Monday, July 3, 2023

अजत पवर कय एकनथ शद क जगह लग : कगरस न उठय सवल

कांग्रेस ने महाराष्ट्र और सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर उभरती स्थिति को देखते हुए संकेत दिया है कि वह शरद पवार के साथ खड़ी है. कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने पवार को फोन किया. शरद पवार के भतीजे अजित पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद एनसीपी में विभाजन की संभावना बन गई है. मीडिया से बातचीत में अजित पवार ने दावा किया कि उन्हें व्यावहारिक रूप से पूरी पार्टी का समर्थन प्राप्त है. 

हालांकि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अजित पवार के पीछे कितने विधायक हैं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. साथ ही उन्होंने साफ किया कि देश के सबसे दक्ष नेताओं में से एक और अनुभवी शरद पवार कम से कम जनता की अदालत में लड़ाई जरूर लड़ेंगे. 

चव्हाण ने कहा कि शरद पवार पहले भी उठ खड़े हुए हैं और वह कल से अपना अभियान शुरू कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि बागियों को आखिरकार जमीनी स्तर के नेताओं का सामना करना पड़ेगा और यदि वे इसे अस्वीकार करते हैं तो विद्रोह समाप्त हो जाएगा. उन्होंने कहा, "उन्हें वापस आना होगा क्योंकि आखिर में उन्हें चुनाव लड़ना है."

चव्हाण ने कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि सत्तारूढ़ गठबंधन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भाग्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है.

चव्‍हाण ने एक खास इंटरव्‍यू में एनडीटीवी को बताया कि एकनाथ शिंदे के खिलाफ अयोग्यता याचिका का निपटारा 11 अगस्त से पहले किया जाना है, यानी उस दिन से 90 दिनों के भीतर जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्पीकर को भेजा था. हमें यकीन है कि एकनाथ शिंदे और उनके 60 सहयोगियों को अयोग्य ठहराया जाएगा. 

उन्होंने कहा, "अगर वे अयोग्य हो जाते हैं तो हमें नए मुख्यमंत्री की जरूरत होगी. अब क्या भाजपा ने अजित पवार से वादा किया है कि वह एकनाथ शिंदे के उत्तराधिकारी होंगे? हम नहीं जानते."

चव्‍हाण ने भाजपा पर विपक्ष को तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया और कहा, "भाजपा किसी भी तरह विपक्ष के संयुक्‍त हमले का सामना नहीं कर सकती थी."

उन्होंने संकेत दिया कि एनसीपी के लिए स्थिति खराब नहीं है. चव्हाण ने कहा, "जो लोग अजित पवार के साथ चले गए हैं, उनके खिलाफ ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की गंभीर जांच है. आप कह सकते हैं कि एनसीपी का ईडी गुट चला गया है."

महा विकास अघाड़ी गठबंधन में कांग्रेस  इकलौती ऐसी पार्टी है, जिसमें टूट नहीं हुई है. इसे लेकर चव्हाण ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले भी कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन दो-तिहाई संख्या 30 विधायकों की है जो आसान नहीं होगी. एक या दो शामिल हो सकते हैं."

उन्होंने कहा, कांग्रेस अपने दल की रखवाली कर रही है और यह सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को एक बैठक करेगी कि सब कुछ ठीक है. 

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अजत पवर क BJP क कय जररत? NCP नत न एकनथ शद क चतय

अजित पवार के अचानक शिंदे सरकार में शामिल होने के कदम के बार में अनजान शरद पवार की एनसीपी ने कहा कि यह मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए अच्छी खबर नहीं है. पार्टी ने संकेत दिए कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से एकनाथ शिंदे का रिप्लेसमेंट ढूंढ़ा जा रहा था.  रविवार शाम को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि "एकनाथ शिंदे की शक्ति कम हो जाएगी." इस दौरान ही उन्होंने अजित पवार के उस दावे का खंडन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूरी एनसीपी उनके साथ है.

उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए दावा किया कि "कुछ लोगों" को मुख्यमंत्री के काम करने का तरीका पसंद नहीं आता. पाटिल ने कहा, "अब उनकी (एकनाथ शिंदे के) पावर को कम करने के लिए, अजित पवार को उस सरकार में शामिल किया गया है जो पहले से ही बहुमत में है." जब एकनाथ शिंदे को गठबंधन की सरकार में मुख्यमंत्री पद दिया गया, लेकिन मतभेद रहे हैं. शिंदे के गुट के नेताओं का दावा है कि भाजपा बड़े भाई की भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है.

ऐसी खबरें हैं कि भाजपा चाहती है कि राज्य मंत्रिमंडल में आगामी फेरबदल से पहले एनसीपी मंत्रियों के लिए जगह बनाने के लिए शिंदे गुट के 10 मंत्रियों को हटा दिया जाए. अप्रैल महीने में एकनाथ शिंदे गुट ने कहा था कि अगर अजित पवार एनसीपी के अन्य नेताओं के साथ गठबंधन में शामिल होते हैं, तो वे सरकार का हिस्सा नहीं रहेंगे. ऐसा कहा जाता है कि मामला केंद्रीय मंत्री और भाजपा के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह के हस्तक्षेप से सुलझा लिया गया था, जिन्होंने पिछले हफ्ते दिल्ली में एकनाथ शिंदे और अजित पवार दोनों से मुलाकात की थी.

