजी भर्ती कंपनी के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर धोखाधड़ी करके अपनी बेरोजगार पत्नी को 10 साल तक काम पर रखा हुआ दिखाया और यह सुनिश्चित किया कि उसके खाते में नियमित रूप से वेतन पहुंचता रहे. इससे कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ.

दिल्ली में स्थित कंपनी को पिछले साल दिसंबर में जब यह आभास हुआ कि रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई है, तो उसने आंतरिक जांच की जिसमें अपराध सामने आया. पिछले सप्ताह उसने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की. मामला मैनपावरग्रुप सर्विस प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है, जो विभिन्न कंपनियों को कर्मचारी और भर्ती सेवाएं प्रदान करती है.

पुलिस को दी गई मैनपावरग्रुप की शिकायत के अनुसार राधाबल्लव नाथ ने 2008 में सहायक प्रबंधक (वित्त) के रूप में कंपनी में काम शुरू किया, जिसके बाद उसे पदोन्नति देकर प्रबंधक (वित्त) नियुक्त किया गया. नाथ ने कथित तौर पर कंपनी को धोखा देकर अपनी बेरोजगार पत्नी के लिए आय का नियमित स्रोत तैयार करने की योजना बनाई.

चूंकि कंपनी डेटा गोपनीयता को उच्च प्राथमिकता देती है, इसलिए इसने केवल तीन अधिकारियों - निदेशक (मानव संसाधन), मुख्य मानव संसाधन अधिकारी (सीएचआरओ) और नाथ को मासिक वेतनमान व प्रतिपूर्ति डेटा तक पहुंच की अनुमति दी थी.

नाथ बाहरी वेतन वेंडर और कंपनी के अन्य विभागों, जैसे मानव संसाधन और वित्त, के बीच एक कड़ी था. वह मासिक भुगतान रजिस्टर तैयार करने के लिए नए भर्ती हुए कर्मचारियों, कंपनी छोड़ चुके लोगों और मौजूदा कर्मचारियों की हाजिरी से संबंधित डेटा वेतन वेंडर को भेजता था। वेंडर मासिक भुगतान रजिस्टर तैयार करके नाथ को भेजता था, जो इसे निदेशक (मानव संसाधन) को भेज देता था.

इसके बाद यह रजिस्टर अंतिम मंजूरी के लिए मुख्य मानव संसाधन अधिकारी (सीएचआरओ) को भेजा जाता था. सीएचआरओ इसे मंजूरी देता था और इसे निदेशक (मानव संसाधन) को वापस भेज देता था, जो इसे अंतिम वेतन रजिस्टर के रूप में नाथ को भेज देता था. नाथ वेतन जारी करने के लिए अंतिम वेतन रजिस्टर बैंक को भेजने के लिए जिम्मेदार था. कंपनी ने आरोप लगाया है कि नाथ रजिस्टर को बैंक में भेजने से पहले इसमें हेरफेर कर अपनी पत्नी का नाम डाल देता था.

प्राथमिकी में कहा गया है, 'राधाबल्लव नाथ को 11 दिसंबर, 2022 को निलंबित कर दिया गया था और मैनपावरग्रुप द्वारा एक आंतरिक समिति का गठन किया गया था, जिसने 8 दिसंबर, 2022 को टीम की बैठक में सामने आई विसंगति के बारे में पूछताछ के लिए नाथ को बुलाया.”

प्राथमिकी में कहा गया है कि दस्तावेजों से सामना कराने पर नाथ ने स्वीकार किया कि उसने 2012 के बाद से अपनी पत्नी के बैंक खाते में अवैध रूप से 3.6 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए हैं.

नाथ ने यह भी स्वीकार किया कि उसने अपना वेतन बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और पिछले कई वर्षों में अपने खाते में 60 लाख रुपये स्थानांतरित किए, जिससे कंपनी को कुल 4.2 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.



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Monday, July 31, 2023

"अमित शाह चार दिनों तक मणिपुर में थे, शांति बहाली के लिए हरसंभव कदम उठाया" : अनुराग ठाकुर

केंद्रीय खेल और युवा मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने रविवार को विपक्षी दलों के इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव एलायंस (Indian National Developmental Inclusive Alliance) के प्रतिनिधिमंडल पर कटाक्ष किया और पूछा कि वे मणिपुर मुद्दे पर चर्चा से क्यों भाग रहे हैं. अनुराग ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "हम पहले दिन से ही मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है. मेरा सवाल है कि विपक्ष इससे क्यों भाग रहा है. मैं विपक्ष से कहना चाहता हूं कि वे मणिपुर की दो दिवसीय यात्रा के अनुभव को साझा करने और चर्चा में भाग लें.” उल्‍लेखनीय है कि विपक्षी गठबंधन का 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार को मणिपुर के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचा था, जहां 3 मई के बाद से जातीय संघर्ष और हिंसा देखी जा रही है. 

