बॉलीवुड फिल्म ‘द केरल स्टोरी' का ट्रेलर आया तो पहले दावा किया गया कि यह केरल की 32,000 लड़कियों की कहानी है जिन्हें कट्टरपंथी बनाया गया है. लेकिन बाद में बदलाव किया गया और अब ट्रेलर में यह तीन लड़कियों की कहानी बताई जा रही है.
इस बदलाव के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट का कहा कि, “वे सही साबित हुए.“ इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस कहानी को एक संगठन का एजेंडा बताया था.
वैसे 'रील' और 'रियल स्टोरी' का फर्क सरकारी आंकड़े भी बताते हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक भारत से 62 नौजवान विदेश गए जो ISIS से जुड़ गए. जांच एजेंसियों के पास इस बात के भी सबूत हैं कि देश के बाहर रहने वाले 68 भारतीयों के भी ISIS से संबंध है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया, “इसके प्रमाण भी हमारे पास हैं और कानून के मुताबिक हमने कार्रवाई भी की है.” उनके मुताबिक 130 लोग, जिनके सबूत भारतीय एजेंसियों के पास हैं कि वे किसी ना किसी तरह ISIS के संपर्क में हैं. उनमें से 95 फीसदी दक्षिण भारत से हैं और ज्यादातर महिलाएं नहीं हैं.
उन्होंने बताया कि, “केंद्र सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है. यही वजह है कि 2014 से अब तक भारतीय एजेंसियां 274 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं. उनके इस आतंकी गुट से रिश्ते सामने आए हैं.”
सरकारी सूत्रों ने हालांकि माना कि यह डेटा केवल उन मामलों के लिए है जहां भर्ती हुए लोगों के परिवार से सरकारी एजेंसियों द्वारा संपर्क किया गया. उन्होंने कहा कि ऐसे अन्य भी हो सकते हैं जिनके बारे में डेटा उपलब्ध नहीं है.
एक NIA अधिकारी ने बताया कि, “हमारी जांच में ज्यादातर ऐसे कई मामले सामने आए जो ऑनलाइन रेडिकलाइज़ हुए. इन सभी मामलों को संवेदनशीलता से परखा गया. कई लोगों को तो सरकार ने काउंसलिंग करके और कुछ को वार्निंग देकर भी छोड़ा.”
ऐसे मामलों से जुड़े एक ऑपरेटिव ने कहा, "चुनौती यह है कि कट्टरता अब बहुत आसानी से हो रही है क्योंकि सभी सामग्री इंटरनेट पर उपलब्ध है. ऐसे मामले हैं जिन्हें हम ट्रैक करने का प्रबंधन करते हैं लेकिन कानूनी कार्रवाई भी नहीं करते हैं. इसके बजाय हम उन लोगों की काउंसलिंग करने की कोशिश करते हैं जिनका ब्रेनवॉश किया जा रहा है. कई बार हम लोगों को पर्याप्त चेतावनी देने के बाद छोड़ देते हैं."
ऐसे मामलों में जहां गिरफ्तारी हुई है, जांच से पता चला है कि आईएसआईएस ने उस व्यक्ति को ऑनलाइन भर्ती किया था और उसे समूह द्वारा स्थापित डार्क वेब अकादमी में कट्टरपंथीकरण और आतंक प्रशिक्षण के लिए नामांकित किया था.
एक अधिकारी ने बताया, “आईएसआईएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन संपर्क करके युवाओं की पहचान की. कुछ मामलों में इन कट्टरपंथियों को डी-रेडिकलाइज़ करने के लिए हमने मनोवैज्ञानिकों की भी मदद ली.”
उनके मुताबिक़ कई राज्य जागरूकता फैलाने के लिए विद्वानों, मौलवियों और गैर सरकारी संगठनों को भी शामिल करते हैं. जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमारे पुनर्वास कार्यक्रमों को खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में युवाओं की ऊर्जा को चैनलाइज़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है."
"केरल की कहानी" लव जिहाद के इर्द-गिर्द घूमती है. लव जिहाद एक ऐसी अवधारणा है जिसे विभिन्न अदालतों, जांच एजेंसियों और यहां तक कि सरकार ने खारिज कर दिया है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2020 में संसद को सूचित किया, "'लव जिहाद' शब्द को मौजूदा कानूनों के तहत परिभाषित नहीं किया गया है. किसी भी केंद्रीय एजेंसी द्वारा 'लव जिहाद' का ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है."
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