रविवार को एकनाथ शिंदे ने एनसीपी नेता का गर्मजोशी से स्वागत किया. एकनाथ शिंदे ने कहा, "अब डबल इंजन सरकार के पास ट्रिपल इंजन है. अब राज्य (विकास के पथ पर) तेजी से आगे बढ़ेगा. अब हमारे पास एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री हैं. इससे राज्य के तेजी से विकास में मदद मिलेगी." बीजेपी ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. पार्टी के सूत्रों ने कहा कि अजित पवार का गठबंधन सरकार को समर्थन देने का फैसला कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को विपक्ष के नेता और 2024 के लिए पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करने की कोशिश का नतीजा है. एक नेता ने कहा, ''राहुल गांधी और कांग्रेस की मनमानी एनसीपी के टूटने की वजह है."

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"शरद पवर हमर नत" : अजत पवर क शपथ क दरन रजभवन म मजद रह परफलल पटल

एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ( Ajit Pawar) ने शिंदे सरकार में शामिल होकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया. इसके बाद अब सवाल खड़ा हो गया कि "असली एनसीपी" कौन है? पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा, ''हम एक पार्टी हैं और शरद पवार हमारे नेता हैं." प्रफुल्ल पटेल एनसीपी के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अजित पवार के साथ मिलकर शरद पवार से  बगावत की है. रविवार को महाराष्ट्र राजभवन में अजित पवार ने आठ अन्य एनसीपी विधायकों के साथ मंत्री पद की शपथ ली है. इस दौरान प्रफुल्ल पटेल भी राजभवन में मौजूद थे. 

एनडीटीवी से बात करते हुए पटेल ने कहा, "कोई भी ना तो पार्टी से अलग हुआ है, और ना ही किसी ने पार्टी बदली है. कभी-कभी पार्टी के भीतर मतभेद होते हैं और फिर इन्हें सुलझा लिया जाता है. आप कुछ और दिन इंतजार करें और आप देखेंगे कि मेरे कहने का क्या मतलब है." रविवार को शपथ लेने वालों में एनसीपी नेताओं में छगन भुजबल, दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे, अदिति तटकरे, धर्मराव अत्राम, अनिल पाटिल और संजय बनसोडे शामिल हैं.

शपथ समारोह के बाद, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने जोर देकर कहा कि उन्हें "पूरी एनसीपी" का समर्थन प्राप्त है, लेकिन इसके तुरंत बाद उनके चाचा शरद पवार ने इसे खारिज कर दिया. जब शरद पवार से पत्रकारों ने पूछा कि अब पार्टी का चेहरा कौन होगा, तो उन्होंने यह जवाब दिया "शरद पवार". प्रफुल्ल पटेल ने यह भी कहा कि यह निर्णय "पार्टी विधायकों और पार्टी के नेताओं के साथ व्यापक परामर्श के बाद" लिया गया है.

इससे पहले शरद पवार ने कहा कि वह "गलत रास्ता" अपनाने के लिए प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को छोड़कर किसी से भी नाराज नहीं हैं. उन्होंने कहा, "मैं प्रफुल्ल पटेल और तटकरे को छोड़कर किसी से नाराज नहीं हूं. मैंने उन्हें महासचिव नियुक्त किया था, लेकिन उन्होंने पार्टी अध्यक्ष के दिशानिर्देशों दरकिनार कर और गलत रास्ता अपना लिया. उन्हें उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है."

उनकी पार्टी इस बात पर जोर दे रही है कि जिन विधायकों के बारे में अजित पवार दावा कर रहे हैं कि वे उनका समर्थन कर रहे हैं, वे वास्तव में अभी भी शरद पवार के साथ हैं. शरद पवार के करीबी सहयोगी माने जाने वाले पटेल को पिछले महीने पार्टी के 24वें स्थापना दिवस पर सुप्रिया सुले के साथ एनसीपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. तटकरे को एनसीपी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था, जिनकी बेटी अदिति ने अजित पवार के साथ मंत्री पद की शपथ ली है. बता दें, चार साल के अंदर यह तीसरी बार है कि अजित पवार तीन मुख्यमंत्रियों-देवेंद्र फड़णवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के अंडर में डिप्टी सीएम बने हैं.

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Sunday, July 2, 2023

मणपर सएम एन बरन सह न बतय कय वपस लय इसतफ दन क फसल

मणिपुर के मुख्‍यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने इस्‍तीफे देने के फैसले को लेकर कहा कि मैं बहुत ही दुखी था. इसीलिए मैंने इस्‍तीफा देने का फैसला किया था. इस मुद्दे  पर पहली बार बोलते हुए उन्‍होंने एनडीटीवी के साथ एक खास बातचीत में कहा कि मुझे लगा कि जब लोगों को मुझ पर भरोसा ही नहीं है तो फिर मुख्‍यमंत्री रहने का क्‍या मतलब है. साथ ही उन्‍होंने बताया कि आखिर क्‍यों उन्‍होंने इस्‍तीफा देने का फैसला वापस लिया. बता दें कि मणिपुर हिंसा के दौरान अब तक सौ से ज्‍यादा लोगों की जान जा चुकी है.  

मणिपुर सीएम ने कहा, "मैं अपने सहकर्मियों से कहता था कि लोग राजनेताओं को उनके व्यवहार के चलते गाली देते हैं. इसलिए, राजनेताओं को अपना व्यवहार और कार्यशैली को बदलना होगा, जिससे लोग जैसा दूसरों का सम्‍मान करते हैं, वैसा हमारा भी सम्मान करें. यही मेरा सिद्धांत था. तो मैंने सोचा कि यदि कोई मेरी इज्‍जत ही नहीं कर रहा है तो इसका क्‍या मतलब है."