इसके साथ ही ठाकुर ने कहा, "कांग्रेस शासन तब विफल साबित हुआ जब मणिपुर में हजारों लोग मारे गए. उस समय न तो इंदिरा जी (पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) और न ही राजीव जी (पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी) ने कोई बयान दिया. वे (विपक्ष) हमसे बयान कैसे मांग रहे हैं?"

उन्होंने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री चार दिनों तक मणिपुर में थे. हमने मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए हरसंभव कदम उठाया. विपक्ष को सुर्खियों में बने रहने के लिए अराजकता नहीं फैलानी चाहिए. उसे राजनीति करने के बजाय चर्चा में भाग लेना चाहिए." 

मणिपुर हिंसा पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की टिप्पणी पर बोलते हुए ठाकुर ने कहा, "कृपया बंगाल की स्थिति के बारे में भी जागरूक रहें. आपको बंगाल से चुनाव लड़ना है. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या बंगाल में 'सब ठीक है'. उनके पास बंगाल में महिलाओं की दुर्दशा सुनने का समय नहीं है."

इससे पहले, चौधरी ने रविवार को कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों ने मणिपुर में लोगों की दुर्दशा को अनसुना कर दिया है.  

केंद्रीय मंत्री ठाकुर ने कहा, "संसद चल ​​रही है. विपक्ष से अनुरोध है कि वे संसद में आएं, चर्चा में भाग लें, अपने विचार रखें और सच सुनने का भी साहस रखें."

बता दें कि दोनों सदनों के 21 सदस्यीय विपक्षी प्रतिनिधिमंडल में अधीर रंजन चौधरी, गौरव गोगोई, के सुरेश और कांग्रेस के फूलो देवी नेताम शामिल थे. साथ ही जदयू के राजीव रंजन ललन सिंह, तृणमूल कांग्रेस से सुष्मिता देव, डीएमके से कनिमोझी, CPI के संतोष कुमार, माकपा से एए रहीम, राजद के मनोज कुमार झा, सपा के जावेद अली खान, झामुमो की महुआ माझी, एनसीपी के पीपी मोहम्मद फैजल, जेडीयू के अनिल प्रसाद हेगड़े, आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, AAP के सुशील गुप्ता, शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत, वीसीके के डी रविकुमार, वीसीके के थिरु थोल थिरुमावलवन और RLD के जयंत सिंह भी शामिल थे.  

गौरतलब है कि 20 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत के बाद से ही विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. से जुड़े सांसद मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तृत चर्चा और बयान की मांग कर रहे हैं. वहीं सरकार का कहना है कि वह इस पर चर्चा कराने को तैयार है. 

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Sunday, July 30, 2023

मणिपुर में जातीय संघर्ष से भारत की छवि खराब हो रही है: अधीर रंजन चौधरी

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को कहा कि मणिपुर में जातीय संघर्ष भारत की छवि को खराब कर रहा है और इसे समाप्त करने के लिए सभी दलों को एक शांतिपूर्ण समाधान खोजने की कोशिश करनी होगी. विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' (इंडिया) के 21 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए हिंसा प्रभावित मणिपुर के दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को यहां पहुंचा और पीड़ितों से मुलाकात की. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्षी गठबंधन के सांसदों के दौरे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे मात्र दिखावा करार दिया. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि ‘इंडिया' के सदस्यों का दौरा ‘‘मात्र दिखावा'' है. 

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि जब पूर्ववर्ती सरकारों के शासन में मणिपुर ‘‘जलता'' था, तब उन लोगों ने संसद में एक भी शब्द नहीं कहा, जो अब पूर्वोत्तर राज्य का दौरा कर रहे हैं. ठाकुर ने कहा, ‘‘जब मणिपुर महीनों बंद रहा करता था, तब उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा.''

अपने दो दिवसीय दौरे के पहले दिन, सांसदों ने इंफाल, बिष्णुपुर जिले के मोइरांग और चुराचांदपुर में कई राहत शिविरों का दौरा किया और जातीय हिंसा के पीड़ितों से मुलाकात की. 