उन्‍होंने इस्‍तीफा देने से जाने से पहले अपने घर के बाहर जुटी भीड़ को लेकर कहा कि मैं इससे काफी आश्‍चर्यचकित था. जब मैंने भीड़ को देखा तो मैंने भगवान और अपने लोगों को धन्यवाद दिया जो मुझसे इतना प्यार करते हैं. उन्‍होंने मुझे जो विश्‍वास दिया, उसके कारण मैंने अपना निर्णय बदला. उन्‍होंने कहा कि राज्‍य और देश के लोगों से मैंने वादा किया कि मैं देश और राज्‍य के लिए काम करता रहूंगा. 

मणिपुर सीएम ने कहा कि राज्‍य में शांति के लिए बातचीत करने की जरूरत है. उन्‍होंने कहा, "मैंने कुछ ही घंटे पहले अपने कुकी सहकर्मियों को टेलीफोन किया और अनुरोध किया कि जो हो गया है वो हो गया है. पति पत्‍नी में भी झगड़ा होता है, दो महीने हो गए हैं. हमने काफी भुगता है. कृपया वापस आ जाइए. हमें साथ रहना है, साथ जीना है." साथ ही उन्‍होंने कहा कि मैं मणिपुर के लोगों को धन्‍यवाद देता हूं कि आप लोगों का समर्थन और प्रेम मिला. आप लोगों की वजह से ही शांति आ रही है. साथ ही उन्‍होंने हर वर्ग और समुदाय के लोगों से शांति की अपील की. 

बता दें कि मणिपुर में बहुसंख्यक मैतेई और अल्पसंख्यक कुकी समुदाय के बीच तीन मई को जातीय संघर्ष शुरू हुआ था. इस संघर्ष में अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. साथ ही इसके कारण हजारों की संख्‍या में लोगों को विस्‍थापित होना पड़ा है. 

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यनफरम सवल कड कय ह? कय कदर सरकर उततरखड सरकर क डरफट पर करग वचर

विदेश दौरे से वापस आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता को लेकर बयान दिया. भोपाल में उन्होंने कहा कि एक घर में दो क़ानून नहीं हो सकते हैं. प्रधानमंत्री के भाषण में संकेत मिलने के बाद इसका विरोध भी शुरू हो गया है. इसके तहत हर नागरिक के लिए एक समान क़ानून होगा. कानून का किसी धर्म विशेष से ताल्लुक नहीं होगा. अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ ख़त्म हो जाएंगे. शादी, तलाक़ और ज़मीन-जायदाद के मामले में एक ही क़ानून चलेगा. धर्म के आधार पर किसी को भी विशेष लाभ नहीं मिलेगा.

यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड संविधान के नीति निर्देशक तत्व का हिस्सा है

यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड का ज़िक्र संविधान में भी दिखता है. संविधान के निर्माताओं ने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड को नीति निर्देशक तत्वों के तहत भविष्य के एक लक्ष्य की तरह छोड़ दिया था. संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति निर्देशक तत्वों के तहत कहा गया है कि भारत के राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को सुरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए. लेकिन साथ ही अनुच्छेद 37 में कहा गया है कि नीति निर्देशक तत्वों का उद्देश्य लोगों के लिए सामाजिक आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना और भारत को एक कल्याणकारी राज्य के रूप में स्थापित करना है.

गौरतलब है कि नीति निर्देशक तत्व सरकार की ज़िम्मेदारी को दिखाते हैं लेकिन इन पर अमल ज़रूरी नहीं है. लेकिन देर-सबेर अमल हो सके तो बेहतर है. मौलिक अधिकारों की तरह इन्हें लेकर न्यायालय में सरकार को चुनौती नहीं दी जा सकती है.

 हर धर्म में अपने-अपने नियम है

  • मुस्लिम पर्सनल लॉ में नाबालिग लड़की की शादी की इजाज़त है.
  • ईसाई महिलाएं अपने बच्चों की प्राकृतिक अभिभावक नहीं मानी जाती.
  • सिखों के तलाक़ में हिंदू विवाह क़ानून चलता है.
  • पारसी गोद ली हुई बेटी का अधिकार नहीं मानते.
  •  हिंदू क़ानून में शादी से बाहर पैदा हुए बच्चों का कोई हक़ नहीं है.

अब सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि आखिर ऐसा समान नागरिक संहिता बनाना क्या आसान काम है जिससे सभी दल के लोग सहमत हों. फिलहाल उत्तराखंड में एक विशेष पैनल बनाया गया था जिसने अब उत्तराखंड में कॉमन सिविल कोड का मसौदा तैयार कर लिया है. उसकी कुछ ख़ास बातें आपको हम बता रहे हैं.

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता का क्या है ड्राफ्ट? 

  • लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल की जाए.
  • शादी का पंजीकरण अनिवार्य हो.
  • लिव-इन रिलेशन में रहने वाले को परिवार को जानकारी देनी होगी.
  • हलाला, इद्दत जैसी कुरीतियों समाप्त की जाए.
  • आमतौर पर मुस्लिम धर्म में शादी टूटने पर ये प्रथाएं अमल में.
  • सभी धर्म के लोग क़ानून के माध्यम से तलाक लें.
  • एक से ज़्यादा पति या पत्नी रखने की इजाज़त नहीं होगी. 

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल फिलहाल इसपर अपना स्टैंड खुलकर साफ़ नहीं कर रहे हैं. ऐसे में अब सरकार के सामने क्या-क्या विकल्प है.सरकार ने यूसीसी पर विधि आयोग बनाया है जो कि इस वक्त आम लोगों से राय ले रहा है. 

यूसीसी कैसे बनेगा?

  • विधि आयोग और उत्तराखंड कानून (अगर बनता है) के आधार पर केंद्र सरकार अपना विधेयक बना सकती है.
  • उस विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद संसद में रखा जाएगा.
  • संभवत यह शीतकालीन सत्र में ही हो.
  • संसद में रखने के बाद सरकार पर है कि इसे स्टैंडिंग कमेटी में भेजे या न भेजे.
  • अनुच्छेद 370 के खात्मे के विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी में नहीं भेजा गया था.
  • संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बनेगा.
  •  इस बीच, कुछ अन्य बीजेपी शासित राज्य उत्तराखंड के कानून के आधार पर अपने यहां कानून बना सकते हैं.


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लपरवह क हद! असपतल क बहर दरद स करह रह थ महल भरत नह हन पर वरड क बहर ह दय बचच क जनम

गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में 12 घंटे से अधिक समय तक इंतजार करने के बावजूद भर्ती नहीं करने पर एक महिला को कथित तौर पर यहां सदर अस्पताल के प्रसूति वार्ड के बाहर अपने बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा. अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक महिला ने शुक्रवार देर रात प्रसूति वार्ड के बाहर बच्चे को जन्म दिया. इस घटना पर एक सोशल मीडिया पोस्ट जल्द ही वायरल हो गया, जिसके बाद प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) को इस सिलसिले में जांच के आदेश देने पड़े.

महिला का पति नरेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के हरदोई का रहने वाला है. नरेंद्र सिंह ने बताया कि वह एक कंपनी में काम करता है और पिछले कई वर्षों से अपने परिवार के साथ लक्ष्मण विहार कॉलोनी में रह रहा है. नरेंद्र सिंह ने सदर अस्पताल के एक चिकित्सक और एक नर्स की कथित लापरवाही के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसके कारण उनकी पत्नी को अस्पताल के वार्ड के बाहर बच्ची को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

नरेंद्र ने कहा, ‘‘मैं अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर शुक्रवार सुबह करीब सात बजे सदर अस्पताल पहुंचा, क्योंकि उसे पेट में दर्द हो रहा था. अस्पताल में, प्रसूति वार्ड में मौजूद नर्स ने दर्द से कराह रही मेरी पत्नी की जांच किए बिना मुझे बाद में आने के लिए कहा.''

महिला के पति ने कहा, ‘‘ मैंने वार्ड में मौजूद एक चिकित्सक से भी मुलाकात की. लेकिन चिकित्सक ने भी कोई ध्यान नहीं दिया. ऐसे में दोपहर 12 बजे तक हम इलाज के लिए गुहार लगाते रहे. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. मैं परेशान होकर अस्पताल परिसर के पार्क में बैठ गया और रात में प्रसूति वार्ड के बाहर इंतजार करने लगा. लेकिन मेरी पत्नी को वार्ड में भर्ती नहीं किया गया. 12 घंटे से अधिक समय तक इंतजार करने के बाद, उसने शुक्रवार देर रात अस्पताल की पहली मंजिल पर प्रसूति वार्ड के बाहर बच्ची को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा. ''

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एक ह करयकरम म थ CJI और सलसटर जनरल समत कई जज तभ तसत सतलवड क आ गई यचक

तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. शनिवार होने के कारण अदालत में अवकाश का दिन था इस कारण नई दिल्ली के चिन्मया मिशन में सुप्रीम कोर्ट के कई वर्तमान और पूर्व जज पहुंचे थे.  दरअसल यहां ऑडिटोरियम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेटी सुवर्णा विश्वनाथन का भरतनाट्यम नृत्य कार्यक्रम चल रहा था.

इसमें CJI डी वाई चंद्रचूड़ के अलावा सुप्रीम कोर्ट के कई वर्तमान जज और पूर्व जज भी मौजूद थे. इसके अलावा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य वरिष्ठ वकील भी इसमें शामिल थे. करीब 6 बजे जब नृत्य शुरू हो चुका था इस दौरान ही खबर आई कि तीस्ता ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई है. इस पर 6.30 बजे जस्टिस ए एस ओक और जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच सुनवाई करेगी.

इसके बाद SG तुषार मेहता को इसकी सूचना दी गई और वो तुरंत वहां से निकल गए. इसके बाद वो बेंच के सामने पेश हुए और कुछ देर की सुनवाई के बाद जजों की राय अलग- अलग रही और मामले को तीन जजों के पास भेजने के लिए सीजेआई चंद्रचूड़ के पास भेज दिया गया. इधर करीब सात बजे मामले की सूचना CJI डी वाई चंद्रचूड को दी गई और वो तुरंत उठाकर नृत्य को छोड़कर बाहर जाकर बात करने लगे.