चौधरी ने शनिवार शाम संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री कुछ नहीं कह रहे हैं और देश को गुमराह कर रहे हैं. वे कह रहे हैं कि मणिपुर में सब कुछ ठीक है, लेकिन ऐसा नहीं है. वे हमें संसद में बोलने की अनुमति नहीं दे रहे हैं.''

उन्होंने कहा, ‘‘हम यहां लोगों से मिलने आए हैं, हमने उनसे बात की और खौफनाक कहानियां सुनीं. अब, हम उन घटनाओं को संसद में उठाएंगे.''

इससे पहले, दिन में चौधरी ने कहा, ‘‘जातीय हिंसा ने मणिपुर, पूर्वोत्तर क्षेत्र और पूरे भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया है. हमें शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए. हम यहां कोई राजनीति करने नहीं आए.''

सांसद दिल्ली से विमान के जरिये मणिपुर पहुंचे. प्रतिनिधिमंडल यहां पहुंचने के बाद चुराचांदपुर में राहत शिविरों में रह रहे कुकी समुदाय के पीड़ितों से मिलने गया, जहां हाल में हिंसा की घटनाएं हुई हैं.

प्रतिनिधिमंडल के दौरे के संबंध में एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा, ‘‘वे सुरक्षा कारणों से इंफाल से हेलीकॉप्टर के जरिए चुराचांदपुर गए. इस समय केवल एक हेलीकॉप्टर उपलब्ध है, इसलिए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को दो टीम में बांटा गया और हेलीकॉप्टर ने उन्हें पहुंचाने के लिए दो फेरे लगाए.''

एक टीम में लोकसभा में कांग्रेस नेता चौधरी और अन्य शामिल थे. यह टीम चुराचांदपुर कॉलेज के ‘बॉयज हॉस्टल' में स्थापित राहत शिविर का दौरा करने के लिए सबसे पहले चुराचांदपुर के लिए रवाना हुई. 

मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के एक सूत्र ने बताया कि एक अन्य टीम में लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई और अन्य शामिल थे. यह टीम चुराचांदपुर में डॉन बॉस्को स्कूल में एक राहत शिविर का दौरा करने गई. 

मणिपुर मामले का राजनीतिकरण करने के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर गोगोई ने कहा, ‘‘हमें प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर बहुत खुशी होती, लेकिन वह परिदृश्य में कहीं नजर ही नहीं आ रहे. उन्होंने संसद में मणिपुर को लेकर एक शब्द नहीं कहा.''

उन्होंने कहा, ‘‘राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) इस परिदृश्य से पूरी तरह गायब है, लेकिन ‘इंडिया' मौजूद है. ‘इंडिया' मणिपुर के लोगों के साथ खड़ा है. हम राज्य में शांति लाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे.''

प्रतिनिधिमंडल में शामिल और केरल से कांग्रेस के सांसद के. सुरेश ने केंद्र और मणिपुर सरकार पर स्थिति से ‘‘खराब तरीके से निपटने'' का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘‘हम यहां जमीनी हालात का आकलन करने और हिंसा पीड़ितों से मिलने आए हैं. दिल्ली लौटने के बाद, हम अपने आकलन के आधार पर विभिन्न मुद्दों को संसद में उठाएंगे और इन मुद्दों पर केंद्र का ध्यान खींचने की कोशिश करेंगे.''

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा ‘‘ध्रुवीकरण कर रही है'' और उसने दो परस्पर विरोधी समुदायों में से ‘‘एक को समर्थन दिया'' है. 

उन्होंने कहा, ‘‘यह राज्य में अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भाजपा द्वारा पैदा की गई समस्या है. भाजपा लोगों को जाति, धर्म और भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है.''

एमपीसीसी के सूत्र ने बताया कि इंफाल लौटने के बाद, चौधरी के नेतृत्व में टीम ने मेइती समुदाय के पीड़ितों से मिलने के लिए सड़क मार्ग से बिष्णुपुर जिले के मोइरांग कॉलेज में एक राहत शिविर का दौरा किया. 

विपक्षी सांसदों की दूसरी टीम इंफाल पूर्वी जिले के अकंपत में ‘आइडियल गर्ल्स कॉलेज' राहत शिविर गई. 

एमपीसीसी के अधिकारी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल रविवार सुबह राजभवन में राज्यपाल अनसुइया उइके से मिलेगा और मणिपुर की मौजूदा स्थिति एवं शांति बहाल करने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों पर बात करेगा. 