 इस बीच SG तुषार मेहता वापस कार्यक्रम में पहुंच गए थोड़ी देर बाद अचानक CJI फिर से बाहर की ओर जाते दिखे. लेकिन दस मिनट बाद फिर से आकर कार्यक्रम देखने लगे. हालांकि इसके बाद नृत्य कार्यक्रम खत्म हो गया और इसके बाद सब जाने लगे.  तभी CJI चंद्रचूड़ ने ऑडीटोरियम में मौजूद जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ए एस बोपन्ना को इस केस के बारे में बताया.  दोनों ने इस मामले में अपनी सहमति दे दी और फिर सीजेआई ने इस मामले में जस्टिस बी आर गवई ,  जस्टिस ए एस बोपन्ना  और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच का गठन कर दिया जिसने रात 9.15 बजे सुनवाई की.

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वपकष एकत क कई गरट नह...कयक व एक दसर स लडत रह ह: PM मद

मध्य प्रदेश/शहडोल: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विरोधी गुट बनाने के विपक्षी दलों के प्रयासों के संदर्भ में शनिवार को कहा कि कांग्रेस और अन्य ‘‘परिवार-केंद्रित'' पार्टियां लोगों को ‘‘झूठी'' गारंटी दे रही हैं और उनके बीच पुरानी कलह से पता चलता है कि विपक्षी एकता की कोई गारंटी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वंशवादी पार्टियां केवल अपने परिवार के कल्याण के लिए काम करती हैं. PM मोदी ने कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं और जमानत पर हैं, वे उन लोगों के साथ हैं जिन्हें घोटालों के लिए सजा सुनाई गई है.

प्रधानमंत्री ने शनिवार को यहां एक पोर्टल का अनावरण कर ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047' की शुरुआत की और इस रोग के प्रबंधन के लिए दिशा निर्देश और इसकी निगरानी के लिए विभिन्न मॉड्यूल जारी करने के बाद अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा. इस मौके पर मोदी ने देश में तीन करोड़ से ज्यादा डिजिटल आयुष्मान कार्ड और मध्य प्रदेश में एक करोड़ पीवीसी आयुष्मान कार्ड के वितरण की शुरुआत की.

मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य के आदिवासी अंचल में पहुंचने के बाद मोदी ने कहा कि रानी दुर्गावती की जयंती पूरे भारत में मनाई जाएगी और एक डाक टिकट जारी किया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों पर कटाक्ष किया और लोगों से कांग्रेस सहित ‘‘परिवार-केंद्रित'' राजनीतिक दलों द्वारा दी जा रही ‘‘फर्जी गारंटी'' से सावधान रहने की चेतावनी दी.

उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों की अपनी कोई गारंटी नहीं है, वो आपके पास गारंटी वाली नयी-नयी योजना लेकर आ रहे हैं. उनकी गारंटी में छिपे खोट को पहचान लीजिए, झूठी गारंटी के नाम पर जारी उनके धोखे को भांप लीजिए.'' हाल में पटना में हुई भाजपा विरोधी पार्टियों की बैठक के स्पष्ट संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस सहित परिवार केंद्रित पार्टियां एक साथ मिल रही हैं. ऐसे लोग (विपक्षी दल) आज एक साथ आने का दावा कर रहे हैं जो कभी पानी पी-पी कर एक दूसरे को कोसते थे. इसका मतलब है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है. इस मतलब यह है कि यह विपक्षी एकता की गारंटी नहीं है.''

उन्होंने कहा कि जब भी वे मुफ्त बिजली की गारंटी देते हैं तो इसका मतलब है कि वे बिजली दरें बढ़ाने जा रहे हैं. उनकी मुफ्त यात्रा की गारंटी का मतलब है कि राज्य में परिवहन व्यवस्था बर्बाद हो जाएगी.'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जब वे पेंशन की गारंटी देते हैं तो इसका मतलब है कि कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिलेगा. जब वे सस्ते पेट्रोल उपलब्ध कराने की गारंटी देते हैं, तो मतलब है कि वे कर बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. जब वे नौकरियां प्रदान करने की गारंटी देते हैं, तो मतलब है कि वे उद्योगों और व्यापार को बर्बाद करने वाली नीतियां लाएंगे. कांग्रेस जैसी पार्टियों द्वारा दी जा रही गारंटी का मतलब है- नियत में खोट और गरीब पर चोट.''

PM मोदी ने कहा कि वे (विपक्षी दल) पिछले 70 वर्षों के दौरान गरीबों को भरपेट भोजन उपलब्ध कराने की गारंटी देने में विफल रहे, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना' के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन की गारंटी दी है. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबों के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन भाजपा नीत सरकार ने 50 करोड़ गरीब लाभार्थियों को ‘आयुष्मान योजना' के तहत मुफ्त इलाज की गारंटी दी है.

PM मोदी ने कहा कि उनके नेतृत्व वाली सरकार ने ‘उज्ज्वला योजना' के तहत 10 करोड़ महिलाओं को धुआं रहित खाना पकाने की गारंटी दी है और आठ करोड़ लाभार्थियों को ‘मुद्रा योजना' के तहत स्वरोजगार के लिए ऋण दिया है, लेकिन पिछली सरकारों ने लोगों के लिए कुछ नहीं किया.

उन्होंने कहा कि ये वंशवादी पार्टियां केवल अपने परिवार के कल्याण के लिए काम करती हैं. मोदी ने पटना सम्मेलन के स्पष्ट संदर्भ में कहा, ‘‘उनके पास देश के सामान्य परिवार को आगे ले जाने की गारंटी नहीं है, जो लोग भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं वे जमानत पर बाहर हैं. वे उन लोगों के साथ हैं, जिन्हें घोटालों के लिए सजा सुनाई गई है.''

पटना सम्मेलन में कांग्रेस, जनता दल (यूनाइटेड) (जद-यू), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), आम आदमी पार्टी (आप) और अन्य नेताओं ने मुलाकात की थी. मोदी ने कहा, ‘‘ऐसी झूठी गारंटी से दूर रहें. वे एक सुर में देश के खिलाफ बयान दे रहे हैं. वे राष्ट्र-विरोधी तत्वों के साथ बैठकें कर रहे हैं. वे गारंटी देकर चले जाएंगे, लेकिन भुगतना आपको पड़ेगा.''

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कुछ लाभार्थियों को ‘सिकल सेल के परामर्श कार्ड' वितरित किए. उन्होंने इस दौरान कुछ लाभार्थियों को ‘आयुष्मान कार्ड' और ‘पीवीसी आयुष्मान भारत कार्ड' भी सौंपे. उन्होंने कहा कि ‘आयुष्मान कार्ड' धारकों को अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक के इलाज की गारंटी है. प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, ‘‘यह मोदी की गारंटी है.'' उन्होंने कहा कि सिकल सेल और आयुष्मान योजना के सबसे बड़े लाभार्थी गोंड, भील और अन्य आदिवासी समाज के लोग हैं.

मोदी ने इस मौके पर कहा, ‘‘पूरी दुनिया में ‘सिकल सेल एनीमिया' के जितने मामले होते हैं, उनमें से आधे अकेले हमारे देश में होते हैं. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि पिछले 70 वर्षों में कभी इसकी चिंता नहीं हुई. इससे निपटने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाया गया.''

उन्होंने अपनी जापान यात्रा के दौरान सिकल सेल एनीमिया बीमारी पर औषधि क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेता (2012) एस. यामानका से की गई चर्चा को याद करते हुए कहा, ‘‘यह बीमारी परिवारों को बिखेर देती है. यह बीमारी न पानी से होती है, न हवा से और न भोजन से फैलती है. यह आनुवंशिक बीमारी है, यानी माता-पिता से ही बच्चे में आती है.''

मोदी ने कहा कि केंद्र के प्रयासों से टीबी के मामलों में कमी आई है, जिसे 2025 तक भारत से पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा. इसके अलावा, भारत में काला जार, कुष्ठ रोग और मलेरिया के मामलों की संख्या में काफी कमी आई है. उन्होंने कहा, ‘‘2013 में कालाजार के 11 हजार मामले थे, अब इनकी संख्या एक हजार से भी कम रह गई है. 2013 में मलेरिया के दस लाख मामले थे, अब 2022 में घटकर दो लाख से भी कम हो गए. कुष्ठ रोग के मामले भी सवा लाख से कम होकर 70-75 हजार हो गए हैं.''

उन्होंने कहा कि शनिवार को एक करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड सौंपे गए हैं, जो ‘‘गरीबों के लिए पांच लाख रुपये के एटीएम कार्ड'' के तौर पर काम करेगा, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है. उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति ने आदिवासी छात्रों के सामने आने वाली भाषा की चुनौती का समाधान किया है. मोदी ने कहा कि इसका विरोध वे लोग कर रहे हैं जो झूठी गारंटी देते हैं.

उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों और पिछली सरकारों ने आदिवासियों और उनके नायकों की अनदेखी की. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती राष्ट्रीय स्तर पर मनाएगी. उनके जीवन पर एक फिल्म बनाई जाएगी और एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया जाएगा.''

मोदी ने क्षेत्र में एक जनजातीय विश्वविद्यालय का नाम ‘‘परिवार के सदस्य'' के नाम पर रखने के लिए कांग्रेस की आलोचना की, जबकि भाजपा ने ऐसे संस्थानों का नाम आदिवासी नायकों के नाम पर रखा. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सिकल सेल एनीमिया से मुक्ति का ये अभियान अमृत काल का प्रमुख मिशन बनेगा. मुझे पूर्ण विश्वास है कि जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा यानी 2047 तक हम सब मिलकर एक मिशन मोड में अभियान चलाकर इस सिकल सेल एनीमिया से अपने आदिवासियों और देश को मुक्ति दिलाएंगे.''

उन्होंने कहा, ‘‘आदिवासी समाज की इस सबसे बड़ी चुनौती को हल करने का बीड़ा अब हमारी सरकार ने उठाया है. आदिवासी समाज हमारे लिये सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, ये हमारे लिए संवेदनशीलता का विषय है, भावनात्मक विषय है.'' मोदी ने कहा, ‘‘आज शहडोल की इस धरती पर देश आदिवासियों को सिकल सेल एनीमिया से मुक्ति का बड़ा संकल्प ले रहा है.''

उन्होंने कहा, ‘‘यह संकल्प हमारे देश के आदिवासी भाई-बहनों के जीवन को सुरक्षित बनाने का है. यह संकल्प है सिकल सेल एनीमिया की बीमारी से मुक्ति का. यह संकल्प है हर साल सिकल सेल एनीमिया की गिरफ्त में आने वाले 2.5 लाख बच्चों और उनके परिवारजनों के जीवन बचाने का.''