इस प्रतिनिधिमंडल में चौधरी और गोगोई के अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुष्मिता देव, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की महुआ माजी, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोई, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के जयंत चौधरी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मनोज कुमार झा, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन, जनता दल (यूनाइटेड) के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह एवं अनिल प्रसाद हेगड़े, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के संदोश कुमार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के ए ए रहीम भी शामिल हैं. 

राजद के झा ने कहा, ‘‘इस खूबसूरत राज्य के लोग पिछले तीन महीने से कष्ट झेल रहे हैं. सरकार की ओर से कोई भी पीड़ितों की शिकायतें सुनने नहीं आया.''

झा ने कहा, ‘‘आज हम यहां कुछ कहने नहीं, बल्कि सिर्फ उनकी बात सुनने आए हैं. हम उनका दर्द महसूस करते हैं और इसीलिए हम यहां हैं.''

कनिमोई ने कहा कि ‘इंडिया' के सांसद दोनों समुदायों के लोगों की आवाज सुनेंगे. द्रमुक नेता ने कहा, ‘‘वे संकट में हैं और केंद्र सरकार उनकी समस्या का समाधान करने में विफल रही है.''

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता एवं सांसद अरविंद सावंत ने प्रधानमंत्री पर संसद में मणिपुर मुद्दे पर चुप रहने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि वह (मोदी) संसद में बोलें, लेकिन उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा.''

चार मई को मणिपुर में भीड़ द्वारा निर्वस्त्र करके घुमाई गई दो महिलाओं में से एक की मां ने विपक्षी गठबंधन के सांसदों से उस दिन मारे गये उनके पति और बेटे के शव उन्हें दिखाये जाने में मदद करने का आग्रह किया. 

जब तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव और द्रमुक सांसद कनिमोई ने पीड़ितों में से एक की मां से मुलाकात की, तो उन्होंने उनसे कम से कम उनके बेटे और पति के शव दिखाने में मदद करने का आग्रह किया. 

उन्होंने दोनों नेताओं को यह भी बताया कि स्थिति ऐसी है कि दोनों समुदाय कुकी और मेइती अब एक साथ नहीं रह सकते हैं. 

देव ने कहा, ‘‘उनकी बेटी के साथ बलात्कार किया गया और उनके पति और बेटे को भीड़ ने मणिपुर पुलिस की मौजूदगी में मार डाला, लेकिन आज तक एक भी पुलिस अधिकारी को निलंबित नहीं किया गया है.''

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है. वे कह रहे हैं कि 1,000 से अधिक लोगों की भीड़ थी और उन्होंने एक विशेष मांग की है, जिसे मैं राज्यपाल के सामने उठाऊंगी.''

मणिपुर में रहने वाले कुकी समुदाय द्वारा ‘अलग प्रशासन' की मांग के खिलाफ मेइती समुदाय ने शनिवार को ‘विशाल रैली' आयोजित की जिसमें घाटी के पांच जिलों के हजारों लोगों ने हिस्सा लिया. 

रैली में शामिल लोगों ने राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखने की मांग की जो मई महीने के शुरुआत से ही जातीय हिंसा का सामना कर रहा है. 

कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटिग्रीटी (सीओसीओएमआई) द्वारा आयोजित रैली की शुरुआत इंफाल पश्चिम जिले के थांगमेबंद से शुरू हुई और पांच किलोमीटर की दूरी तय कर इंफाल पूर्वी जिले के हप्ता कंगजेयबुंग में संपन्न हुई. 

मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कहा कि वह उस नफरत और अविश्वास को खत्म करने के लिए काम कर रही हैं जिसने मेइती और कुकी समुदायों के बीच संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है. 

चुराचांदपुर जिले में एक राहत शिविर का दौरा करने के बाद पत्रकारों से उइके ने कहा कि वह दोनों समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों से मिल रही हैं, और राज्य में शांति का माहौल बहाल करने के लिए उनका सहयोग मांग रही हैं. 

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां दूसरी बार आई हूं, अपने भाई-बहनों का दुख बांटने के लिए. लगभग तीन महीने हो गए हैं ये लोग अपने घरों से दूर हैं. मैं यहां ये देखने आई हूं कि कम से कम इन लोगों को शिविर में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.''

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. 

मणिपुर की आबादी में मेइती समुदाय के लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासियों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे ज्यादातर पर्वतीय जिलों में रहते हैं. 

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