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने आदिवासियों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए स्मार्ट कार्ड का उपयोग करके शादी करने से पहले यह जांच लें कि उनके बेटे या बेटियां सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित तो नहीं हैं.

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मधय परदश: कगरस वधयक जत पटवर क मल एक सल क सज जमनत पर रह

भोपाल: मध्य प्रदेश में भोपाल की एक विशेष अदालत ने 2009 के दंगा और सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य में बाधा डालने के एक मामले में शनिवार को कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी और तीन अन्य को दोषी करार देते हुए एक साल कैद की सजा सुनाई . विधायकों और सांसदों की सुनवाई के लिए एमपी-एमएलए विशेष अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) विधान माहेश्वरी ने पटवारी, पूर्व कांग्रेस विधायक कृष्ण मोहन मालवीय, सुरेन्द्र मरमट और घनश्याम वर्मा को एक-एक साल कैद की सजा सुनाई और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

इंदौर के राऊ से विधायक पटवारी पर 2009 में राजगढ़ में किसान आंदोलन के दौरान दंगा करने और सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने का आरोप था. उनके वकील अजय गुप्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया कि उन्हें मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा, क्योंकि सजा दो साल या उससे अधिक की नहीं है.

अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2009 में पटवारी सहित सभी आरोपी राजगढ़ में किसान आंदोलन को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे. इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने पथराव शुरू कर दिया था जो घटना बलवा में तब्दील हो गई थी. गुप्ता ने बताया कि बाद में इसी विशेष अदालत ने पटवारी और अन्य को निजी मुचलके पर जमानत दे दी. उन्होंने कहा, ‘‘हम अदालत के आदेश के खिलाफ 30 दिनों के भीतर सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर करेंगे.''

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Saturday, July 1, 2023

"भरत क वचर क खलफ ह यनफरम सवल कड": मघलय क CM कनरड सगम क बड बयन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बहस छिड़ गई है. जहां आम आदमी पार्टी और उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट ने इसका समर्थन किया है. वहीं, नॉर्थईस्ट राज्य मेघालय में मुख्यमंत्री और बीजेपी की सहयोगी पार्टी एनपीपी के अध्यक्ष कॉनराड के. संगमा ने इसकी आलोचना की है. मेघालय के सीएम कॉनराड संगमा ने कहा कि समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर भारत के वास्तविक विचार के खिलाफ है. नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के अध्यक्ष संगमा ने यहां मीडियाकर्मियों से कहा कि यूसीसी देश के लिए उपयुक्त नहीं है. यह भारत के वास्तविक विचार के खिलाफ है, जो विविधता में एकता की विशेषता वाला एक विविध राष्ट्र है. 

संगमा ने कहा, ''मैं पार्टी के दृष्टिकोण से बात कर रहा हूं. एनपीपी के मुताबिक समान नागरिक संहिता भारत की वास्तविक भावना के खिलाफ है. विविध संस्कृतियां, परंपराएं, जीवनशैली और धर्म देश की ताकत हैं.'' उन्होंने आगे कहा, “मेघालय एक मातृसत्तात्मक समाज है और यही हमारी ताकत है. जिस संस्कृति और अन्य पहलुओं का हम लंबे समय से अनुसरण कर रहे हैं, उन्हें बदला नहीं जा सकता. एक राजनीतिक दल के रूप में, हमें एहसास है कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को एक अनूठी संस्कृति मिली है. हम नहीं चाहेंगे कि हमारी परंपरा और संस्कृति को छुआ जाए."

एनपीपी बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) की सहयोगी है. यह सत्तारूढ़ मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) का नेतृत्व करती है. दो विधायकों के साथ बीजेपी एमडीए सरकार में भागीदार है. एनपीपी का मेघालय के अलावा मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश में मजबूत राजनीतिक आधार है. 

पीएम मोदी ने यूसीसी पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भोपाल में बीजेपी के ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत' कार्यक्रम में यूसीसी को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि वोट बैंक के भूखे लोग हैं जो तीन तलाक की वकालत करते हैं. भारत के मुसलमान भाई-बहनों को ये समझना होगा कि कौन से राजनीतिक दल हैं जो उन्हें भड़काकर उनका फायदा उठाना चाहते हैं. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कुछ लोग यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर मुस्लिम भाई-बहनों को भड़का रहे हैं क्या एक ही परिवार में दो तरह के नियम चलते हैं?

एक ही परिवार में दो नियम नहीं हो सकते-पीएम
यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में पीएम मोदी ने आगे कहा कि लोगों को गलत अफवाह फैलाते हैं कि एक ही परिवार में हर एक के लिए अलग-अलग व्यवस्था होगी. वह आगे सवाल करते हैं कि क्या इस तरह परिवार चल पाएगा? 

क्या है यूसीसी?
समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों के लिए उनके धर्म, लिंग, लिंग और यौन रुझान की परवाह किए बिना व्यक्तिगत कानून बनाने और लागू करने का एक प्रस्ताव है. इस समय विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानून उनके धार्मिक ग्रंथों द्वारा शासित होते हैं. 

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शवपर: शमशन घट पर नह टनशड दर स हआ अतम ससकर

मध्य प्रदेश/ शिवपुरी: जिले के पौड़ी तहसील में श्मशान घाट पर शेड नहीं होने के कारण लोगों को अंतिम संस्कार में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. बीते दिनों में गांव के एक युवक की मृत्यु हो गई और भारी बारिश हो रही थी. शव का अंतिम संस्कार के लोगों ने घंटों इंतजार किया. लेकिन जब पानी बंद नहीं हुआ तो परिजन त्रिपाल लेकर श्मशान घाट पहुंचे, जहां युवक का शव रखा गया और फिर जैसे तैसे उसका अंतिम संस्कार किया गया.

यह कस्बा पूरी तहसील से बिल्कुल लगा हुआ है और इस क्षेत्र की आबादी लगभग 9000 से ज्यादा है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस इलाके  से चंद दूरी पर पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर सुरेश राज खेड़ा का भव्य निवास स्थान भी है. लेकिन सिस्टम की लापरवाही के कारण यहां अब तक श्मशान घाट और शेड का निर्माण नहीं हो पाया है.

बताया जाता है कि इस इलाके में श्मशान घाट के निर्माण के लिए नगर परिषद परी ने 88 लाख रुपए का बजट आवंटित किया है. ठेका दिया जा चुका था .लेकिन काम का ठीक ढंग से निष्पादन नहीं होने के कारण इस ठेके को निरस्त कर दिया गया. अब स्थिति जस की तस बनी हुई है और बरसात में अगर किसी की मौत हो जाए तो उसे जलाना भी अब ग्रामीणों के लिए कितना मुश्किल हो गया है यह किसी से छुपा नहीं है.
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इदर क अनठ मदर जह 108 बर शर रम लखन क बद ह मलत ह एटर

इंदौर शहर एक अनोखा मंदिर है जिसका नाम है 'अपने राम का निराला धाम'. इस मंदिर में भक्तों को तब तक प्रवेश नहीं मिलता है, जब कि वह 108 बार राम नाम नहीं लिख लेते हैं. मंदिर में साफ लिखा है कि यहां पर 108 बार श्री राम लिखने की शर्त पर ही प्रवेश मिलेगा. यह मंदिर इंदौर के कनाडिया रोड स्थित वैभव नगर में मौजूद है. बजरंगबली का यह मंदिर अपने आप में अनोखा है. जिसकी ख्याति दूर-दूर तक है, जिसे इसी बात से जाना जा सकता है कि यहां विदेशी भक्त भी दर्शन करने पहुंचते हैं.

इस मंदिर के पुजारी प्रकाश बागरेचा बताते हैं कि उन्हें बजरंगबली सपने में आए थे और कहा कि खुद की जमीन पर मंदिर का निर्माण करवाओ. बस फिर क्या था 1990 में मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया, जो आज तक निरंतर जारी है. इस मंदिर की अनोखी बात यह भी है कि बालाजी के मंदिर के ठीक ऊपर रावण को भी स्थान दिया गया है. साथ ही शिव के सामने भी रावण की प्रतिमा भक्ति करते हुए दर्शाई गई है.

मंदिर के संरक्षक हैं श्री रामचंद्र जी
एक खास बात और इस मंदिर की है कि इस मंदिर में संरक्षक श्री रामचंद्र जी, अध्यक्ष हनुमान जी, कोषाध्यक्ष कुबेर, सेक्रेटरी भोलेनाथ, सुरक्षा अधिकारी यमराज, लेखा-जोखा अधिकारी चित्रगुप्त और वास्तुविद् विश्वकर्मा बनाए गए हैं. 

रामायण के सभी पात्रों के दर्शन मौजूद
इस मंदिर में रामायण के सभी पात्र मौजूद हैं और मंदिर में श्री राम दरबार, गणपति जी, महाकाल और पूरी रामायण के चरित्र यहां देखने को मिलते हैं. 

महाभारत का भी होगा उल्‍लेख 
प्रकाश वागरेचा कहते हैं कि यहां श्री कृष्ण का विराट स्वरूप विराजित है. श्री राम की रामायण यहां मौजूद है और आने वाले समय में यहां महाभारत का उल्लेख भी किया जाएगा. 

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शद स ठक एक दन पहल यवक न क आतमहतय पलस न छह लग क खलफ दरज कय ममल

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में बुधवार को एक युवक ने होटल में आत्‍महत्‍या कर ली. युवक एक व्‍यवसायी था और उसने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. इस मामले में कोतवाली पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ आत्‍महत्‍या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया है. यह मामला करोड़ों रुपये की रकम की सट्टेबाजी से भी जुड़ा बताया जा रहा है. ऐसे में पुलिस घटनास्थल पर मिले मृतक के सुसाइड नोट के आधार पर जांच में जुटी हुई है. 

दरअसल, शहर के व्यवसायी और लंकापारा में रहने वाले मृतक हंसराज अग्रवाल की गुरुवार को शादी होने वाली थी. शादी से ठीक एक दिन पहले हंसराज अग्रवाल ने बुधवार की रात को होटल आदित्य के कमरा नम्बर 205 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. 

पुलिस को मौके से एक देशी रिवॉल्वर, मोबाइल फोन और सुसाइड नोट बरामद हुआ था.

पुलिस के मुताबिक, सुसाइड नोट में करोड़ों रुपये के सट्टे और आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की जानकारी सामने आई है. जिसके आधार पर पुलिस छह लोगो के खिलाफ धारा 306 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है. साथ ही पुलिस अब इस मामले की जांच में जुट गई है.  

हालांकि इस मामले में पुलिस पूरी एहतियात बरत रही है. जिन छह लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज हुआ है, फिलहाल उनके नाम उजागर करने से पुलिस कतरा रही है.

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